Greater Noida West News : “हर बूँद कीमती है!”, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के स्कूल में बच्चों ने ली जल बचाने की शपथ, वर्षा जल संचयन की सीखी तकनीकें, वैज्ञानिक सोच के साथ सीखी वर्षा जल संचयन की तकनीकें, भविष्य के लिए बीज, आज का प्रयास, कल की सुरक्षा
"हर बूँद कीमती है": जागरूकता की आवाज़ बने अनुप सोनी और रश्मि पांडेय

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टुडे ब्यूरो।
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जहां बच्चे बने जल योद्धा: बिसरख स्कूल में जागरूकता का अनोखा पाठ
ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टुडे।
“हर बूँद कीमती है, इसे व्यर्थ न बहाइए” – इस मूल मंत्र के साथ आज प्राथमिक विद्यालय बिसरख में एक अनूठा कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य था – बच्चों को जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के महत्व से जोड़ना। इस प्रभावशाली आयोजन की अगुवाई की सामाजिक संस्था ईथोमार्ट चैरिटेबल ट्रस्ट (EMCT) ने, जो पर्यावरणीय और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता से काम करती है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य: बचपन से बोएं जागरूकता के बीज
कार्यक्रम का उद्देश्य था नन्हे विद्यार्थियों के मन में जल के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का भाव पैदा करना। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य महोदय ने जल संकट के बदलते स्वरूप और उसके गंभीर परिणामों की चर्चा की। उन्होंने बच्चों को समझाया कि जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि एक जीवनरेखा है, जिसकी सुरक्षा हम सबका साझा कर्तव्य है।
उन्होंने सभी बच्चों को ‘जल बचाओ, जीवन बचाओ’ की शपथ दिलाई – जिसमें उन्होंने संकल्प लिया कि न केवल वे स्वयं पानी की बचत करेंगे, बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।
वैज्ञानिक सोच के साथ सीखी वर्षा जल संचयन की तकनीकें
कार्यक्रम के अगले हिस्से में मनीष श्रीवास्तव, जो जल प्रबंधन और पर्यावरणीय जागरूकता के क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं, ने बच्चों को वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) की वैज्ञानिक प्रक्रिया को बेहद सरल और रचनात्मक अंदाज़ में समझाया।
उन्होंने बताया कि कैसे घरों की छतों से गिरने वाले बारिश के पानी को पाइपलाइन, टैंक और फिल्टर के माध्यम से संग्रहित कर भूजल पुनर्भरण के लिए प्रयोग किया जा सकता है। बच्चों को बताया गया कि यदि हर घर और स्कूल अपने स्तर पर यह सिस्टम लगाए, तो पूरे मोहल्ले या गांव का जलस्तर सुधारा जा सकता है।
“हर बूँद कीमती है”: जागरूकता की आवाज़ बने अनुप सोनी और रश्मि पांडेय
कार्यक्रम में अनुप सोनी ने भावनात्मक शब्दों में बच्चों से संवाद किया। उन्होंने कहा –
“पानी की एक-एक बूँद लाखों की कीमत रखती है। आज हम इसे जितना संजोएंगे, कल हमारी धरती उतनी ही हरियाली और ताजगी लौटाएगी।”
ईएमसीटी की संस्थापक रश्मि पांडेय ने अपने जोशीले वक्तव्य में बच्चों से कहा –
“जल संरक्षण कोई विकल्प नहीं, यह अब संस्कार बन जाना चाहिए। बच्चों में यह आदतें आज डाली जाएंगी, तभी भविष्य स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ बनेगा।”
बच्चों ने साझा किए अपने विचार, बनी एक नई ऊर्जा
कार्यक्रम के अंत में बच्चों को जल संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर दिया गया। कई छात्रों ने कविताएं, स्लोगन और चित्र प्रस्तुत किए, जिनमें जल के महत्व को रेखांकित किया गया था। इस दौरान “जल ही जीवन है”, “बूँद-बूँद से सागर बनता है” जैसे नारे पूरे परिसर में गूंज उठे।
इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भागीदारी और उनके अंदर उपजी संवेदनशीलता ने यह स्पष्ट कर दिया कि अगर शिक्षा सही दिशा में दी जाए, तो समाज का भविष्य अपने आप जागरूक बनता है।
भविष्य के लिए बीज: आज का प्रयास, कल की सुरक्षा
ईएमसीटी द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक जागरूकता अभियान था, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत भी कहा जा सकता है, जहां छोटे-छोटे हाथों ने बड़े बदलाव का बीड़ा उठाया है। इस पहल से निश्चित ही आने वाले वर्षों में इन बच्चों की सोच समाज को संवेदनशील नागरिकों की सौगात देगी।
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