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Sharda Health Care News : “कार्ड है, पर इलाज नहीं!”, आयुष्मान योजना पर सवाल, शारदा अस्पताल में हंगामा, बाउंसर पर मोबाइल छीनने का आरोप, इलाज के बजाय मांगे पैसे, परिजन बोले—“यहां कार्ड नहीं चलता”, अस्पताल प्रबंधन की चुप्पी, जवाब का इंतजार

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना के जरिए गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त इलाज का वादा किया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी हकीकत कई बार सवालों के घेरे में आ जाती है। ऐसा ही एक मामला ग्रेटर नोएडा से सामने आया है, जहां शारदा अस्पताल में आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीज को उपचार नहीं मिलने का आरोप लगा है।


इलाज के बजाय मांगे पैसे, परिजन बोले—“यहां कार्ड नहीं चलता”
मिली जानकारी के अनुसार, ओमिक्रॉन सेक्टर निवासी एक बुजुर्ग व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे, जिनके पैर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया। परिजन तत्काल उन्हें शारदा अस्पताल लेकर पहुंचे और वहां आयुष्मान कार्ड दिखाया।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने इलाज शुरू करने के बजाय उनसे पैसे जमा करने को कहा और यहां तक कि दवाइयां भी बाहर से मंगवाई गईं। जब इस पर सवाल उठाया गया, तो कथित तौर पर कर्मचारियों ने साफ कह दिया—“यह प्राइवेट अस्पताल है, यहां आयुष्मान कार्ड नहीं चलता।”


वीडियो बनाने पर बाउंसर की दबंगई? मोबाइल छीनने की कोशिश
घटना ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब परिजन ने पूरे मामले का वीडियो बनाना शुरू किया। आरोप है कि अस्पताल में तैनात बाउंसर ने मोबाइल छीनने की कोशिश की और वीडियो रिकॉर्डिंग रोकने का प्रयास किया।
इस दौरान अस्पताल स्टाफ और परिजनों के बीच तीखी बहस भी हुई। बाद में परिजन मरीज को दूसरे अस्पताल लेकर गए, जहां उनका इलाज कराया गया।


सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, उठे बड़े सवाल
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं और आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल परिसर में जगह-जगह आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज के बोर्ड लगे हैं, लेकिन व्यवहार में इसका कोई लाभ नहीं मिला।

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जिम्मेदारी किसकी? प्राइवेट अस्पताल या सिस्टम की खामी
यह मामला एक बड़ा सवाल खड़ा करता है—क्या निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना सिर्फ कागजों तक सीमित है? विशेषज्ञों के अनुसार, जिन अस्पतालों को इस योजना के तहत सूचीबद्ध किया गया है, उन्हें निर्धारित शर्तों के अनुसार कार्डधारकों को इलाज देना अनिवार्य होता है। ऐसे में यदि किसी अस्पताल द्वारा इनकार किया जाता है, तो यह नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।


अस्पताल प्रबंधन की चुप्पी, जवाब का इंतजार
इस पूरे मामले में शारदा अस्पताल के डायरेक्टर और पीआरओ से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। अस्पताल की ओर से जवाब आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।


योजना बनाम जमीनी हकीकत
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य आम नागरिक को आर्थिक रूप से सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं देना है, लेकिन इस तरह की घटनाएं इस योजना की विश्वसनीयता पर असर डालती हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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