BJP Breaking News : भाजपा ग्रेटर नोएडा मंडल में उठी बगावत की लहर, स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी पर मंडल अध्यक्ष घिरे आरोपों से, कार्यकर्ता ने लगाया आरोप, मंडल की टीम में सक्रिय पदाधिकारी तक नहीं है, और ना वैश्य, ना ही जाट, यादव, SC और ST और ना महिला को पद दिया गया
भाजपा ने खुद महिला को 33% आरक्षण दिया है, खुद प्रधानमंत्री मोदी ने भी राष्ट्रपति और 33% कैबिनेट में पद दिया है महिलो को, 2027 चुनाव से पहले संगठन में गहराया संकट

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ग्रेटर नोएडा मंडल में इन दिनों असंतोष और बगावत की आवाजें गूंज रही हैं। पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने मंडल अध्यक्ष अर्पित तिवारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर खुलकर मोर्चा खोल दिया है। आरोप है कि अध्यक्ष ने न सिर्फ स्थानीय कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक गतिविधियों से दूर रखा है, बल्कि बाहरी लोगों को प्राथमिकता देते हुए मंडल की नई टीम बनाई है। यह विवाद अब इतना गहराता जा रहा है कि कार्यकर्ताओं ने भविष्य में पार्टी को होने वाले नुकसान तक की चेतावनी दे डाली है।
जातीय समीकरण और आरक्षण की अनदेखी का आरोप
नाराज कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि मंडल की टीम में जातीय और सामाजिक संतुलन पूरी तरह से बिगाड़ दिया गया है।
वैश्य, जाट, यादव, SC-ST और महिला वर्ग को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
भाजपा नेतृत्व ने खुद 33% महिला आरक्षण की नीति अपनाई है, लेकिन मंडल की टीम में इसका पालन तक नहीं किया गया।
पूरी टीम में सक्रिय पदाधिकारी तक नहीं हैं, ज्यादातर लोग बाहर से लाए गए हैं।
सोशल मीडिया पोस्ट्स में कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का हवाला दिया है जिसमें उन्होंने महिलाओं को कैबिनेट में और संगठन में सम्मानजनक स्थान देने की बात कही थी।
मंडल टीम में बाहरी लोगों की भरमार
आरोप है कि भाजपा ग्रेटर नोएडा मंडल की टीम में अधिकांश पदाधिकारी बाहरी जिलों से जुड़े हुए हैं।
अध्यक्ष – फिरोजाबाद से
मंडल महामंत्री – एटा और गोरखपुर से
मंडल उपाध्यक्ष – इलाहाबाद से
मंडल मंत्री – मेरठ और हरियाणा से
एक महिला पदाधिकारी – बाहरी क्षेत्र से
इस तरह की संरचना ने स्थानीय कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। उनका कहना है कि जो लोग यहां की जमीनी राजनीति से परिचित नहीं हैं, वे संगठन को मजबूती कैसे देंगे?
कार्यकर्ताओं का आरोप: “स्थानीय कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया गया”
भाजपा के कई पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं ने फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि मंडल अध्यक्ष अर्पित तिवारी स्थानीय कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर रहे हैं।
किसी भी कार्यक्रम की जानकारी समय से नहीं दी जाती। स्थानीय कार्यकर्ताओं को मंच पर जगह तक नहीं मिलती। अभियानों से जानबूझकर दूर रखा जा रहा है।
कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे न सिर्फ उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है, बल्कि वर्षों से जमीनी स्तर पर काम करने वालों का मनोबल भी टूट रहा है।
“स्थानीय राजनीति खत्म कर दूंगा” – बड़ा आरोप
सबसे गंभीर आरोप यह सामने आया है कि अर्पित तिवारी ने कथित तौर पर यह तक कह दिया कि “मैं यहां ग्रेटर नोएडा के स्थानीय कार्यकर्ताओं की राजनीति खत्म कर दूंगा। न तो उन्हें किसी कार्यक्रम में शामिल करूंगा और न किसी अभियान की सूचना दूंगा। सारी टीम मैंने अपने हिसाब से बनाई है।”
यह बयान पार्टी के भीतर स्थानीय बनाम बाहरी की लड़ाई को और तेज कर रहा है। खासकर वे कार्यकर्ता जो सालों से पार्टी की रीढ़ माने जाते रहे हैं, उन्होंने इसे सीधा अपमान बताया है।
सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा
फेसबुक, व्हाट्सएप ग्रुप और एक्स (ट्विटर) पर कार्यकर्ताओं ने पोस्ट और कमेंट्स की बाढ़ ला दी है।
“स्थानीय कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करना पार्टी के भविष्य के लिए घातक साबित होगा।”
“बाहरी लोगों की ताकत ज्यादा दिन तक नहीं चलेगी, असली ताकत जमीनी कार्यकर्ताओं में है।”
“पार्टी की रीढ़ बूथ लेवल के कार्यकर्ता हैं, उन्हें कमजोर करना आत्मघाती कदम है।”
यह बयान साफ दर्शाते हैं कि कार्यकर्ताओं का गुस्सा अब अंदर तक गहराता जा रहा है।
2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी पर असर
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह विवाद भाजपा के लिए गंभीर संकट का संकेत है।
- बूथ प्रबंधन होगा कमजोर – भाजपा की जीत का सबसे बड़ा आधार हमेशा उसका बूथ मैनेजमेंट रहा है। यदि कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटेगा तो बूथ स्तर पर पार्टी कमजोर पड़ेगी।
- विपक्ष को मिलेगा मौका – विपक्षी दल इस असंतोष का फायदा उठाने में देर नहीं करेंगे और स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा उछालकर भाजपा को चुनौती देंगे।
- स्थानीय समर्थन पर असर – भाजपा ने पिछले चुनावों में ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों में मजबूत प्रदर्शन स्थानीय कार्यकर्ताओं की मेहनत से ही किया था। अगर इन्हें किनारे किया गया तो असर साफ दिखेगा।
राजनीतिक विश्लेषण: भाजपा के लिए चेतावनी की घंटी
विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा को इस विवाद को तुरंत सुलझाना होगा।
अगर कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा तो आने वाले चुनाव में नुकसान तय है।
बाहरी बनाम स्थानीय की लड़ाई पार्टी की एकजुटता को चोट पहुंचाएगी।
संगठनात्मक ढांचा कमजोर होगा तो विपक्ष को बड़ा लाभ मिल सकता है।
आगे क्या?
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रदेश और जिला नेतृत्व इस विवाद को कैसे संभालता है। क्या मंडल अध्यक्ष अर्पित तिवारी को लेकर सख्त कदम उठाए जाएंगे? या फिर कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए कोई ठोस रणनीति बनाई जाएगी?
स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़े स्तर पर आवाज उठाने को मजबूर होंगे।
भाजपा ग्रेटर नोएडा मंडल में उठी बगावत की यह आवाज़ अब संगठनात्मक संकट का रूप लेती जा रही है। कार्यकर्ताओं की नाराजगी सिर्फ मंडल अध्यक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस राजनीतिक असंतोष का संकेत है जो भविष्य में पार्टी के लिए सिरदर्द बन सकता है।
2027 चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और ऐसे में कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। अगर पार्टी नेतृत्व ने जल्द ही कदम नहीं उठाए तो स्थानीय स्तर पर असंतोष विपक्ष के लिए वरदान साबित हो सकता है।
जब रफ़्तार टुडे की संवाददाता ने बीजेपी के मडल अध्यक्ष अर्पित तिवारी के बयान लिया कि तो उन्होंने कहा कि यह खबर है फर्जी है, और उन्होंने रफ़्तार टुडे को जो लिखना है लिखो की धमकी दी, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है मीडिया को, और भाजपा मंडल अध्यक्ष ने ऐसी धमकी दी है।



