
ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे स्पेशल रिपोर्ट,पर्यावरण संकट विशेष
मुख्यमंत्री के “हरियाली मिशन” पर चला कुल्हाड़ी का वार? अवैध कटाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा, पुलिस-प्राधिकरण-वन विभाग की जिम्मेदारी टालने की होड़
ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे।
तेजी से विकसित हो रहे स्मार्ट शहर ग्रेटर नोएडा से एक बार फिर पर्यावरणीय अपराध की गंभीर खबर सामने आई है। पॉश सेक्टर पाई-3 में स्थित स्टेलर आइकॉन और यूनिटेक हाइट्स के सामने के हरित क्षेत्र से करीब 100 हरे पेड़ों की अवैध कटाई ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। यह घटना अल्फा-2 सेक्टर में हाल ही में हुई अवैध कटाई की पुनरावृत्ति मानी जा रही है, जहां नीलय स्क्वायर बिल्डर ने प्रोजेक्ट प्रमोशन के नाम पर पेड़ काट दिए थे।
स्थानीय निवासियों का दावा: “रातों-रात कटा जंगल, ट्रक में भर ले जाई गई लकड़ियां”
स्थानीय निवासियों ने बताया कि उन्होंने रात में लकड़ियों से भरा एक ट्रक मौके से जाते देखा और तुरंत वन विभाग को फोन किया। उनका आरोप है कि इस कटाई की कोई वैध अनुमति नहीं ली गई थी। घटनास्थल पर बची जड़ें और ताज़ा कटे पेड़ों के तने इस बात की पुष्टि करते हैं कि हरे-भरे पेड़ों की बलि दी गई है।
“यह क्षेत्र सालों से हमारे लिए फेफड़ों की तरह था। अब यहां सिर्फ मिट्टी और ठूंठ बचे हैं,” — स्टेलर आइकॉन निवासी, अनीता भल्ला
EXCLUSIVE: रफ्तार टुडे संवाददाता ने मौके पर लिए गए फोटो और वीडियो में पेड़ काटे जाने के प्रमाण देखे
रफ्तार टुडे को मिले मौके के वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पुष्टि करते हैं कि यह पूरी घटना सुनियोजित और योजनाबद्ध रूप से अंजाम दी गई। स्थानीय युवाओं ने ट्रक को रोका भी, लेकिन कटाई करने वाले लोग मौके से फरार हो गए।
किसकी जिम्मेदारी? पुलिस कहे वन विभाग की, वन विभाग कहे – पता नहीं कौन काट गया!
बीटा-2 कोतवाली के प्रभारी विनोद कुमार का कहना है कि उन्हें अब तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है और ऐसे मामलों में कार्रवाई वन विभाग का अधिकार क्षेत्र है।
वहीं, वन विभाग की ओर से भी अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। वन क्षेत्राधिकारी से संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
“जिम्मेदारी तय न होने से अपराधी खुले में घूम रहे हैं, और हरियाली उजड़ रही है।” — पर्यावरण कार्यकर्ता, रवि श्रीवास्तव
क्या ये हरित क्षेत्र अब बिल्डर प्रोजेक्ट की बलि चढ़ेगा?
सूत्रों के अनुसार, यह पूरा क्षेत्र एक संरक्षित हरित जोन था, जिसे कुछ बिल्डर्स प्रोजेक्ट प्रमोशन और विस्तारीकरण के लिए बाधा मान रहे थे। इस वजह से कटाई कर जमीन खाली करने की आशंका जताई जा रही है।
बिल्डरों और अफसरों की गठजोड़ की बू भी स्थानीय लोगों को महसूस हो रही है, जिन्होंने मांग की है कि:
- NGT या उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच हो।
- गौरव पथ और ग्रीन बेल्ट को बचाने के लिए सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए।
- दोबारा वृक्षारोपण और जुर्माना सुनिश्चित किया जाए।
“न केवल पेड़ कटे हैं, भविष्य की सांसें छीनी गई हैं” — जनता में उबाल
प्रदूषण की मार झेल रहे गौतमबुद्धनगर में पेड़ों की भूमिका केवल सौंदर्य बढ़ाने की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य रक्षक की है। ऐसे में इस प्रकार की गतिविधि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जीवन संकट बन सकती है।
“जब सरकार करोड़ों पौधे लगाने का दावा कर रही है, उसी राज्य में पेड़ों का यूं कटना एक विडंबना है,” — सेवानिवृत्त शिक्षक, दिनेश चड्ढा
रफ्तार टुडे का विशेष विश्लेषण: हाल के वर्षों में अवैध कटाई के बड़े मामले
| स्थान | वर्ष | अवैध कटे पेड़ | स्थिति |
|---|---|---|---|
| DCM देबू प्लांट, नोएडा | 2021 | 1000+ | मामला NGT में |
| अल्फा-2 सेक्टर | 2024 | दर्जनों | बिल्डर पर FIR, लेकिन निर्माण जारी |
| सेक्टर पाई-3 | 2025 | 100 | जांच लंबित, कार्रवाई शून्य |
जनता की मांगें
✅ तुरंत FIR दर्ज हो
✅ जिम्मेदारों की पहचान और गिरफ्तारी
✅ 2 गुना वृक्षारोपण अभियान चलाया जाए
✅ सभी हरित क्षेत्रों की GPS आधारित निगरानी हो
✅ जनभागीदारी से मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाए
क्या कहता है कानून?
- भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत बिना अनुमति पेड़ काटना दंडनीय अपराध है
- दोषी को 3 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है
- हरित क्षेत्र में कटाई पर NGT का स्पष्ट निर्देश है — No tree felling without written clearance
Raftar Today की अपील
अगर आपके इलाके में हो रही है अवैध कटाई, हमें भेजें फोटो/वीडियो — हम उठाएंगे आपकी आवाज़
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🌱 पेड़ सिर्फ हरियाली नहीं, हमारे कल की सांसें हैं। उन्हें बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।



