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Bodaki Terminal News : बोड़ाकी टर्मिनल बनेगा वेस्ट यूपी का सबसे बड़ा ट्रांसपोर्ट हब!, एक ही छत के नीचे मिलेगी ट्रेन, मेट्रो और बस की सुविधा, एक साल में पूरा होगा सर्वे और शिफ्टिंग कार्य, एक ही जगह — ट्रेन, मेट्रो और बस का संगम, बोड़ाकी भविष्य का ‘Gateway of Eastern India’, ₹1685 करोड़ की परियोजना, तीन साल में पूरा होगा टर्मिनल

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। ग्रेटर नोएडा का बोड़ाकी टर्मिनल (Bodaki Terminal) अब वेस्ट यूपी के सबसे बड़े परिवहन केंद्र के रूप में तेजी से आकार ले रहा है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने पुष्टि की है कि भूमि अधिग्रहण सर्वे (Land Acquisition Survey) और शिफ्टिंग प्रक्रिया अगले एक वर्ष के भीतर पूरी कर ली जाएगी। लगभग 90% सर्वे कार्य पहले ही पूरा हो चुका है, जबकि किसानों की सहमति से shifting process को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

इस बहु-आयामी (Multi-Modal) टर्मिनल की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यात्रियों को एक ही छत के नीचे ट्रेन, मेट्रो और बस की सुविधा मिलेगी। यानी अब ग्रेटर नोएडा के लोगों को दिल्ली या गाजियाबाद तक ट्रेन पकड़ने के लिए नहीं जाना पड़ेगा।

पूर्वी भारत से जुड़ने का बनेगा बड़ा केंद्र

बोड़ाकी टर्मिनल प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य पूर्वी भारत के राज्यों — विशेष रूप से बिहार, झारखंड और बंगाल — को सीधे ग्रेटर नोएडा से जोड़ना है। इस परियोजना के तहत करीब 70 ट्रेनों का संचालन प्रस्तावित है, जिनमें सबसे अधिक ट्रेनें बिहार के लिए चलेंगी। इससे न केवल प्रवासी मजदूरों और छात्रों को लाभ मिलेगा, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र से भी व्यापारिक ट्रेनों की आवाजाही को नया आयाम मिलेगा।

अधिकारियों के अनुसार, टर्मिनल शुरू होने के बाद लगभग 35 लाख से अधिक यात्रियों को सीधा लाभ होगा। जिले के लोग अब दिल्ली के आनंद विहार या नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जाने के बजाय अपने शहर से ही सफर कर सकेंगे।

तेजी से आगे बढ़ रहा सर्वे और शिफ्टिंग कार्य

हाल ही में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और रेलवे अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक हुई, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि अगले एक वर्ष के भीतर सर्वे और शिफ्टिंग का काम पूरी तरह समाप्त कर लिया जाएगा। प्रशासनिक टीम लगातार बोड़ाकी, पल्ला और पाली गांवों में जाकर किसानों से संवाद कर रही है और भूमि संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है।

डीएम मेधा रूपम ने कहा “किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। परियोजना से उनके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन करने के लिए जल्द ही Social Impact Assessment Survey कराया जाएगा।”

यह सर्वे रिपोर्ट तय करेगी कि विस्थापित परिवारों को किस प्रकार का मुआवज़ा और पुनर्वास पैकेज दिया जाएगा।

₹1685 करोड़ की परियोजना, तीन साल में पूरा होगा टर्मिनल

इस विशाल परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹1685 करोड़ रखी गई है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ श्रीलक्ष्मी वी.एस. ने बताया “हमारा प्राथमिक लक्ष्य अगले एक साल में सर्वे और शिफ्टिंग का कार्य पूरा करना है। इसके बाद निर्माण का काम शुरू किया जाएगा ताकि तीन साल के भीतर टर्मिनल यात्रियों के लिए चालू हो सके।”

टर्मिनल के निर्माण में आधुनिक Infrastructure Design, Smart Passenger Management System, Integrated Metro-Rail Connectivity, और Eco-Friendly Transit Hubs की तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

एक ही जगह — ट्रेन, मेट्रो और बस का संगम

बोड़ाकी टर्मिनल को “मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब (MMTH)” के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका अर्थ यह है कि यहां तीनों प्रमुख सार्वजनिक परिवहन साधन —
1) रेलवे स्टेशन,
2) नोएडा मेट्रो का टर्मिनल स्टेशन, और
3) इंटरसिटी बस टर्मिनल
— एक ही जगह मौजूद होंगे।

यात्रियों को टिकटिंग, वेटिंग एरिया, फूड कोर्ट, शॉपिंग कॉरिडोर और पार्किंग की सभी सुविधाएं एकीकृत तरीके से मिलेंगी।

ग्रेटर नोएडा को मिलेगा विकास का नया आयाम

यह परियोजना न केवल परिवहन के लिहाज से बल्कि आर्थिक विकास (Economic Growth) के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है। बोड़ाकी टर्मिनल के आसपास लॉजिस्टिक पार्क, होटल इंडस्ट्री, कमर्शियल हब, और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के विकास की संभावना भी तेज़ी से बढ़ जाएगी।

स्थानीय उद्यमियों का मानना है कि यह टर्मिनल ग्रेटर नोएडा को उत्तर भारत का प्रमुख ट्रांसपोर्ट और बिजनेस हब बना देगा।

बोड़ाकी: भविष्य का ‘Gateway of Eastern India

यमुना एक्सप्रेसवे, जेवर एयरपोर्ट, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और अब बोड़ाकी टर्मिनल — इन चारों प्रोजेक्ट्स के संगम से ग्रेटर नोएडा भारत का नया लॉजिस्टिक और इंडस्ट्रियल पॉवरहाउस बनने की दिशा में है।

अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही टर्मिनल चालू होगा, जेवर एयरपोर्ट से आने-जाने वाले यात्रियों को भी सीधा रेल और मेट्रो कनेक्शन मिलेगा, जिससे यात्रा और सुगम हो जाएगी।

स्थानीय जनता की उम्मीदें और भविष्य की संभावनाएं

ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों में इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्साह स्पष्ट है। बोड़ाकी, पल्ला और पाली गांवों के किसान अब अपनी भूमि का उचित मुआवज़ा और रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वहीं शहरवासी इस उम्मीद में हैं कि यह टर्मिनल ग्रेटर नोएडा को दिल्ली-एनसीआर की ट्रांसपोर्टेशन चेन का “सेंटर पॉइंट” बना देगा।

बोड़ाकी टर्मिनल केवल एक परिवहन परियोजना नहीं है — यह ग्रेटर नोएडा के नए युग की शुरुआत है। जैसे-जैसे सर्वे और शिफ्टिंग का कार्य आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उम्मीदों का नया सूरज भी उग रहा है। तीन साल बाद जब यह टर्मिनल पूरी तरह तैयार होगा, तो ग्रेटर नोएडा न केवल “स्मार्ट सिटी” कहलाएगा बल्कि “कनेक्टेड सिटी ऑफ इंडिया” के रूप में देशभर में अपनी पहचान बनाएगा।

रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
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