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Breaking News : दादरी की सियासत में जमीन विवाद से हलचल, पूर्व GM रविंद्र तोंगड़ और पत्नी कुशल सिंह समेत 14 के खिलाफ FIR, यादव सिंह से ज्यादा "मलाई" चाटी थी GM रविन्द्र तोंगड़ ने, करीब 34 हजार वर्गमीटर जमीन और पांच करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी के आरोप; कुशल सिंह को दादरी से भाजपा टिकट का दावेदार बताए जाने के बीच मामला चर्चा में

दादरी विधानसभा क्षेत्र में कुशल सिंह की राजनीतिक सक्रियता के बीच FIR सामने आने से मामला सिर्फ जमीन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। अब इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है। हालांकि, किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति द्वारा आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले जांच की रिपोर्ट का इंतजार करना महत्वपूर्ण होगा। दूसरी ओर, यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो मामला राजनीतिक रूप से और गंभीर हो सकता है। वहीं, यदि आरोपों में तथ्य नहीं पाए जाते हैं तो नामजद लोगों के लिए कानूनी राहत का रास्ता खुल सकता है।

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से जुड़े रहे पूर्व महाप्रबंधक (GM) रविंद्र तोंगड़ और उनकी पत्नी कुशल सिंह समेत कुल 14 लोगों के खिलाफ जमीन और धनराशि से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में FIR दर्ज होने के बाद दादरी की राजनीति से लेकर नोएडा-ग्रेटर नोएडा के प्रशासनिक गलियारों तक हलचल तेज हो गई है। आरोप है कि करीब 34 हजार वर्गमीटर जमीन और लगभग पांच करोड़ रुपये की रकम से जुड़ी कथित हेराफेरी की गई। मामला अदालत के आदेश के बाद नोएडा के सेक्टर-20 थाने में दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।

इस पूरे प्रकरण का राजनीतिक पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि रविंद्र तोंगड़ की पत्नी कुशल सिंह को दादरी विधानसभा सीट से भाजपा की संभावित दावेदार बताया जा रहा है। ऐसे में उनके नाम का FIR में शामिल होना स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में चर्चा का नया विषय बन गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज होना आरोपों की शुरुआत है और इससे दोष सिद्ध नहीं होता। मामले में आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।

34 हजार वर्गमीटर जमीन और करोड़ों की रकम का मामला

शिकायतकर्ता गायत्री हॉस्पिटैलिटी एंड रियलकॉन लिमिटेड की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में कंपनी को लगभग 72 हजार वर्गमीटर का GH-11 भूखंड आवंटित किया गया था। इस भूखंड की लीज डीड फरवरी 2011 में होने की बात शिकायत में कही गई है। शिकायत के अनुसार, वर्ष 2013 के दौरान परियोजना से संबंधित जमीन के एक हिस्से को अलग से विकसित करने अथवा सब-लीज करने को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ी। आरोप है कि इसी दौरान तत्कालीन GM रविंद्र तोंगड़ ने अपने पद का कथित दुरुपयोग करते हुए जमीन के एक हिस्से को इंटाईसमेन्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के नाम सब-लीज कराने में भूमिका निभाई।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित कंपनी से जुड़े कुछ लोग रविंद्र तोंगड़ के करीबी थे और उनकी पत्नी कुशल सिंह को कंपनी में शेयरधारक बनाया गया था। इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है और पुलिस जांच में दस्तावेजों एवं वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

भुगतान और जमीन के अधिकार को लेकर गंभीर आरोप

मामले में शिकायतकर्ता की ओर से यह आरोप भी लगाया गया है कि निर्धारित रकम का पूरा भुगतान किए बिना ही जमीन से संबंधित अधिकार हासिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। शिकायत में प्राधिकरण की मूल फाइलों, सब-लीज डीड, कंपनी की बैलेंस शीट और आर्थिक लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है। आरोपों के अनुसार, पूरे विवाद में करीब 34 हजार वर्गमीटर जमीन और लगभग पांच करोड़ रुपये सहित अन्य बकाया रकम का मामला सामने आता है। पुलिस ने अदालत के निर्देश के बाद FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू की है। अब जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि जमीन के हस्तांतरण अथवा सब-लीज की प्रक्रिया में कौन-कौन से दस्तावेज इस्तेमाल किए गए और निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं।

दादरी की राजनीति में क्यों बढ़ी हलचल?

FIR का राजनीतिक असर इसलिए भी देखा जा रहा है क्योंकि कुशल सिंह को दादरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा टिकट की दावेदार के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। ऐसे में जमीन से जुड़े इस मामले ने उनकी राजनीतिक दावेदारी को लेकर चर्चाओं को हवा दे दी है। दादरी विधानसभा क्षेत्र में आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। ऐसे में विपक्षी दल इस FIR को राजनीतिक मुद्दा बना सकते हैं, जबकि संबंधित पक्ष के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती आरोपों का कानूनी और तथ्यात्मक जवाब देना होगी।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि FIR में नाम होना किसी आरोपी को कानूनी रूप से दोषी नहीं बनाता। इसलिए इस मामले में निष्कर्ष पुलिस जांच, साक्ष्यों और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाला जाना चाहिए।

रविंद्र तोंगड़ का पुराना कार्यकाल भी चर्चा में

रविंद्र तोंगड़ का नाम नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा रहा है। उनके कार्यकाल को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले भी चर्चाएं होती रही हैं। अब जमीन से संबंधित नई FIR सामने आने के बाद उनके कार्यकाल में लिए गए जमीन आवंटन, सब-लीज और अन्य प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेष रूप से जांच एजेंसियों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित जमीन से जुड़े निर्णय के समय प्राधिकरण में कौन-कौन से अधिकारी पद पर थे, फाइल किस स्तर से चली, किस अधिकारी ने अनुमति दी और संबंधित कंपनियों के बीच आर्थिक लेनदेन किस प्रकार हुआ। यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

यादव सिंह प्रकरण से तुलना, लेकिन दोनों मामले अलग

नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की चर्चा होने पर पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह का नाम अक्सर सामने आता है। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और पद के कथित दुरुपयोग से जुड़े गंभीर मामले सामने आए थे। बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई और गिरफ्तारी ने पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया था। रविंद्र तोंगड़ के खिलाफ सामने आई मौजूदा FIR के बाद स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में उनकी तुलना यादव सिंह प्रकरण से की जा रही है। लेकिन दोनों मामलों को एक जैसा मानना फिलहाल उचित नहीं होगा। यादव सिंह मामले में लंबी जांच और न्यायिक प्रक्रिया हुई, जबकि रविंद्र तोंगड़ के मामले में अभी FIR दर्ज होने के बाद जांच का चरण चल रहा है।

इसलिए मौजूदा मामले में लगाए गए आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में पेश करने के बजाय कथित आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

जांच में इन दस्तावेजों की होगी अहम भूमिका

अब पुलिस जांच में कई दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इनमें मूल लीज डीड, सब-लीज डीड, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की संबंधित फाइलें, कंपनी की बैलेंस शीट, शेयरहोल्डिंग का विवरण, बैंक खातों से हुए लेनदेन और जमीन से जुड़े भुगतान के रिकॉर्ड शामिल हैं।

जांच अधिकारियों के सामने सबसे अहम सवाल यह होगा कि जिस जमीन को लेकर विवाद है, उसके हस्तांतरण अथवा सब-लीज की प्रक्रिया किस नियम के तहत हुई थी। क्या निर्धारित भुगतान किया गया था? संबंधित कंपनियों के बीच वास्तविक कारोबारी संबंध क्या थे? कुशल सिंह की कंपनी में हिस्सेदारी किस समय और किस प्रक्रिया के तहत बनी? तथा तत्कालीन प्राधिकरण अधिकारियों की भूमिका क्या थी? इन सवालों के जवाब दस्तावेजी साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों से सामने आने की उम्मीद है।

राजनीति और जमीन विवाद का कनेक्शन जांच का विषय

दादरी विधानसभा क्षेत्र में कुशल सिंह की राजनीतिक सक्रियता के बीच FIR सामने आने से मामला सिर्फ जमीन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। अब इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है। हालांकि, किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति द्वारा आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले जांच की रिपोर्ट का इंतजार करना महत्वपूर्ण होगा। दूसरी ओर, यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो मामला राजनीतिक रूप से और गंभीर हो सकता है। वहीं, यदि आरोपों में तथ्य नहीं पाए जाते हैं तो नामजद लोगों के लिए कानूनी राहत का रास्ता खुल सकता है।

अब पुलिस जांच पर टिकी निगाहें

फिलहाल पूरे मामले की दिशा पुलिस जांच से तय होगी। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि करीब 72 हजार वर्गमीटर के मूल भूखंड से संबंधित प्रक्रिया में 20 हजार और 14 हजार वर्गमीटर जमीन के हिस्सों को लेकर क्या निर्णय लिए गए, किस स्तर पर दस्तावेज तैयार हुए और करीब पांच करोड़ रुपये की बताई जा रही रकम से जुड़े लेनदेन की वास्तविक स्थिति क्या है।

रविंद्र तोंगड़ और कुशल सिंह समेत 14 लोगों के खिलाफ दर्ज FIR ने दादरी की राजनीति के साथ-साथ नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से जुड़े पुराने जमीन मामलों की चर्चा को भी फिर तेज कर दिया है। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच, दस्तावेजों की पड़ताल और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना ही कहा जा सकता है कि मामला गंभीर आरोपों से जुड़ा है, लेकिन आरोपों की सत्यता और किसी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्धारित होगी।

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