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Bhagwan Parshuram News : “परशुराम जन्मोत्सव बना संस्कृति, कविता और सामाजिक एकता का महाकुंभ!, ग्रेटर नोएडा में उमड़ा आस्था का सैलाब, संतों से लेकर सांसद तक ने दिया संस्कार और संगठन का संदेश”, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने बांधा समां, सांसद डॉ. महेश शर्मा बोले “परशुराम केवल शक्ति नहीं, संस्कृति और न्याय के प्रतीक”

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा में रविवार का दिन आध्यात्मिक ऊर्जा, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक एकता के नाम रहा, जब ब्राह्मण सभा (पंजीकृत) उत्तर प्रदेश द्वारा भगवान श्री परशुराम जन्मोत्सव समारोह का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया। कार्यक्रम केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह समाज, संस्कृति, साहित्य, अध्यात्म और राष्ट्र निर्माण के विचारों का विशाल मंच बनकर सामने आया। समारोह में राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक और साहित्यिक क्षेत्र की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को यादगार बना दिया।
सभागार में सुबह से ही श्रद्धालुओं, समाजसेवियों, युवाओं और गणमान्य लोगों का उत्साह देखने लायक था। भगवान श्री परशुराम के जयकारों, वैदिक मंत्रोच्चार और सांस्कृतिक वातावरण ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। आयोजन में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने हिस्सा लिया।

वैदिक मंत्रों और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ भव्य शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध आचार्य रविकांत दीक्षित जी द्वारा गुरुकुल के बटुकों के साथ वैदिक मंत्रोच्चार, स्वस्तिवाचन और मंगलाचरण से हुई। जैसे ही मंच पर दीप प्रज्ज्वलन हुआ, पूरा सभागार तालियों और “जय परशुराम” के उद्घोष से गूंज उठा। दीप प्रज्ज्वलन में मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों ने भाग लेकर आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया।

सांसद डॉ. महेश शर्मा बोले— “परशुराम केवल शक्ति नहीं, संस्कृति और न्याय के प्रतीक”
समारोह के मुख्य अतिथि सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने अपने संबोधन में भगवान श्री परशुराम के जीवन को भारतीय संस्कृति का प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि—“भगवान परशुराम केवल एक योद्धा नहीं थे, बल्कि वे ज्ञान, तप, न्याय और धर्म की रक्षा के प्रतीक हैं। आज के युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।” उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति तभी मजबूत होगी जब समाज अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ा रहेगा।

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परशुराम जन्मोत्सव बना संस्कृति, कविता और सामाजिक एकता का महाकुंभ!

तेजपाल नागर और अभिषेक शर्मा ने दिया संगठन और संस्कार का संदेश
विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद भाजपा जिला अध्यक्ष अभिषेक शर्मा, दादरी विधायक तेजपाल नागर, पूर्व विधायक एवं राज्य मंत्री मुकूल उपाध्याय, खैर नगर पालिका चेयरमैन संजय शर्मा और टीवी न्यूज चैनल के सीईओ शैलेन्द्र शर्मा ने भी समारोह को संबोधित किया।
दादरी विधायक तेजपाल नागर ने कहा कि—“समाज तभी मजबूत बनता है जब उसमें संस्कार, शिक्षा और संगठन तीनों मौजूद हों। भगवान परशुराम का जीवन इन तीनों का अद्भुत उदाहरण है।”
भाजपा जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा ने समाज को एकजुट रहने और युवाओं को सकारात्मक दिशा देने पर जोर दिया।

जब मंच पर पहुंचे गीतकार संतोष आनंद, भावुक हो उठा पूरा सभागार
समारोह का सबसे विशेष और भावुक क्षण तब आया जब प्रसिद्ध फिल्मी गीतकार संतोष आनंद मंच पर पहुंचे। उनके सम्मान में पूरा सभागार खड़ा हो गया और तालियों की गड़गड़ाहट देर तक गूंजती रही। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए जीवन, संघर्ष और साहित्य पर भावपूर्ण विचार रखे। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। लोगों ने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर उनका स्वागत किया और कई लोग उनकी कविताओं और गीतों के साथ झूमते नजर आए।

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परशुराम जन्मोत्सव बना संस्कृति, कविता और सामाजिक एकता का महाकुंभ!

हरिद्वार से आए संत प्रवर आनंद ब्रह्मचारी ने दिया आध्यात्मिक संदेश
हरिद्वार से पधारे पूज्य संत आनंद ब्रह्मचारी जी महाराज, जो अंतरराष्ट्रीय गोरक्षक संघ के उपाध्यक्ष भी हैं, ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। उन्होंने कहा कि—“समाज का उत्थान केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण और संस्कारों से होता है।” उनके प्रवचन के दौरान पूरा सभागार मंत्रमुग्ध होकर सुनता रहा।

भव्य परशुराम प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम में भगवान श्री परशुराम जी की फाइबर ग्लास निर्मित भव्य प्रतिमा भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
ब्राह्मण सभा के सचिव बृजेश कुमार शर्मा के अथक प्रयासों से यह प्रतिमा समारोह में स्थापित की गई। जैसे ही प्रतिमा का अनावरण हुआ, लोगों ने फूल बरसाकर स्वागत किया और “जय श्री परशुराम” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।
आयोजकों ने इसे समाज के लिए गौरव और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताया।

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परशुराम जन्मोत्सव बना संस्कृति, कविता और सामाजिक एकता का महाकुंभ!

अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने बांधा समां
धार्मिक और सामाजिक संदेशों के साथ-साथ कार्यक्रम में साहित्य और कविता का भी अनूठा संगम देखने को मिला। आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से दर्शकों का मन मोह लिया। कवयित्री शिखा दीप्ति, कवि अमित शर्मा, मुकेश शर्मा और राज सिंघल ने हास्य, वीर रस, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत कविताएं प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। कवि सम्मेलन के दौरान कई बार दर्शकों की तालियों से सभागार गूंज उठा।


समाज के उत्थान और युवा जागरण का लिया संकल्प
ब्राह्मण सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन केवल उत्सव नहीं बल्कि समाज को जागरूक और संगठित करने का माध्यम हैं। सभा अध्यक्ष सुरेश चंद्र पचौरी ने कहा कि— “युवाओं में संस्कार, शिक्षा और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता पैदा करना ही ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य है।” उन्होंने भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम लगातार आयोजित करने की बात कही।


इन गणमान्य लोगों की रही विशेष उपस्थिति
समारोह में संयोजक सुनील शर्मा, अजीत प्रधान, वेद प्रकाश शर्मा, हरिओम शर्मा, वेद कुमारी मुद्गल, हरेंद्र शर्मा, यतेंद्र शर्मा, सुमन कुमार शर्मा, महेश शर्मा बदोली, निर्वेश मुद्गल, अखिलेश पाठक, गौरव उपाध्याय, ममता तिवारी, छाया शुक्ला, कुलदीप शर्मा, अनुज उपाध्याय, जीपी गोस्वामी, डॉ. आरती शर्मा, चित्र कुमार, सुभाष शर्मा सहित बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोग मौजूद रहे। अंत में ब्राह्मण सभा की ओर से सभी अतिथियों, कवियों, संतों और सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया गया।

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