Metro In Greater Noida West : “मेट्रो का सपना अब होगा साकार!”… ग्रेटर नोएडा वेस्ट में दौड़ेगी विकास की रफ्तार, जून में मिल सकती है बड़ी मंजूरी, लाखों लोगों को ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत, करीब 900 करोड़ की परियोजना, 7.5 किलोमीटर लंबा होगा कॉरिडोर

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों लोगों के लिए अब वह खबर सामने आई है, जिसका इंतजार वर्षों से किया जा रहा था। रोजाना ट्रैफिक जाम, घंटों का सफर और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की परेशानी झेल रहे लोगों को अब जल्द बड़ी राहत मिल सकती है। लंबे समय से अटकी पड़ी ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो परियोजना अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है और माना जा रहा है कि जून महीने में इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को बड़ी मंजूरी मिल सकती है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार की पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) की बैठक में इस परियोजना पर अहम चर्चा प्रस्तावित है। अगर सबकुछ तय योजना के अनुसार रहा तो आने वाले दिनों में ग्रेटर नोएडा वेस्ट की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। यह परियोजना केवल मेट्रो लाइन नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य की नई आधारशिला मानी जा रही है।
जाम, धूल और घंटों के सफर से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर
ग्रेटर नोएडा वेस्ट, जिसे लोग नोएडा एक्सटेंशन के नाम से भी जानते हैं, पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है। यहां हजारों हाईराइज सोसाइटियां बन चुकी हैं और लाखों लोग निवास कर रहे हैं। लेकिन आबादी बढ़ने के मुकाबले सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था उतनी मजबूत नहीं हो सकी।
हर सुबह और शाम लोगों को दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा आने-जाने में भारी ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है। कई बार 10 से 15 किलोमीटर का सफर तय करने में डेढ़ से दो घंटे तक लग जाते हैं। ऐसे में मेट्रो परियोजना को यहां के लोगों के लिए “लाइफलाइन” माना जा रहा है।
जून में होगी बड़ी बैठक, केंद्र सरकार के सामने रखा जाएगा प्रोजेक्ट
जानकारी के अनुसार, जून के पहले सप्ताह में होने वाली PIB बैठक में इस परियोजना पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि 6 या 7 जून को होने वाली बैठक में मेट्रो कॉरिडोर की व्यवहार्यता, लागत और यात्री संख्या का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया जाएगा।
इस बैठक में नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (NMRC) के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। अधिकारियों द्वारा यह बताया जाएगा कि इस परियोजना से लाखों यात्रियों को किस प्रकार सीधा लाभ मिलेगा और क्षेत्र के ट्रैफिक दबाव को किस हद तक कम किया जा सकेगा। यदि PIB से प्रारंभिक मंजूरी मिल जाती है तो इसके बाद प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।
करीब 900 करोड़ की परियोजना, 7.5 किलोमीटर लंबा होगा कॉरिडोर
प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर की अनुमानित लागत लगभग 900 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह कॉरिडोर करीब 7.5 किलोमीटर लंबा होगा, जो नोएडा सेक्टर-51 से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 यानी किसान चौक तक जाएगा। इस पूरे रूट पर कुल 5 मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनसे लाखों यात्रियों को फायदा होगा। यह परियोजना नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बीच यात्रा को न केवल आसान बनाएगी, बल्कि समय और ईंधन दोनों की बचत भी करेगी।
इन प्रमुख स्टेशनों से गुजरेगी मेट्रो लाइन
एनएमआरसी द्वारा प्रस्तावित रूट के अनुसार मेट्रो लाइन निम्नलिखित स्टेशनों से होकर गुजरेगी— सेक्टर-61, सेक्टर-70, सेक्टर-122, सेक्टर-123 ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 (किसान चौक) इन स्टेशनों के बनने से आसपास की बड़ी आबादी सीधे मेट्रो नेटवर्क से जुड़ जाएगी। खासतौर पर ग्रेटर नोएडा वेस्ट की बड़ी-बड़ी सोसाइटियों में रहने वाले लोगों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा।
RRTS आने पर भी नहीं रुकेगा मेट्रो प्रोजेक्ट
मेट्रो अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) को मंजूरी मिलती है, तब भी इस मेट्रो परियोजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दोनों परियोजनाएं स्वतंत्र रूप से संचालित होंगी और अलग-अलग यात्रियों को सेवाएं देंगी। इससे यह साफ हो गया है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट को आने वाले वर्षों में बहुस्तरीय ट्रांसपोर्ट नेटवर्क मिलने जा रहा है।
लाखों लोगों की उम्मीदें अब इस परियोजना से जुड़ीं
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासी लंबे समय से मेट्रो की मांग कर रहे थे। कई बार प्रदर्शन हुए, ज्ञापन दिए गए और सोशल मीडिया पर अभियान चलाए गए। अब जब परियोजना अंतिम चरण की ओर बढ़ती दिख रही है, तो लोगों में उत्साह का माहौल है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि जून में मंजूरी मिल जाती है तो यह क्षेत्र के विकास के इतिहास में सबसे बड़ा कदम साबित होगा।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट का बदलेगा पूरा ट्रांसपोर्ट सिस्टम
माना जा रहा है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद—
सड़क पर वाहनों का दबाव कम होगा, प्रदूषण में कमी आएगी, लोगों का समय बचेगा, सार्वजनिक परिवहन मजबूत होगा, दिल्ली-नोएडा-ग्रेटर नोएडा कनेक्टिविटी और बेहतर होगी



