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Noida Punjabi Baisakhi News : “नोएडा में गूंजा ‘सत श्री अकाल’ का जयघोष—ढोल की थाप, शबद कीर्तन और लंगर सेवा के संग बैसाखी महोत्सव बना एकता, संस्कृति और आस्था का भव्य उत्सव!”, पंजाबी विकास मंच द्वारा सेक्टर-12 गुरुद्वारा साहिब में भव्य आयोजन, 600 से अधिक संगत ने लिया आशीर्वाद

नोएडा, रफ़्तार टूडे । नोएडा के सेक्टर-12 स्थित गुरुद्वारा साहिब में सोमवार, 13 अप्रैल 2026 की शाम एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने न केवल पंजाबी समाज बल्कि पूरे शहर को उत्साह, भक्ति और भाईचारे के रंग में रंग दिया। पंजाबी विकास मंच द्वारा आयोजित बैसाखी महोत्सव पूरे हर्षोल्लास और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लेकर इस पर्व को यादगार बना दिया।
इस आयोजन में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक रंग और सामाजिक एकता का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत गुरुद्वारा साहिब में शबद कीर्तन से हुई, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।


“शबद कीर्तन में डूबी संगत—भक्ति की धारा में बहा पूरा माहौल”
विश्व प्रसिद्ध रागी भाई सरबजीत सिंह खालसा द्वारा प्रस्तुत किए गए शबद कीर्तन ने संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी मधुर वाणी और भावपूर्ण प्रस्तुति ने हर किसी को भक्ति के रंग में रंग दिया। श्रद्धालु गुरुद्वारे में मत्था टेककर गुरु का आशीर्वाद लेते नजर आए।
कीर्तन के दौरान गुरु घर का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया, जहां हर व्यक्ति अपने मन को शांति और श्रद्धा से भरता हुआ दिखाई दिया।


“लंगर सेवा में दिखी सेवा भावना—600 से अधिक लोगों ने एक साथ बैठकर ग्रहण किया प्रसाद”
कीर्तन के उपरांत गुरु घर में विशाल लंगर सेवा का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 600 से अधिक श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।
लंगर सेवा के दौरान सेवा भाव, समानता और भाईचारे का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जहां किसी प्रकार का भेदभाव नहीं था—हर कोई एक ही पंक्ति में बैठकर भोजन कर रहा था। यह दृश्य सिख धर्म की उस महान परंपरा को दर्शाता है, जो मानवता और समानता का संदेश देती है।


“बैसाखी का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व—खालसा पंथ की स्थापना से जुड़ा पर्व”
इस अवसर पर मंच के चेयरमैन दीपक विग ने बैसाखी पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इसी दिन सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने वर्ष 1699 में आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य समाज में साहस, आत्मबल और समानता की भावना को बढ़ावा देना था।

“किसानों के लिए खुशियों का पर्व—रबी की फसल के साथ समृद्धि का जश्न”
मंच के डिप्टी चेयरमैन संजीव पुरी ने बताया कि बैसाखी को भारत में कृषि पर्व के रूप में भी मनाया जाता है।
जब खेतों में रबी की फसल पककर तैयार होती है, तब किसान इस पर्व को बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं और ईश्वर का धन्यवाद करते हैं। यह पर्व मेहनत, समर्पण और समृद्धि का प्रतीक है।

“धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण—गंगा स्नान का विशेष महत्व”
मंच के संरक्षक जे एम सेठ ने बताया कि बैसाखी के दिन सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है और हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थलों पर लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। धार्मिक मान्यता के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस दिन का महत्व बताया गया, जिसमें सूर्य की ऊर्जा और प्रकृति के संतुलन का उल्लेख किया गया।


“ढोल की थाप पर झूमे लोग—भांगड़ा ने बढ़ाया उत्सव का जोश”
कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भी पूरी तरह देखने को मिला। ढोल की थाप पर बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने भांगड़ा कर अपनी खुशियों का इजहार किया।
पूरा माहौल “सत श्री अकाल” के जयघोष और तालियों की गूंज से जीवंत हो उठा। यह दृश्य दर्शाता है कि कैसे त्योहार समाज को जोड़ने और खुशियां बांटने का माध्यम बनते हैं।


“नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का संकल्प”
मंच के अध्यक्ष जी.के. बंसल ने कहा कि पंजाबी विकास मंच का उद्देश्य केवल त्योहार मनाना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और गुरुओं की शिक्षाओं से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में अपनी जड़ों से जुड़े रहना बेहद जरूरी है और ऐसे आयोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

“गणमान्य लोगों की मौजूदगी से बढ़ी कार्यक्रम की गरिमा”
इस आयोजन में समाज के कई गणमान्य लोगों और मंच के पदाधिकारियों ने भाग लिया, जिनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। सभी ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया और एकता व भाईचारे का संदेश दिया।


“एकता, सेवा और संस्कृति का संगम—नोएडा में बैसाखी बनी यादगार”
नोएडा में आयोजित यह बैसाखी महोत्सव केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा भावना और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा।
इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब समाज एकजुट होकर अपने त्योहार मनाता है, तो वह केवल परंपराओं को नहीं निभाता, बल्कि एक मजबूत और सकारात्मक समाज का निर्माण भी करता है।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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