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Yatharth Hospital News : इलाज या लापरवाही?, यथार्थ अस्पताल की चूक पर भड़के अधिवक्ता, डीएम ने दिए मेडिकल जांच के आदेश, तीन डॉक्टरों की पैनल करेगी सच्चाई की पड़ताल!, पूर्व बार अध्‍यक्ष के नेतृत्‍व में पूर्व सचिव व अधिवक्‍ताओं ने डीएम से मुलाकात कर की शिकायत


ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
ग्रेटर नोएडा के चर्चित यथार्थ अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार आरोप बेहद गंभीर हैं — एक अधिवक्ता की पत्नी के इलाज में मेडिकल लापरवाही और गलत सूचना देने का। इस मामले में अधिवक्ताओं ने पूर्व बार अध्यक्ष उमेश भाटी के नेतृत्व में जिला मजिस्ट्रेट मनीष कुमार वर्मा से मुलाकात कर अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। डीएम ने तत्काल संज्ञान लेते हुए तीन डॉक्टरों की एक जांच समिति गठित करने के आदेश दिए हैं।

इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर यथार्थ अस्पताल पर अगली कार्रवाई तय की जाएगी। यह मामला न केवल एक परिवार की पीड़ा है, बल्कि पूरे शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल भी खड़े करता है।


अधिवक्ताओं ने खोला मोर्चा, डीएम से की सीधी शिकायत

बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव धीरेंद्र भाटी की पत्नी राखी के इलाज को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अधिवक्ता समुदाय ने इसे सिर्फ व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि व्यवस्था से जुड़ा अहम मुद्दा बताया है। पूर्व बार अध्यक्ष उमेश भाटी के नेतृत्व में डीएम से मिले अधिवक्ताओं ने कहा:

“यदि एक अधिवक्ता की पत्नी के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम नागरिकों की हालत क्या होगी?”


यह था मामला: एक नहीं, दो पथरी… लेकिन निकाली गई सिर्फ एक!

  • राखी को पेट में तेज दर्द की शिकायत थी।
  • अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में दो पथरी की पुष्टि हुई थी।
  • यथार्थ अस्पताल में ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने दावा किया कि दोनों पथरी निकाल ली गईं।
  • एक पथरी दिखा दी गई और दूसरी के बारे में कहा गया कि वह “जांच के लिए लैब भेज दी गई है।”
  • ऑपरेशन के बाद भी मरीज को तेज दर्द होता रहा, लेकिन डॉक्टरों ने इसे सामान्य बताया और आराम करने की सलाह दी।

दोबारा जांच में हुआ खुलासा, गलती की खुद डॉक्टरों ने मानी बात!

  • जब दर्द कम नहीं हुआ, तो धीरेंद्र भाटी ने दोबारा अल्ट्रासाउंड कराया।
  • इसमें सामने आया कि एक पथरी अभी भी मौजूद है और पेट में फ्लूइड या पस जमा हो गया है।
  • यानी ऑपरेशन अधूरा था, और संक्रमण का खतरा गंभीर होता जा रहा था।
  • जब इस पर शिकायत की गई, तो डॉक्टरों ने अपनी गलती स्वीकार की, लेकिन इस बीच मरीज को दर्द और डर से गुजरना पड़ा।

डीएम मनीष कुमार वर्मा का सख्त रुख, जांच कमेटी गठित

मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए डीएम ने सीएमओ (Chief Medical Officer) को निर्देशित किया है कि—

तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक निष्पक्ष जांच समिति बनाई जाए, जो पूरे मामले की गहराई से जांच करे और जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपे।”

यह कदम इस बात की ओर संकेत करता है कि प्रशासन अब ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है।


“लापरवाही पर कार्रवाई हो” की उठी मांग

अधिवक्ताओं ने साफ किया कि—

  • यह केवल एक मेडिकल गलती नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही और मरीज के अधिकारों का हनन है।
  • यदि जांच में दोष सिद्ध होता है, तो अस्पताल पर मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
  • साथ ही, ऐसे अस्पतालों की स्वास्थ्य लाइसेंसिंग प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए।

दूसरी जगह कराया इलाज, तब जाकर मिली राहत

धीरेंद्र भाटी ने पत्नी का इलाज एक अन्य अस्पताल में कराया, जहाँ सही उपचार हुआ और राखी की स्थिति में सुधार आया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा—

“अगर मैंने दोबारा जांच न कराई होती तो शायद मेरी पत्नी की हालत और बिगड़ सकती थी। ये अस्पताल पैसे तो लेता है, लेकिन ज़िम्मेदारी नहीं निभाता।”


जनता और प्राधिकरण दोनों की नजरें अब जांच रिपोर्ट पर

अब जब तीन डॉक्टरों की समिति जल्द जांच शुरू करने जा रही है, तो पूरे शहर की निगाहें उस रिपोर्ट पर टिक गई हैं। क्या वाकई यह एक लापरवाही थी? क्या डॉक्टरों ने जानबूझकर जानकारी छिपाई? या यह केवल एक ‘मेडिकल भूल’ थी?

जांच रिपोर्ट ही तय करेगी कि यथार्थ अस्पताल की “यथार्थता” क्या है!


निष्कर्ष: एक केस नहीं, एक चेतावनी

यह घटना केवल एक अधिवक्ता परिवार की समस्या नहीं है, यह हेल्थकेयर सिस्टम की लापरवाही और जवाबदेही के अभाव की बड़ी तस्वीर है। जरूरत है कि—

  • स्वास्थ्य संस्थानों की जवाबदेही तय हो
  • मरीजों को पारदर्शी और सुरक्षित इलाज मिले
  • और हर गलती पर सिर्फ जुर्माना नहीं, सख्त कार्रवाई भी हो।

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✍️ रिपोर्ट: रफ्तार टुडे संवाददाता, ग्रेटर नोएडा

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