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Galgotia University News : “ग्रीन मोबिलिटी की रेस शुरू!, गलगोटिया विश्वविद्यालय में ई-बाइक चैलेंज 2026 का धमाकेदार आगाज़”, “देशभर से जुटे युवा इनोवेटर्स, 23 टीमें मैदान में”, “ई-बाइक से सोलर व्हीकल तक—ग्रीन टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन”

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। सतत विकास और ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में Galgotias University में 3 से 7 अप्रैल 2026 तक आयोजित हो रहे राष्ट्रीय ई-बाइक चैलेंज के 9वें संस्करण का भव्य शुभारंभ हो गया है। यह आयोजन देशभर के इंजीनियरिंग छात्रों और नवाचारकर्ताओं को एक ऐसा मंच प्रदान कर रहा है, जहां वे अपनी तकनीकी दक्षता और रचनात्मक सोच का प्रदर्शन कर सकें।

“देशभर से जुटे युवा इनोवेटर्स, 23 टीमें मैदान में”
इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन का संयुक्त रूप से संचालन Imperial Society of Innovative Engineers और गलगोटिया विश्वविद्यालय द्वारा किया जा रहा है।
प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और गोवा से 350 से अधिक प्रतिभागी और 23 टीमें हिस्सा ले रही हैं। यह विविधता न केवल प्रतियोगिता के स्तर को ऊंचा बनाती है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवा इंजीनियरों के बीच ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देती है।


“ई-बाइक से सोलर व्हीकल तक—ग्रीन टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन”
इस चैलेंज में हाई-परफॉर्मेंस गो-कार्ट, ई-बाइक, सोलर वाहन, दो-पहिया और चार-पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों जैसी कई ग्रीन-एनर्जी श्रेणियां शामिल की गई हैं।
प्रतिभागियों को ऊर्जा दक्षता, नवाचार और वास्तविक उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए अपने प्रोटोटाइप डिजाइन, विकसित और परीक्षण करने का अवसर मिल रहा है। यह प्रतियोगिता केवल एक तकनीकी इवेंट नहीं, बल्कि भविष्य की मोबिलिटी का प्रयोगशाला बन चुकी है।

“युवा इंजीनियरों के लिए इनोवेशन का बड़ा मंच”
यह चैलेंज युवा इंजीनियरों को अपनी तकनीकी क्षमता, रचनात्मकता और समस्या-समाधान कौशल को प्रदर्शित करने का बेहतरीन अवसर देता है।
साथ ही, प्रतिभागियों को ऊर्जा संकट, ईंधन निर्भरता और पर्यावरणीय चुनौतियों जैसे वास्तविक मुद्दों को समझने और उनके समाधान विकसित करने का व्यावहारिक अनुभव भी मिल रहा है।

“ऊर्जा संकट के बीच नवाचार की जरूरत—विशेषज्ञों का संदेश”
इस अवसर पर ISIE इंडिया के संस्थापक एवं अध्यक्ष Vinod Gupta ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों के समाधान में उद्योग-समर्थित छात्र नवाचार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं, गलगोटिया विश्वविद्यालय के सीईओ Dr. Dhruv Galgotia ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और ईंधन स्थिरता प्रभावित हो रही है। ऐसे समय में आत्मनिर्भर और सतत मोबिलिटी समाधान विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।


“उद्घाटन सत्र में जुटे दिग्गज”
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कई प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति रही, जिनमें कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के क्षेत्रीय निदेशक Sushil Kumar Agrawal, ऑटोमोबाइल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर Rajeev E, एनेक्सियन ट्रांसफॉर्मेशन के सीईओ Dr. Ajay Srivastava और ओमेगा सेकी मोबिलिटी के सीएचआरओ Nitin Khindria शामिल रहे।


“अकादमिक और इंडस्ट्री के बीच सेतु”
यह आयोजन छात्रों को ऊर्जा दक्ष वाहनों के डिजाइन और निर्माण का व्यावहारिक अनुभव देने के साथ-साथ अकादमिक शिक्षा और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच की दूरी को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्रतिभागियों द्वारा अपने वाहनों का वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण किए जाने से यह प्रतियोगिता और भी अधिक प्रासंगिक बन गई है।


“भारत के सतत भविष्य की ओर बढ़ते कदम”
गलगोटिया विश्वविद्यालय में आयोजित यह ई-बाइक चैलेंज न केवल एक तकनीकी प्रतियोगिता है, बल्कि यह भारत को स्वच्छ ऊर्जा और सतत परिवहन की दिशा में आगे बढ़ाने का एक सशक्त प्रयास भी है।
युवा प्रतिभाओं द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे नवाचार यह संकेत देते हैं कि आने वाले समय में भारत ग्रीन मोबिलिटी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से बढ़ सकता है।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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