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    Breaking PM Modi News : 8:30 बजे देश की नज़रें PM पर—क्या फिर होगा कोई ‘सरप्राइज’ ऐलान? मोदी के संबोधन से पहले सियासी गलियारों में हलचल तेज, लोकसभा समीकरण, गिरा बिल और महिला आरक्षण की अटकलें—प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले बढ़ी उत्सुकता

    नई दिल्ली, रफ़्तार टूडे ।  देश की राजनीति में आज शाम एक बार फिर बड़ा मोड़ आ सकता है, जब नरेन्द्र मोदी रात 8:30 बजे राष्ट्र के नामसंबोधन देंगे। प्रधानमंत्री के इस संबोधन को लेकर पूरे देश में उत्सुकता का माहौल है, क्योंकि उनका ट्रैक रिकॉर्डबताता है कि जब–जब उन्होंने देश को संबोधित किया है, तब–तब कोई बड़ा और चौंकाने वाला फैसला सामनेआया है। यह संबोधन ऐसे समय पर हो रहा है, जब केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार लोकसभा में दो–तिहाईबहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर पाई है, जिससे सियासी चर्चाएं और भी तेज हो गई हैं। “मोदी का संबोधन—हर बार बड़ा फैसला, हर बार चौंकाने वाला अंदाज़” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन हमेशा चर्चा का विषय रहा है। पिछले वर्षों में उनके कई संबोधनऐतिहासिक फैसलों के साथ जुड़े रहे हैं— 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का ऐलान जम्मू–कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटने के बाद संबोधन कोरोना काल में जनता कर्फ्यू और लॉकडाउन की घोषणा “आत्मनिर्भर भारत” अभियान और 20 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान इन सभी फैसलों ने देश की दिशा और दशा दोनों पर गहरा प्रभाव डाला। ऐसे में आज का संबोधन भी किसी बड़ेनिर्णय की ओर इशारा कर रहा है। “लोकसभा में झटका—24 साल बाद गिरा बड़ा सरकारी बिल” हाल ही में संसद में एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब 24 साल बाद कोई सरकारी बिल लोकसभा में पासनहीं हो पाया। विशेष रूप से, 17 अप्रैल 2026 को एक संविधान संशोधन विधेयक गिर गया, जो वर्ष 1990 के बाद इस तरह कापहला मामला माना जा रहा है। इससे पहले 2002 में पोटा (POTA) बिल भी संसद में पारित नहीं हो पाया था। इस घटनाक्रम ने सरकार की रणनीति और आगामी फैसलों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। “महिला आरक्षण पर बड़ा फैसला? अटकलों का बाजार गर्म” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील औरमहत्वपूर्ण मुद्दे पर बड़ा ऐलान कर सकते हैं। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा सियासी परिस्थितियों को देखते हुए इस संभावनाको नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। “अध्यादेश का रास्ता भी खुला—सरकार के पास विकल्प मौजूद” यदि संसद में किसी बिल को पास कराने में कठिनाई आती है, तो केंद्र सरकार के पास अध्यादेश लाने कासंवैधानिक विकल्प भी मौजूद होता है। ऐसे में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में किसी अध्यादेश की घोषणा कर सकते हैं, जिससे लंबित मुद्दों पर तेजी से निर्णय लिया जा सके।…

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