राजनीतिउत्तर प्रदेशगौतमबुद्ध नगरताजातरीन

UP BJP News : “टिकट कटेगा या दोबारा मिलेगा मौका?” बीजेपी में मचा अंदरूनी मंथन, ‘गायब’ विधायकों, कमजोर रिपोर्ट कार्ड और 70 पार नेताओं पर हाईकमान की पैनी नजर!, 2027 के महासंग्राम से पहले भाजपा का बड़ा सर्वे ऑपरेशन शुरू, जनता से पूछा जा रहा—“आपका विधायक कितना एक्टिव?”

लखनऊ, रफ़्तार टूडे। उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव अभी भले दूर दिखाई देता हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसकी आहट अभी से तेज हो चुकी है। सत्ता में लगातार तीसरी बार वापसी का लक्ष्य लेकर चल रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अब केवल विपक्ष पर हमला करने की रणनीति नहीं बना रही, बल्कि अपने ही विधायकों का “रिपोर्ट कार्ड” तैयार कराने में जुट गई है। पार्टी सूत्रों की मानें तो जिन विधायकों की जनता के बीच पकड़ कमजोर पाई जाएगी, जिन नेताओं को लेकर क्षेत्र में नाराजगी है या जो विधायक चुनाव जीतने के बाद जनता से कट गए हैं, उनका टिकट आगामी विधानसभा चुनाव में कट सकता है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि पार्टी केवल मौजूदा प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि उम्र, संगठन से तालमेल, क्षेत्रीय सक्रियता और जनता के बीच छवि जैसे कई पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। खास तौर पर 70 वर्ष से अधिक आयु वाले विधायकों और लंबे समय से निष्क्रिय माने जा रहे नेताओं को लेकर पार्टी के अंदर गहन मंथन शुरू हो गया है।


“विधायक बनते ही गायब” नेताओं की रिपोर्ट तैयार, जनता से सीधे पूछे जा रहे सवाल
भाजपा संगठन इस बार केवल नेताओं के दावों या स्थानीय कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहना चाहता। पार्टी हाईकमान ने दो स्वतंत्र एजेंसियों को जमीनी सर्वे का जिम्मा सौंपा है। ये एजेंसियां गांव-गांव और शहर-शहर जाकर आम जनता से सीधे संवाद कर रही हैं। सर्वे के दौरान लोगों से पूछा जा रहा है—
क्या आपका विधायक क्षेत्र में दिखाई देता है?
जनता की समस्याओं पर कितना काम हुआ?
विधायक का व्यवहार कैसा है?
सरकार की योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचा या नहीं?
अगली बार उसी विधायक को दोबारा देखना चाहते हैं या नहीं? सूत्रों के मुताबिक कई क्षेत्रों में जनता ने खुलकर नाराजगी जताई है। कुछ विधायकों पर आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद वे क्षेत्र से लगभग गायब हो गए और केवल बड़े आयोजनों या सोशल मीडिया तक सीमित रह गए।

70 साल पार नेताओं पर भी नजर, युवा चेहरों को मौका देने की तैयारी?
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि पार्टी इस बार “युवा और एक्टिव नेतृत्व” के फॉर्मूले पर आगे बढ़ सकती है। ऐसे में 70 वर्ष से अधिक उम्र वाले कुछ विधायकों और नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारी देकर नए चेहरों को चुनावी मैदान में उतारने की रणनीति भी तैयार की जा रही है। हालांकि भाजपा की ओर से आधिकारिक तौर पर इस पर कोई बयान नहीं आया है, लेकिन संगठन के भीतर यह संकेत साफ माने जा रहे हैं कि पार्टी “विजयी संभावना” को सबसे ऊपर रखकर निर्णय लेना चाहती है।


मंडलवार बना चिंता का केंद्र, कमजोर सीटों पर फोकस
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक इस बार सर्वे मंडलवार कराया जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, खासकर मंडलवार को लेकर पार्टी ज्यादा सतर्क दिखाई दे रही है।आंकड़ों पर नजर डालें तो— 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मुरादाबाद मंडल की 27 में से 14 सीटें जीती थीं
2022 में यह संख्या घटकर 10 रह गई
यही वजह है कि पार्टी इस क्षेत्र में मजबूत, सक्रिय और सामाजिक समीकरणों को साधने वाले उम्मीदवारों की तलाश में जुट गई है। कमजोर रिपोर्ट वाले नेताओं को बदलने का विकल्प भी खुला रखा गया है।

संगठन, सांसद और RSS की राय भी होगी अहम
भाजपा इस बार उम्मीदवार चयन को लेकर बहुस्तरीय प्रक्रिया अपना रही है। जिला संगठन, क्षेत्रीय इकाइयों, सांसदों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी संभावित उम्मीदवारों पर राय ली जा रही है। बताया जा रहा है कि—
संगठन अपनी अलग सूची तैयार करेगा
बाहरी एजेंसियां अलग रिपोर्ट देंगी
सांसदों और संघ का फीडबैक भी लिया जाएगा
तीनों रिपोर्ट का मिलान कर अंतिम रणनीति बनेगी
यानी इस बार केवल “राजनीतिक वजन” या “पुराना अनुभव” ही टिकट की गारंटी नहीं होगा, बल्कि जनता के बीच सक्रियता सबसे बड़ा पैमाना बन सकती है।

सरकार की योजनाओं पर भी जनता का फीडबैक जुटा रही भाजपा
सर्वे केवल विधायकों तक सीमित नहीं है। पार्टी सरकार की योजनाओं और कामकाज को लेकर भी जनता की राय ले रही है। भाजपा यह समझना चाहती है कि किन क्षेत्रों में सरकार की छवि मजबूत है और कहां असंतोष बढ़ रहा है।
विशेष रूप से इन मुद्दों पर प्रतिक्रिया ली जा रही है— कानून व्यवस्था
सड़क और बिजली व्यवस्था
किसान और रोजगार

विपक्ष भी एक्टिव, हर दल कर रहा “जिताऊ चेहरों” की तलाश
सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और आजाद समाज पार्टी भी 2027 की तैयारियों में जुट चुकी हैं। कांग्रेस ने पश्चिमी यूपी में एजेंसियों के जरिए संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार कराई है
समाजवादी पार्टी भी कई सीटों पर सर्वे करा चुकी है
बसपा ने कुछ क्षेत्रों में प्रभारियों और संभावित प्रत्याशियों को सक्रिय कर दिया है
आजाद समाज पार्टी दूसरे दलों के प्रभावशाली नेताओं को जोड़ने में लगी है
यानी 2027 का चुनावी रण अभी से दिलचस्प होता जा रहा है।


भाजपा का फोकस साफ—“काम करने वालों को इनाम, गायब नेताओं की छुट्टी!”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस बार “परफॉर्मेंस बेस्ड टिकट वितरण” की दिशा में बढ़ रही है। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि केवल जीतकर विधायक बन जाना काफी नहीं, बल्कि जनता के बीच लगातार सक्रिय रहना भी जरूरी है। यदि यह रणनीति लागू होती है, तो 2027 के चुनाव में उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर नए चेहरे दिखाई दे सकते हैं और कई पुराने दिग्गजों का टिकट कटना भी तय माना जा रहा है।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
Raftar Today

Related Articles

Back to top button