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ACE Divino News : “मेंटेनेंस में लाखों, लेकिन सफाई कर्मचारियों को नहीं पूरा वेतन?”, ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ऐस डिविनो सोसाइटी में हड़ताल की आहट से मचा हड़कंप, श्रम कानूनों को लेकर उठे बड़े सवाल, CBRE पर कर्मचारियों ने लगाए गंभीर आरोप, कहा—‘न्यूनतम वेतन बढ़ा, लेकिन हमारी तनख्वाह वहीं की वहीं’, सोसाइटी में सफाई व्यवस्था बिगड़ने का खतरा

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईप्रोफाइल और चर्चित रिहायशी सोसाइटी ऐस डिविनो में उस समय हलचल मच गई, जब यहां कार्यरत सफाई कर्मचारियों द्वारा हड़ताल की कोशिश किए जाने की खबर सामने आई। बताया जा रहा है कि सोसाइटी में CBRE के थर्ड पार्टी कॉन्ट्रैक्ट के तहत कार्य कर रहे 40 से अधिक सफाई कर्मचारियों ने कथित तौर पर अपने वेतन, श्रम अधिकारों और न्यूनतम मजदूरी नियमों को लेकर नाराजगी जताई। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन में संशोधन किए जाने के बावजूद उन्हें बढ़ा हुआ वेतन नहीं दिया जा रहा, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल सोसाइटी प्रबंधन बल्कि हजारों निवासियों के बीच भी चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो सोसाइटी की मूलभूत सफाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

“सरकार ने वेतन बढ़ाया, कंपनी ने नहीं” — कर्मचारियों का आरोप
सफाई कर्मचारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार और श्रम विभाग द्वारा समय-समय पर न्यूनतम वेतन दरों में संशोधन किया जाता है, ताकि महंगाई के दौर में श्रमिकों को राहत मिल सके। लेकिन आरोप है कि जमीनी स्तर पर इन नियमों का पूर्ण पालन नहीं हो रहा।
कर्मचारियों के मुताबिक— उन्हें संशोधित न्यूनतम वेतन के अनुसार भुगतान नहीं मिल रहा
कई श्रमिकों को ओवरटाइम और अन्य सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है
श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले लाभों में पारदर्शिता नहीं है
कुछ कर्मचारियों ने दावा किया कि वे लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसी वजह से नाराजगी धीरे-धीरे बढ़ती गई और अब मामला हड़ताल तक पहुंच गया।

सोसाइटी में सफाई व्यवस्था पर मंडराया संकट
ऐस डिविनो जैसी बड़ी हाईराइज सोसाइटी में प्रतिदिन हजारों लोग रहते हैं। यहां साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह सफाई कर्मचारियों पर निर्भर करती है। ऐसे में यदि कर्मचारी सामूहिक रूप से काम बंद करते हैं, तो इसका सीधा असर—
कचरा निस्तारण, लिफ्ट और कॉरिडोर की सफाई, पार्किंग एरिया, सार्वजनिक शौचालय, गार्डन और कॉमन एरिया पर देखने को मिल सकता है। निवासियों का कहना है कि सोसाइटी में पहले से ही मेंटेनेंस चार्ज लगभग ₹4 प्रति वर्गफुट के हिसाब से लिया जाता है। ऐसे में यदि कर्मचारियों को समय पर और नियमों के अनुसार वेतन नहीं मिलता, तो यह गंभीर प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी सवाल खड़े करता है।

CBRE और श्रम व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे मामले के बाद अब लोगों की नजर CBRE प्रबंधन और श्रम व्यवस्था पर टिक गई है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि सरकार ने न्यूनतम वेतन बढ़ाया है, तो क्या उसका लाभ वास्तव में कर्मचारियों तक पहुंच रहा है या नहीं?
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि—
“यदि कॉर्पोरेट स्तर पर काम करने वाली कंपनियां भी श्रम कानूनों का पालन नहीं करेंगी, तो आम श्रमिकों को न्याय कैसे मिलेगा?”
कुछ लोगों ने इसे “श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी” तक करार दिया है।


नए श्रम कानूनों को लेकर बढ़ी बहस
देशभर में लागू किए जा रहे नए श्रम कानूनों को लेकर पहले से ही चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में ऐस डिविनो का यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रहा है कि—
क्या निजी एजेंसियां श्रम कानूनों का सही पालन कर रही हैं?
क्या कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों जैसी सुरक्षा मिल रही है? क्या न्यूनतम वेतन के आदेश केवल कागजों तक सीमित हैं?
श्रम विशेषज्ञों का कहना है कि कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों की स्थिति सबसे ज्यादा संवेदनशील होती है और उनके अधिकारों की निगरानी के लिए प्रशासनिक सख्ती जरूरी है।

प्रशासन और श्रम विभाग से हस्तक्षेप की मांग
घटनाक्रम सामने आने के बाद अब संबंधित विभागों, नोएडा प्रशासन और श्रम विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है। कर्मचारियों और कुछ निवासियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि कहीं श्रम कानूनों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसके अलावा यह मांग भी उठ रही है कि—
कर्मचारियों का बकाया भुगतान सुनिश्चित किया जाए
न्यूनतम वेतन नियमों का पालन कराया जाए
श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए नियमित निरीक्षण हो

सोसाइटी में तनाव के बीच समाधान की उम्मीद
हालांकि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन कर्मचारियों की नाराजगी ने सोसाइटी प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। निवासी चाहते हैं कि मामला बातचीत और सहमति से सुलझे, ताकि रोजमर्रा की सुविधाएं प्रभावित न हों। विशेषज्ञ मानते हैं कि तेजी से विकसित हो रहे ग्रेटर नोएडा वेस्ट जैसे क्षेत्रों में हाईराइज सोसाइटियों का प्रबंधन केवल इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारियों के अधिकारों और सम्मान को सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।

रफ़्तार टूडे की न्यूज
Raftar Today
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