Greater Noida West News : "30 मिनट तक लिफ्ट में कैद रहीं छात्राएं, डर के बीच गूंजती रही हनुमान चालीसा" — ग्रेटर नोएडा वेस्ट की गैलेक्सी वेगा सोसाइटी में फिर उठा लिफ्ट सुरक्षा पर बड़ा सवाल, बड़ा सवाल—भरोसा तकनीक पर या भगवान हनुमान पर?

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईराइज सोसाइटियों में लिफ्ट सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गैलेक्सी वेगा सोसाइटी में एक लिफ्ट अचानक बीच रास्ते बंद हो गई, जिससे उसमें सवार कई छात्राएं करीब 30 मिनट तक अंदर फंसी रहीं। बंद लिफ्ट, घुटन भरा माहौल और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं होने के कारण छात्राओं में दहशत फैल गई। हालांकि, तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर हाईराइज सोसाइटियों में लिफ्टों के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
घबराहट के बीच हनुमान चालीसा का सहारा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लिफ्ट अचानक बंद होने के बाद छात्राओं ने कई बार अलार्म बजाया और मदद के लिए आवाज लगाई। समय बीतने के साथ घबराहट बढ़ने लगी। मानसिक तनाव से खुद को संभालने के लिए छात्राओं ने हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। करीब आधे घंटे तक वे बंद लिफ्ट में फंसी रहीं, जिसके बाद सूचना मिलने पर तकनीकी टीम मौके पर पहुंची और लिफ्ट का दरवाजा खोलकर सभी छात्राओं को सुरक्षित बाहर निकाला।
शारीरिक नुकसान नहीं, लेकिन मानसिक डर गहरा
इस घटना में किसी भी छात्रा को शारीरिक चोट नहीं आई, लेकिन लिफ्ट से बाहर निकलने के बाद वे काफी डरी और सहमी हुई दिखाई दीं। परिजनों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसी घटनाएं बार-बार होने से लोगों का लिफ्ट पर भरोसा कम होता जा रहा है। खासकर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है।

हर घटना के बाद जांच, लेकिन समाधान कब?
नोएडा और ग्रेटर नोएडा की हाईराइज सोसाइटियों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान लिफ्ट खराब होने और लोगों के फंसने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लगभग हर घटना के बाद प्रशासन जांच के आदेश देता है, मेंटेनेंस एजेंसियों को सख्त निर्देश जारी किए जाते हैं और सुरक्षा मानकों का पालन कराने की बात कही जाती है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। निवासियों का कहना है कि केवल जांच और चेतावनी से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि सभी सोसाइटियों में लिफ्टों का नियमित तकनीकी ऑडिट, समयबद्ध मेंटेनेंस और आपातकालीन रेस्क्यू सिस्टम अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।
निवासियों ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग
सोसाइटी के लोगों ने मांग की है कि लिफ्ट मेंटेनेंस करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए। यदि लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कंपनी और बिल्डर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रत्येक हाईराइज सोसाइटी में 24 घंटे प्रशिक्षित तकनीकी टीम और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को लंबे समय तक लिफ्ट में फंसे न रहना पड़े।
बड़ा सवाल—भरोसा तकनीक पर या भगवान पर?
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिक हाईराइज शहरों में रहने वाले लोग आखिर कितने सुरक्षित हैं। जब हर कुछ दिनों में लिफ्ट खराब होने की खबरें सामने आती हैं और लोग बीच रास्ते फंस जाते हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है? लोगों का कहना है कि ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जिसमें किसी भी नागरिक को लिफ्ट में फंसने के बाद डर और बेबसी के बीच भगवान का सहारा लेने की नौबत ही न आए। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और संबंधित एजेंसियों पर हैं कि वे इस घटना को केवल एक और हादसा मानकर छोड़ देते हैं या फिर लिफ्ट सुरक्षा के लिए स्थायी और प्रभावी कदम उठाते हैं।



