GD Goenka School News : बच्चों को किया गया साइबर खतरे से सतर्क, डिजिटल सुरक्षा पर विशेष सत्र, जी. डी. गोयनका स्कूल ग्रेटर नोएडा में 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को दी गई जागरूकता, बच्चों को बताया गया – इंटरनेट की दुनिया में कैसे रहें सतर्क?, बच्चों को बताया गया – इंटरनेट की दुनिया में कैसे रहें सतर्क?

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
डिजिटल युग में जहाँ बच्चों की शिक्षा, मनोरंजन और संवाद सभी कुछ ऑनलाइन होता जा रहा है, वहीं साइबर खतरों से उनकी सुरक्षा एक चुनौती बन गई है। इसी संदर्भ में जी. डी. गोयनका पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा में 9वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए साइबर अपराध और सुरक्षा पर एक महत्वपूर्ण जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया।
बच्चों को बताया गया – इंटरनेट की दुनिया में कैसे रहें सतर्क?
कार्यक्रम की शुरुआत डिजिटल दुनिया की वास्तविकताओं को सामने रखकर की गई, जहाँ छात्रों को बताया गया कि वे दिन के अधिकांश समय स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप और गेमिंग डिवाइसेज़ पर ऑनलाइन रहते हैं।
साइबर विशेषज्ञों और शिक्षकों ने यह बताया कि आज के युवा जितना समय इंटरनेट पर बिताते हैं, उतना ही साइबर खतरे का जोखिम भी बढ़ता है। इंटरनेट के माध्यम से मैलवेयर अटैक, फिशिंग, पहचान की चोरी, हैकिंग, पोर्नोग्राफिक वेबसाइट्स जैसी अनेक समस्याएं बच्चों को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
साइबर अपराध क्या है और इससे कैसे बचें – छात्रों को दी गई तकनीकी जानकारी
विशेषज्ञों ने समझाया कि साइबर अपराध यानी ऐसा कोई भी डिजिटल कार्य जिससे किसी व्यक्ति के डेटा को नुकसान हो, चोरी हो या डिजिटल जीवन बाधित हो। बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट व्यवहार के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई:
मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें
हर अकाउंट के लिए अलग-अलग और मजबूत पासवर्ड बनाएं, जिसमें अक्षर, अंक और विशेष चिह्न शामिल हों।
सॉफ्टवेयर को अपडेट रखें
अपने ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउज़र और ऐप्स को नियमित रूप से अपडेट करते रहें ताकि सुरक्षा खामियों को समय रहते दूर किया जा सके।
अनजान लिंक पर क्लिक न करें
ईमेल, सोशल मीडिया या अज्ञात स्रोतों से आए लुभावने या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
दो-चरणीय प्रमाणीकरण (MFA) सक्रिय करें
अपने अकाउंट की सुरक्षा के लिए MFA को ऑन करें, जिससे हैकर केवल पासवर्ड से अकाउंट में प्रवेश न कर सके।
पब्लिक वाई-फाई से रहें सावधान
जैसे रेलवे स्टेशन, कैफे या मॉल जैसी जगहों के सार्वजनिक नेटवर्क पर बैंकिंग या पासवर्ड एंट्री जैसे कार्य न करें।
व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखें
अपने बैंक विवरण, क्रेडिट कार्ड नंबर, आधार या पासवर्ड किसी को भी साझा न करें।
एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर का उपयोग करें
अपने उपकरणों में विश्वसनीय एंटीवायरस और एंटी-मैलवेयर प्रोग्राम इंस्टॉल करें और नियमित अपडेट करते रहें।
“साइबर अपराध का शिकार होने पर क्या करें?” – छात्रों को दिया गया मार्गदर्शन
यदि छात्र साइबर अपराध का शिकार हो जाएं, तो उन्हें बताया गया कि वे:
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर रिपोर्ट करें।
- 1930 नंबर पर कॉल करें।
- या अपने निकटतम साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
छात्रों की बढ़ी जागरूकता, साइबर दुनिया को देखने का बदला नजरिया
कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने सवाल पूछकर अपनी शंकाओं को भी दूर किया। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को डिजिटल नागरिकता, जिम्मेदारी, नैतिक उपयोग और डेटा सुरक्षा जैसे पहलुओं से अवगत कराया।
इस अभियान का उद्देश्य छात्रों में साइबर अनुशासन और डिजिटल विवेकशीलता को बढ़ावा देना था ताकि वे ना केवल स्मार्ट डिवाइसेज़ के स्मार्ट यूज़र बनें, बल्कि अपने और अपने परिवार की ऑनलाइन सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकें।
स्कूल प्रशासन का संदेश
स्कूल के प्राचार्य ने कहा –
“आज के बच्चे इंटरनेट की दुनिया में बहुत अधिक समय बिताते हैं। इस वजह से साइबर अपराधियों का निशाना भी सबसे पहले ये ही बनते हैं। इस सत्र के माध्यम से हम उन्हें न केवल जोखिमों से अवगत कराना चाहते हैं बल्कि उन्हें आत्मरक्षा की डिजिटल ढाल भी प्रदान कर रहे हैं।”
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