Lawyers News : “वकीलों पर लाठी, न्याय व्यवस्था पर चोट!”… लखनऊ कांड के खिलाफ गौतमबुद्धनगर बार एसोसिएशन का उबाल, हाईकोर्ट बेंच की 40 साल पुरानी मांग फिर हुई तेज, “अधिवक्ताओं पर डंडा नहीं, संवाद होना चाहिए था”, मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन, “Access to Justice” का मुद्दा बना केंद्र

गौतमबुद्धनगर, रफ़्तार टूडे। लखनऊ में अधिवक्ताओं पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध की आग अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक पहुंच चुकी है। गौतमबुद्धनगर जनपद दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन ने इस घटना को न्याय व्यवस्था की गरिमा पर हमला बताते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बार एसोसिएशन की आम सभा में अधिवक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि कानून की रक्षा करने वाले अधिवक्ताओं के साथ ही इस प्रकार का व्यवहार होगा, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्यायिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट मनोज भाटी (बोडाकी) की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में अधिवक्ताओं ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष व्यक्त किया। बैठक का संचालन सचिव शोभाराम चन्दीला ने किया। सभा में मौजूद अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि लखनऊ में पुलिस द्वारा अधिवक्ताओं पर अमानवीय, असंवेदनशील और बर्बर तरीके से लाठीचार्ज किया गया, जिसने पूरे अधिवक्ता समुदाय को झकझोर कर रख दिया है।
“अधिवक्ताओं पर डंडा नहीं, संवाद होना चाहिए था”
बैठक में कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि वकील केवल पेशेवर वर्ग नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था का अभिन्न स्तंभ हैं। ऐसे में पुलिस द्वारा बल प्रयोग बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि किसी मुद्दे पर विवाद था, तो प्रशासन को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए था, न कि लाठीचार्ज जैसा कदम उठाना चाहिए था।
सभा में यह भी कहा गया कि यह घटना केवल एक शहर या कुछ अधिवक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के वकीलों के सम्मान और आत्मसम्मान से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। यही कारण है कि अब प्रदेशभर के बार एसोसिएशन इस मुद्दे पर खुलकर सामने आने लगे हैं।
मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन
बैठक के बाद बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं और कहा कि यदि समय रहते इन मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
ये रहीं अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगें
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना
अधिवक्ताओं ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करोड़ों लोगों को आज भी न्याय के लिए इलाहाबाद या लखनऊ तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे समय और धन दोनों की भारी बर्बादी होती है। इसलिए मेरठ या पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसी उपयुक्त स्थान पर हाईकोर्ट बेंच स्थापित की जाए।
- लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच
ज्ञापन में मांग की गई कि लखनऊ में अधिवक्ताओं पर हुए कथित लाठीचार्ज की न्यायिक या निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। - घायल अधिवक्ताओं को मुआवजा और इलाज
सभा में कहा गया कि कई अधिवक्ता इस घटना में घायल हुए हैं। सरकार उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए और आर्थिक सहायता भी प्रदान करे। - टूटे चैंबरों का पुनर्निर्माण
ज्ञापन में यह मांग भी शामिल रही कि जिन अधिवक्ताओं के चैंबर प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें नए चैंबर उपलब्ध कराए जाएं।
थाना ठाकुरगंज पुलिस पर भी उठे सवाल
कुछ अधिवक्ताओं ने विशेष रूप से थाना ठाकुरगंज के प्रभारी समेत संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। अधिवक्ताओं का कहना था कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो अधिवक्ता समाज इसे अन्याय मानेगा।
40 साल पुरानी मांग फिर चर्चा में
सभा में वक्ताओं ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग कोई नई नहीं है। पिछले लगभग चार दशकों से अधिवक्ता और सामाजिक संगठन इस मांग को उठाते रहे हैं।
वक्ताओं का कहना था कि—
पश्चिमी यूपी की आबादी कई राज्यों से अधिक है
मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है
लंबी दूरी के कारण गरीब वादकारियों को भारी परेशानी होती है
इसके बावजूद आज तक इस मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
“Access to Justice” का मुद्दा बना केंद्र
अधिवक्ताओं ने कहा कि न्याय तक समान पहुंच हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि किसी व्यक्ति को न्याय पाने के लिए सैकड़ों किलोमीटर यात्रा करनी पड़े, तो यह न्यायिक व्यवस्था की पहुंच पर सवाल खड़े करता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच बनने से लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और न्यायिक प्रक्रिया भी तेज होगी।
बार एसोसिएशन ने न्यायालयों से भी मांगा सहयोग
बार एसोसिएशन द्वारा पारित प्रस्ताव में जनपद के सभी न्यायालयों से इस विरोध के दौरान सहयोग देने की अपील भी की गई। साथ ही संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश सरकार के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है।
पहली—लाठीचार्ज की घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई।
दूसरी—पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की लंबे समय से लंबित मांग पर ठोस निर्णय।
राजनीतिक और कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
अधिवक्ता समुदाय में बढ़ रहा आक्रोश
गौतमबुद्धनगर की इस बैठक के बाद साफ संकेत मिल रहे हैं कि अधिवक्ताओं का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। कई अधिवक्ताओं ने कहा कि यह केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की गरिमा को बचाने की लड़ाई है।
क्या सरकार उठाएगी बड़ा कदम?
अब निगाहें प्रदेश सरकार पर टिकी हैं। क्या सरकार अधिवक्ताओं की मांगों पर सकारात्मक कदम उठाएगी? क्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश को हाईकोर्ट बेंच का तोहफा मिलेगा? क्या दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों की राजनीति और न्यायिक व्यवस्था दोनों की दिशा तय कर सकते हैं।



