GD Goenka Public School : जी डी गोयंका पब्लिक स्कूल में मनाया गया ग्रैंड पेरेंट्स डे – दादा-दादी और नाना-नानी बने बच्चों की खुशियों का आधार, खेल, मेले और रंगारंग प्रस्तुतियाँ

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। स्वर्ण नगरी स्थित जी डी गोयंका पब्लिक स्कूल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि रिश्तों, संस्कारों और परंपराओं को सहेजने का नाम है। विद्यालय में प्री-प्राइमरी के छात्रों द्वारा मनाया गया ग्रैंड पेरेंट्स डे इसी सोच का साकार रूप था।
नन्हे-मुन्नों ने अपने दादा-दादी और नाना-नानी के साथ इस दिन को बड़े उत्साह, हंसी और भावनाओं के संग यादगार बना दिया।
ग्रैंड पेरेंट्स डे का यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों के बीच पुल का निर्माण था। इसमें प्रेम, संस्कार, अनुभव और अपनापन सब कुछ समाहित था। नन्हे-मुन्नों ने यह जता दिया कि आधुनिक युग में भी पारिवारिक संबंध उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने पहले थे।
दादा-दादी और नाना-नानी – परिवार की जड़
इस विशेष अवसर पर मंच से यह संदेश गूंजता रहा कि “ग्रैंड पेरेंट्स ही परिवार की वह मजबूत जड़ हैं, जिनसे पूरी शाखाएँ और पत्ते जीवन पाते हैं।” बच्चों ने भी अपनी मासूम अदाओं और प्रस्तुतियों से यह जताया कि वे अपने बुजुर्गों को केवल घर का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शक मानते हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. उपासना सिंह की उपस्थिति
कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के लिए डॉ. उपासना सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
वे ह्यूमन टच फाउंडेशन और ऑल इंडिया विमेंस कॉन्फ्रेंस, ग्रेटर नोएडा शाखा की संस्थापक अध्यक्ष हैं।
उनका जीवन उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सम्मान, आजीविका और बेहतर जीवन स्तर प्रदान करना रहा है।
महिलाओं को स्वरोज़गार से जोड़ने और उनके जीवन में आत्मनिर्भरता का भाव पैदा करने के लिए उन्होंने कई कार्यक्रम चलाए हैं।
उनकी प्रेरक उपस्थिति ने बच्चों, अभिभावकों और वरिष्ठ नागरिकों को ऊर्जा से भर दिया।

खेल, मेले और रंगारंग प्रस्तुतियाँ
विद्यालय की अध्यापिकाओं ने पूरे आयोजन को रचनात्मक और मनोरंजक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
बच्चों और ग्रैंड पेरेंट्स के लिए कई खेलों का आयोजन किया गया, जिसमें दादा-दादी और नाना-नानी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
वैश्विक मेले का भी आयोजन हुआ, जहाँ छोटे-छोटे स्टॉल और गतिविधियों ने सबका मन मोह लिया।
छात्रों की रंगारंग प्रस्तुतियाँ जैसे नृत्य, गीत और नाटक ने समां बांध दिया।
मंच पर पोते-पोतियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते दादा-दादी और नाना-नानी का दृश्य सभी को भावुक कर गया।
भावनाओं से भरा दिन
इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि हर ग्रैंड पेरेंट को मंच पर अपनी प्रस्तुति देने और अपने जीवन के अनुभव साझा करने का अवसर मिला।
किसी ने जीवन की कठिनाइयों को पार करने के अनुभव सुनाए,
तो किसी ने बच्चों को संस्कारों और धैर्य का महत्व बताया।
कई बुजुर्गों ने अपने पोते-पोतियों के लिए कविताएँ और गीत भी सुनाए।
इस आत्मीयता और अपनत्व ने पूरे वातावरण को परिवार की तरह सजा दिया।
विद्यालय प्रबंधन की ओर से शुभकामनाएँ
विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. रेणु सहगल ने सभी ग्रैंड पेरेंट्स का मंच से अभिनंदन किया। उन्होंने कहा “आज का दिन केवल बच्चों के लिए नहीं, बल्कि उन जड़ों के सम्मान का है, जिनसे यह पूरा परिवार जुड़ा है। दादा-दादी और नाना-नानी का अनुभव बच्चों के लिए अमूल्य धरोहर है। विद्यालय गर्व महसूस करता है कि उसने इस अवसर पर सबको एक साथ जोड़ने का कार्य किया।”
उन्होंने सभी को धन्यवाद देते हुए भविष्य में और ऐसे आयोजनों का वादा किया।इसमें प्रेम, संस्कार, अनुभव और अपनापन सब कुछ समाहित था। नन्हे-मुन्नों ने यह जता दिया कि आधुनिक युग में भी पारिवारिक संबंध उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने पहले थे।विद्यालय में प्री-प्राइमरी के छात्रों द्वारा मनाया गया ग्रैंड पेरेंट्स डे इसी सोच का साकार रूप था।



