Yatharth Hospital News : विश्व स्तनपान सप्ताह: मां का दूध नवजात के लिए अमृत समान, पहले छह महीने केवल स्तनपान से मिलती है जीवन की सबसे मजबूत नींव, मां का दूध नवजात के लिए सबसे अनमोल उपहार : डॉ. रोली बंथिया, जागरूकता और सहयोग से बनेगा स्वस्थ समाज, केवल स्तनपान से संक्रमण का खतरा होता है कम : डॉ. निधि गुप्ता
डॉ. रोली मुंशी, सीनियर कंसल्टेंट – पीडियाट्रिक्स एवं नियोनेटोलॉजी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा-110 ने कहा कि स्तनपान केवल भोजन नहीं, बल्कि शिशु को स्वस्थ जीवन की मजबूत शुरुआत देने का माध्यम है।डॉ. नीलम बनर्जी, सीनियर कंसल्टेंट एवं रोबोटिक सर्जन तथा एचओडी – आईवीएफ एवं फर्टिलिटी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा-1, ग्रेटर नोएडा ने कहा कि स्तनपान प्रत्येक नवजात को स्वस्थ जीवन देने का सबसे प्रभावी और प्राकृतिक तरीका है

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स के विशेषज्ञों ने माताओं और परिवारों से अपील की है कि जन्म के बाद पहले छह महीनों तक शिशु को केवल मां का दूध ही पिलाया जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि मां का दूध नवजात के लिए संपूर्ण आहार है, जो उसे आवश्यक पोषक तत्व, एंटीबॉडी और रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है। इससे न केवल शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है, बल्कि कई गंभीर संक्रमणों और बीमारियों से भी सुरक्षा मिलती है।
पहले छह महीने केवल स्तनपान, स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स के चिकित्सकों ने बताया कि जीवन के शुरुआती छह महीने बच्चे के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान केवल स्तनपान कराने से शिशु का मस्तिष्क तेजी से विकसित होता है, पाचन तंत्र मजबूत बनता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसके साथ ही मां और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव भी गहरा होता है।
मां का दूध नवजात के लिए सबसे अनमोल उपहार : डॉ. रोली बंथिया
डॉ. रोली बंथिया, कंसल्टेंट – प्रसूति एवं स्त्री रोग, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन ने कहा कि मां का दूध शिशु के लिए सबसे सुरक्षित और संतुलित पोषण का स्रोत है। इसमें मौजूद एंटीबॉडी और सुरक्षात्मक तत्व संक्रमण, एलर्जी और कई दीर्घकालिक बीमारियों के खतरे को कम करते हैं। उन्होंने बताया कि प्रसव के बाद नियमित रूप से शिशु के वजन, स्तनपान की आवृत्ति, सही लैचिंग, फीडिंग पोजीशन और पेशाब-मल त्याग की निगरानी आवश्यक है। साथ ही मां के स्तनों के स्वास्थ्य और दूध की पर्याप्तता का भी समय-समय पर मूल्यांकन होना चाहिए।
डॉ. बंथिया ने स्पष्ट किया कि सिजेरियन डिलीवरी के बाद भी सफलतापूर्वक स्तनपान कराया जा सकता है। इसके लिए जन्म के तुरंत बाद स्किन-टू-स्किन कॉन्टैक्ट, सही पोजीशन और लैक्टेशन विशेषज्ञ का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती दिनों में शिशु का बार-बार दूध मांगना सामान्य प्रक्रिया है और यह पर्याप्त दूध बनने में मदद करता है।
केवल स्तनपान से संक्रमण का खतरा होता है कम : डॉ. निधि गुप्ता
डॉ. निधि गुप्ता, एचओडी – नियोनेटोलॉजी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मॉडल टाउन, दिल्ली ने कहा कि पहले छह महीनों तक केवल स्तनपान कराने से शिशु को सभी आवश्यक पोषक तत्वों के साथ लाभकारी बैक्टीरिया और संक्रमण से लड़ने वाली एंटीबॉडी प्राप्त होती हैं। उन्होंने बताया कि डॉक्टर नियमित रूप से बच्चे के वजन, मल के रंग, हाइड्रेशन और प्रतिदिन 4 से 6 बार गीले डायपर की निगरानी के आधार पर यह सुनिश्चित करते हैं कि शिशु को पर्याप्त दूध मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि कुछ विशेष चिकित्सीय परिस्थितियों, जैसे गैलेक्टोसीमिया, मां की कीमोथेरेपी या सक्रिय टीबी जैसी स्थितियों को छोड़कर अधिकांश मामलों में स्तनपान सुरक्षित रहता है। सामान्य सर्दी-जुकाम होने पर भी मां मास्क पहनकर स्तनपान जारी रख सकती है।
स्तनपान बच्चे को देता है जीवन की सबसे मजबूत शुरुआत : डॉ. रोली मुंशी
डॉ. रोली मुंशी, सीनियर कंसल्टेंट – पीडियाट्रिक्स एवं नियोनेटोलॉजी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा-110 ने कहा कि स्तनपान केवल भोजन नहीं, बल्कि शिशु को स्वस्थ जीवन की मजबूत शुरुआत देने का माध्यम है। उन्होंने बताया कि जन्म के तुरंत बाद निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध यानी कोलोस्ट्रम शिशु का पहला प्राकृतिक टीका माना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में रोग प्रतिरोधक तत्व होते हैं, जो नवजात को शुरुआती संक्रमणों से बचाते हैं।
डॉ. मुंशी ने कहा कि प्रसव के बाद मां और बच्चे दोनों की नियमित निगरानी जरूरी है। सही लैचिंग, फीडिंग तकनीक, वजन में वृद्धि और मां की समस्याओं जैसे स्तनों में दूध का जमाव या निप्पल दर्द का समय पर उपचार सफल स्तनपान के लिए आवश्यक है।
सही जानकारी और परिवार का सहयोग है सफलता की कुंजी : डॉ. नीलम बनर्जी
डॉ. नीलम बनर्जी, सीनियर कंसल्टेंट एवं रोबोटिक सर्जन तथा एचओडी – आईवीएफ एवं फर्टिलिटी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा-1, ग्रेटर नोएडा ने कहा कि स्तनपान प्रत्येक नवजात को स्वस्थ जीवन देने का सबसे प्रभावी और प्राकृतिक तरीका है। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले छह महीने तक केवल स्तनपान और उसके बाद उपयुक्त पूरक आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की सलाह देता है।
डॉ. बनर्जी ने कहा कि कई माताओं को सही लैचिंग, दूध की पर्याप्तता या सिजेरियन के बाद स्तनपान से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन उचित काउंसलिंग और लैक्टेशन सपोर्ट से इन समस्याओं का समाधान संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि स्तन के आकार का दूध बनने की क्षमता से कोई संबंध नहीं होता और इस तरह की भ्रांतियों को दूर करना बेहद जरूरी है।
जागरूकता और सहयोग से बनेगा स्वस्थ समाज
विशेषज्ञों ने कहा कि सफल स्तनपान केवल मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे परिवार, स्वास्थ्यकर्मियों और समाज की साझा जिम्मेदारी है। यदि अस्पतालों, घरों और कार्यस्थलों पर स्तनपान के अनुकूल वातावरण तैयार किया जाए तथा नई माताओं को सही मार्गदर्शन और सहयोग मिले, तो आने वाली पीढ़ी अधिक स्वस्थ, मजबूत और रोगमुक्त बन सकती है। विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स ने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों से बचें, विशेषज्ञों की सलाह लें और नवजात को जीवन की सबसे मजबूत शुरुआत देने के लिए पहले छह महीनों तक केवल मां का दूध ही पिलाएं।



