Dog Breaking News : “कुत्तों का डर, इंसानों की बेबसी!”, ग्रेटर नोएडा सेक्टर MU-2 में आवारा कुत्तों का कहर, मॉर्निंग वॉक बनी खौफनाक—महिला पर झुंड ने किया जानलेवा हमला, प्राधिकरण की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। ग्रेटर नोएडा को आधुनिक शहर और स्मार्ट सिटी का दर्जा दिलाने के दावे करने वाला प्रशासन आज एक बुनियादी और गंभीर समस्या के सामने पूरी तरह बेबस नजर आ रहा है। सेक्टर MU-2 में आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ चुका है कि अब सुबह की मॉर्निंग वॉक, बच्चों का पार्क में खेलना और बुजुर्गों का टहलना भी जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। ताजा और बेहद चिंताजनक मामला आज सामने आया, जब सेक्टर MU-2 स्थित शिव शक्ति अपार्टमेंट के पास पार्क में टहलने निकली एक महिला पर आवारा कुत्तों के झुंड ने अचानक हमला कर दिया।
मॉर्निंग वॉक बनी भयावह अनुभव
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आज सुबह फ्लैट नंबर 1645 निवासी लक्ष्मी देवी रोज की तरह पार्क में मॉर्निंग वॉक के लिए निकली थीं। तभी अचानक चार से पांच आवारा कुत्तों ने उन्हें घेर लिया और हमला कर दिया। महिला के चीखने-चिल्लाने पर आसपास मौजूद लोग दौड़े, लेकिन तब तक कुत्ते उन्हें बुरी तरह घायल कर चुके थे। स्थानीय लोगों की मदद से किसी तरह महिला को कुत्तों से छुड़ाया गया और इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
सेक्टर में दहशत, लोगों में आक्रोश
इस घटना के बाद पूरे सेक्टर MU-2 में दहशत और आक्रोश का माहौल है। सेक्टरवासी गुस्से में हैं और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि पिछले कई महीनों से आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर हमले अब आम बात हो चुकी है।
पहले भी हो चुके हैं कई हमले
स्थानीय निवासियों के अनुसार, इससे पहले भी कई बार बच्चों को स्कूल जाते समय, बुजुर्गों को शाम की सैर के दौरान और महिलाओं को सुबह-शाम टहलते समय कुत्तों ने काटकर घायल किया है। कई मामलों में पीड़ितों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन तक लगवाने पड़े। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।
सुबह-शाम झुंड में घूमते हैं कुत्ते
सेक्टर MU-2 के लोग बताते हैं कि आवारा कुत्ते सुबह और शाम के समय झुंड बनाकर सड़कों, पार्कों और सोसाइटी के आसपास घूमते रहते हैं। बच्चों के खेलने के समय ये कुत्ते अचानक आक्रामक हो जाते हैं। अभिभावकों का कहना है कि अब वे अपने बच्चों को अकेले बाहर खेलने भेजने से डरते हैं।
शिकायतों का ढेर, कार्रवाई नदारद
RWA पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण को कई बार लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं। अधिकारियों को फोन, ई-मेल और व्यक्तिगत रूप से भी अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। सिर्फ आश्वासन दिए जाते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
RWA का अभियान, लेकिन रास्ते में अड़चन
RWA MU-2 के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठी ने बताया कि पिछले वर्ष RWA की ओर से आवारा कुत्तों के खिलाफ एक अभियान चलाया गया था। इस दौरान कुत्तों को पकड़वाने और नसबंदी कराने की मांग की गई थी, लेकिन सेक्टर के ही कुछ कथित कुत्ता प्रेमियों ने इसका विरोध किया। उन्होंने पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई, जिसके चलते RWA के कुछ प्रतिनिधियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हो गया। इसके बाद प्रशासन और RWA दोनों ही स्तर पर कार्रवाई धीमी पड़ गई।
नागरिक सुरक्षा बनाम पशु प्रेम—कौन जिम्मेदार?
सेक्टरवासियों का कहना है कि वे पशु विरोधी नहीं हैं, लेकिन नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। सवाल यह है कि क्या आम लोगों की जान की कीमत पर पशु प्रेम दिखाया जाएगा? लोगों का मानना है कि नसबंदी और वैक्सीनेशन जैसे वैज्ञानिक और मानवीय उपायों से इस समस्या का समाधान संभव है, लेकिन इसके लिए प्रशासन की इच्छाशक्ति जरूरी है।
प्राधिकरण की भूमिका पर सवाल
ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण की भूमिका पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सेक्टरवासियों का कहना है कि जब प्राधिकरण बिजली, पानी, सड़क और सफाई जैसे मुद्दों पर कार्रवाई कर सकता है, तो आवारा कुत्तों की समस्या पर इतनी उदासीनता क्यों? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा?
सेक्टरवासियों में उबाल, आंदोलन की चेतावनी
घटना के बाद RWA MU-2 के पदाधिकारियों—
धर्मेन्द्र राठी (पूर्व RWA अध्यक्ष),
सुमित तेवतिया (RWA महासचिव) और
राजेश शर्मा (कोषाध्यक्ष)
ने एक स्वर में प्राधिकरण से मांग की है कि सेक्टर MU-2 में तत्काल आवारा कुत्तों को पकड़ने, उनकी नसबंदी और वैक्सीनेशन की व्यवस्था की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो सेक्टरवासी आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
महिलाओं और बुजुर्गों की बढ़ती चिंता
सेक्टर की महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा भयभीत हैं। उनका कहना है कि सुबह की सैर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, लेकिन अब डर के कारण घर से निकलना मुश्किल हो गया है। बुजुर्गों का कहना है कि यदि वे गिर जाएं या कुत्तों के हमले का शिकार हो जाएं, तो उनकी जान भी जा सकती है।
बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल
अभिभावकों के लिए सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। स्कूल जाने और लौटने के समय बच्चों पर हमला होने की आशंका बनी रहती है। कई अभिभावकों ने बच्चों को अकेले बाहर भेजना बंद कर दिया है, जिससे उनका मानसिक और शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा है।
अब भी वक्त है, प्रशासन करे ठोस कदम
सेक्टरवासियों का कहना है कि अभी भी समय है कि ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता पर ले और स्थायी समाधान निकाले। नसबंदी, शेल्टर होम, नियमित निगरानी और जागरूकता अभियान जैसे उपायों से आवारा कुत्तों की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
निष्कर्ष
सेक्टर MU-2 की यह घटना सिर्फ एक महिला पर हमला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर एक बड़ा सवाल है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। अब देखना यह है कि प्राधिकरण कब जागता है और कब सेक्टरवासियों को इस भय से मुक्ति मिलती है।



