Sharda University News : “माँ के नाम एक हरियाली भेंट!”, शारदा विश्वविद्यालय में पर्यावरण को समर्पित हुआ पौधारोपण अभियान, नई पीढ़ी को सिखाया गया प्रकृति से रिश्ता जोड़ना, प्रो चांसलर वाई.के. गुप्ता बोलें – “पेड़ों को शिक्षा से जोड़ें”

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
शारदा विश्वविद्यालय, नॉलेज पार्क, ग्रेटर नोएडा में एक ऐसा भावनात्मक और जागरूकता से भरा आयोजन देखने को मिला, जिसमें “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत परिसर को हरियाली से सजाया गया। इस अभियान की आत्मा न केवल प्रकृति की सेवा थी, बल्कि माँ जैसे सबसे पवित्र रिश्ते को हरियाली के रूप में एक अनमोल भेंट देने का संकल्प भी था।
एनएसएस सेल ने बढ़ाया हरियाली का संदेश
इस पौधारोपण कार्यक्रम का नेतृत्व शारदा विश्वविद्यालय के एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना) सेल ने किया, जिसमें छात्र-छात्राओं और स्टाफ ने नीम, पीपल, जामुन, आम और अमरूद जैसे विविध प्रजातियों के पौधे रोपे। यह सिर्फ पौधा रोपण नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और प्रकृति के प्रति ज़िम्मेदारी का पाठ था।
प्रो चांसलर वाई.के. गुप्ता ने कहा – “पेड़ों को शिक्षा से जोड़ें”
प्रो चांसलर डॉ. वाई.के. गुप्ता ने इस अवसर पर कहा:
“इस अभियान को और तेज़ गति देने के लिए ज़रूरी है कि हम बच्चों को स्कूल और कॉलेज स्तर से ही पेड़-पौधों के महत्व से परिचित कराएं। शिक्षक अपनी पढ़ाई में पेड़ और पर्यावरण को जोड़कर एक सकारात्मक सोच विकसित कर सकते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि हर छात्र अगर एक पेड़ को अपनाए, तो आने वाली पीढ़ियां सांस लेने लायक वातावरण पा सकेंगी।

वाइस चांसलर डॉ. सिबाराम खारा – “हर पौधा एक रिश्ता बनाएं”
शारदा विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. सिबाराम खारा ने कहा:
“पौधा रोपण तो एक शुरुआत है, असली उद्देश्य तब पूरा होता है जब उसकी देखभाल की जाती है। यदि हम बच्चों और युवाओं को इसके लिए प्रेरित करें, तो यह अभियान सिर्फ एक दिन का न रहकर जीवनशैली का हिस्सा बन जाएगा।”
उन्होंने पौधों को रिश्तों से जोड़ने की बात कही – जैसे एक पौधा माँ, एक पिता या मित्र के नाम – ताकि देखभाल में भावनात्मक जुड़ाव भी हो।
शिक्षकों और अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी
इस अभियान में केवल छात्र नहीं, बल्कि शारदा विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर्स और प्रशासनिक अधिकारी भी सक्रिय रूप से शामिल रहे।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
- डॉ. भुवनेश कुमार
- डॉ. आरसी सिंह
- आरडी सहाय
- डॉ. शांति नारायण
- डॉ. सुमन लता धर
- डॉ. क्रिस्टा मैथ्यू
सहित विभिन्न विभागों के डीन और एचओडी भी मौजूद रहे और छात्रों के साथ मिलकर पौधारोपण किया।
शिक्षा के साथ प्रकृति की पाठशाला भी जरूरी है
यह आयोजन सिर्फ पौधारोपण का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि नई पीढ़ी को जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में एक कदम था।
प्रशासन का मानना है कि पाठ्यक्रम के साथ “पर्यावरणीय नैतिकता” भी सिखाई जाए ताकि विद्यार्थी केवल सफल प्रोफेशनल ही नहीं, बल्कि संवेदनशील इंसान भी बनें।
छात्रों ने दिखाया उत्साह और प्रतिबद्धता
कार्यक्रम में छात्रों ने अपनी माताओं के नाम, दादी-नानी के नाम, या अपने किसी प्रियजन के नाम पौधे रोपे और उन्हें बड़े होने तक संजोने की शपथ ली।
एक छात्रा ने कहा:
“माँ के लिए इससे सुंदर उपहार और क्या हो सकता है, जो न सिर्फ धरती को हरियाली दे, बल्कि माँ के प्रेम को जीवित भी रखे।”
शारदा विश्वविद्यालय – सिर्फ डिग्री नहीं, धरती के लिए ज़िम्मेदारी भी सिखाता है
शारदा विश्वविद्यालय समय-समय पर ऐसे अभियानों के जरिए छात्रों में सामाजिक, पर्यावरणीय और मानवीय मूल्यों को सशक्त करता रहा है।
एनएसएस सेल की यह पहल अब “एक छात्र, एक पौधा – एक रिश्ता” अभियान में तब्दील होती नजर आ रही है।
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🌿 “एक पौधा, एक जीवन – एक रिश्ता, एक उम्मीद” – माँ के नाम समर्पित हर हरियाली का बीज, आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान बन सकता है।



