Noida News : “जिनका कोई नहीं, उनके लिए गंगा बनी अंतिम सहारा”मौनी अमावस्या पर हरिद्वार में सैकड़ों लावारिस आत्माओं की अस्थियों का विसर्जन, Bright The Soul Foundation और समाज सेविका अंकिता राजपूत बनीं मानवता की आवाज़

ग्रेटर नोएडा / हरिद्वार, रफ़्तार टूडे। मौनी अमावस्या का पावन अवसर, गंगा की शांत धारा और वातावरण में गूंजती शांति की अनुभूति—आज 18 जनवरी 2026 को हरिद्वार की धरती पर मानवता, करुणा और सेवा का ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर संवेदनशील मन को भावुक कर दिया। इस पवित्र तिथि पर सैकड़ों लावारिस शवों की अस्थियों का विधि-विधान से गंगा नदी में विसर्जन किया गया, ताकि उन आत्माओं को भी मोक्ष का मार्ग मिल सके, जिनका इस संसार में कोई अपना नहीं था।
यह पुण्य कार्य Bright The Soul Foundation के माध्यम से संपन्न हुआ, जो बीते लंबे समय से समाज के उस सबसे उपेक्षित वर्ग—लावारिस मृतकों—के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहा है।
हर माह सैकड़ों लावारिस शवों का निःशुल्क अंतिम संस्कार
Bright The Soul Foundation द्वारा हर महीने सैकड़ों लावारिस शवों का निःशुल्क दाह संस्कार कराया जाता है। सड़क किनारे, अस्पतालों में, रेलवे ट्रैक या सुनसान इलाकों में मिलने वाले उन शवों के लिए यह संस्था एक परिवार बनकर खड़ी होती है, जिनके अंतिम संस्कार के लिए कोई आगे नहीं आता।
संस्था का उद्देश्य साफ है—कोई भी इंसान अंतिम यात्रा में अकेला न जाए।
मृत्यु के बाद भी हर आत्मा को सम्मान मिले।
मौनी अमावस्या जैसे पावन दिन पर उन सभी दिवंगत आत्माओं की अस्थियों का गंगा में विसर्जन कर संस्था ने यह सिद्ध कर दिया कि सेवा केवल जीवन तक सीमित नहीं होती, बल्कि मृत्यु के बाद भी इंसानियत का फर्ज निभाया जा सकता है।
समाज सेविका अंकिता राजपूत: संवेदनाओं की मिसाल
इस पुनीत कार्य में समाज सेविका अंकिता राजपूत की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। वह न केवल अपने सामर्थ्य अनुसार सहयोग करती हैं, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी इस पुण्य सेवा से जुड़ने के लिए प्रेरित करती रहती हैं।
अंकिता राजपूत का मानना है “नर सेवा ही नारायण सेवा है। सेवा का अवसर जहां भी मिले, इंसान को पीछे नहीं हटना चाहिए।” उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि यह सेवा उन लोगों के लिए है, जिनकी मृत्यु के बाद न कोई कंधा देने वाला होता है, न चिता जलाने वाला और न ही अस्थि विसर्जन कराने वाला। ऐसे में जब कोई संस्था या व्यक्ति उनके लिए यह कार्य करता है, तो वह सिर्फ संस्कार नहीं, बल्कि इंसानियत का धर्म निभाता है।
मृत्यु के बाद भी सम्मान—यही है सच्ची सेवा
अंकिता राजपूत ने कहा कि “लावारिस शवों की सेवा एक ऐसी सेवा है, जो इंसान के मरणोपरांत की जाती है। यह सेवा मन को गहरी शांति देती है और आत्मा को सुकून।”
उनके अनुसार इस कार्य में किया गया थोड़ा सा सहयोग भी अत्यंत पुण्यदायी होता है, क्योंकि यह उन आत्माओं के लिए किया जाता है, जो जीवनभर शायद तिरस्कार और अकेलेपन का शिकार रहीं।
गंगा तट पर भावुक कर देने वाला दृश्य
हरिद्वार के गंगा घाट पर जब सैकड़ों अस्थि कलशों का विधिवत विसर्जन किया गया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। मंत्रोच्चारण, “ऊँ शान्ति” का उच्चारण और बहती गंगा—यह दृश्य मानो कह रहा था कि अब ये आत्माएं अकेली नहीं हैं।
यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि समाज आज भी संवेदनशील है और इंसानियत अभी जीवित है।
समाज से जुड़ने की अपील
Bright The Soul Foundation और समाज सेविका अंकिता राजपूत ने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि—
इस तरह के सेवा कार्यों में आगे आएं
आर्थिक, शारीरिक या मानसिक सहयोग दें
और दूसरों को भी जागरूक करें
क्योंकि जब समाज मिलकर चलता है, तभी मानवता जिंदा रहती है।
अंतिम प्रार्थना
कार्यक्रम के अंत में सभी दिवंगत आत्माओं के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई कि ईश्वर सभी पुण्य आत्माओं को शांति प्रदान करें और उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
ऊँ शान्ति 🙏



