Paramount Golf Foreste Tower : “11वीं मंजिल से मौत का डर!”, आधी रात 30 मिनट लिफ्ट में कैद रहा परिवार, सोसाइटी प्रबंधन की लापरवाही ने खड़े किए बड़े सवाल, सुरक्षा पर बड़ा सवाल हाई-राइज सोसाइटी में इतनी बड़ी लापरवाही?, मदद के लिए कॉल, लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा की हाई-प्रोफाइल सोसाइटी पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट एक बार फिर सुरक्षा और मेंटेनेंस को लेकर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला इतना गंभीर है कि एक पूरा परिवार आधी रात को लिफ्ट के अंदर करीब 25 से 30 मिनट तक फंसा रहा—और हैरानी की बात यह रही कि इस दौरान न तो मेंटेनेंस टीम मौके पर पहुंची और न ही कोई तत्काल सहायता उपलब्ध कराई गई।
आधी रात का खौफनाक अनुभव: अस्पताल से लौटते ही फंस गई लिफ्ट
घटना देर रात करीब 1 बजे की बताई जा रही है, जब एडवोकेट अक्षय प्रताप सिंह अपनी 4 साल की भतीजी को कैलाश हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कराकर परिवार के साथ घर लौट रहे थे। उनके साथ उनके भाई और भाभी भी मौजूद थे। जैसे ही वे डव टॉवर की लिफ्ट से 11वीं मंज़िल की ओर जा रहे थे, अचानक लिफ्ट बीच में ही बंद हो गई।
अचानक हुए इस तकनीकी फेलियर ने पूरे परिवार को घबराहट में डाल दिया, खासकर तब जब उनके साथ एक छोटी बच्ची भी मौजूद थी, जिसकी तबीयत पहले से ही ठीक नहीं थी।
30 मिनट की कैद: मदद के लिए कॉल, लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं
अक्षय प्रताप सिंह के अनुसार, लिफ्ट में फंसने के बाद उन्होंने तुरंत सोसाइटी में जुड़े एक व्यक्ति विशाल को कॉल किया और स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया:
“मैं अपने परिवार और छोटे बच्चे के साथ लिफ्ट में फंसा हुआ हूं, 15 मिनट से ज्यादा हो चुके हैं… कब आएगा टेक्नीशियन? बच्चे की तबीयत खराब हो रही है।”
लेकिन इस आपात स्थिति के बावजूद मेंटेनेंस टीम या लिफ्ट ऑपरेटर समय पर नहीं पहुंचे। करीब 30 मिनट तक परिवार लिफ्ट के अंदर ही फंसा रहा, जहां घुटन और डर का माहौल बना रहा।
सुरक्षा पर बड़ा सवाल: हाई-राइज सोसाइटी में इतनी बड़ी लापरवाही?
यह घटना सिर्फ एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि सोसाइटी प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है। जिस सोसाइटी में सैकड़ों परिवार रहते हैं, वहां इस तरह की इमरजेंसी के लिए त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम होना अनिवार्य होता है। निवासियों का कहना है कि:
लिफ्ट का नियमित मेंटेनेंस नहीं होता
इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम कमजोर है
रात के समय स्टाफ की उपलब्धता बेहद कम रहती है
ऐसे में सवाल उठता है कि अगर यह स्थिति और गंभीर हो जाती, तो जिम्मेदारी कौन लेता?
30 मिनट बाद पहुंचा लिफ्टमैन, तब जाकर मिली राहत
करीब आधे घंटे बाद लिफ्टमैन मौके पर पहुंचा और तकनीकी खामी को ठीक कर लिफ्ट को खोला गया। तब जाकर परिवार को बाहर निकाला जा सका। हालांकि इस दौरान परिवार मानसिक रूप से काफी परेशान हो चुका था।
अक्षय प्रताप सिंह ने बाद में कहा कि:
“अब सब ठीक है, लेकिन यह अनुभव बेहद डरावना था। लिफ्ट का सही समय पर मेंटेनेंस होना जरूरी है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।”
बढ़ते लिफ्ट हादसे: क्या सोसाइटी मैनेजमेंट ले रहा है सीख?
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में पिछले कुछ समय से लिफ्ट फंसने और खराब होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हाई-राइज इमारतों में लिफ्ट सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जीवनरेखा होती है। ऐसे में: नियमित सर्विसिंग
24×7 टेक्निकल स्टाफ
इमरजेंसी अलार्म सिस्टम
CCTV मॉनिटरिंग
जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य होनी चाहिए।
निवासियों की मांग: जवाबदेही तय हो, सख्त कार्रवाई हो
इस घटना के बाद सोसाइटी के अन्य निवासियों में भी आक्रोश है। लोग मांग कर रहे हैं कि।मेंटेनेंस एजेंसी की जिम्मेदारी तय हो
सुरक्षा मानकों की जांच हो
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं
एक छोटी लापरवाही, बड़ा खतरा बन सकती है
यह घटना एक चेतावनी है कि आधुनिक दिखने वाली सोसाइटी में सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और मेंटेनेंस सिस्टम भी उतना ही मजबूत होना चाहिए।
अगर समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो ऐसी घटनाएं किसी बड़े हादसे में भी बदल सकती हैं।



