Sharda University News : ना सीमाएं, ना बंदूक... फिर भी हैं सच्चे योद्धा!, शारदा अस्पताल में राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे पर भावनात्मक आयोजन, डॉक्टरों के योगदान और मानसिक स्वास्थ्य पर हुई चर्चा

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
एक डॉक्टर के जीवन में न तो रविवार होता है, न छुट्टियां। न दिन की गिनती होती है और न रात की। उनके लिए हर दिन किसी की जान बचाने की ज़िम्मेदारी से शुरू होता है और किसी उम्मीद को पूरा करने की कोशिश के साथ खत्म। ऐसे ही निस्वार्थ और समर्पण भाव से परिपूर्ण पेशे को सम्मान देने के लिए 1 जुलाई को ‘राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे’ मनाया जाता है। इस अवसर पर शारदा अस्पताल, शारदा केयर और हेल्थसिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने मिलकर नॉलेज पार्क, ग्रेटर नोएडा में एक शानदार और भावनात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया।
भावनात्मक संवाद और डॉक्टरों के अनुभवों की साझेदारी
कार्यक्रम का आयोजन मानव संसाधन प्रबंधन विभाग द्वारा किया गया था, जिसमें अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ रामामूर्ति शर्मा, डेंटल कॉलेज के डीन डॉ एम. सिद्धार्थ, स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च की डीन डॉ निरुपमा गुप्ता, और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ डॉक्टरों ने हिस्सा लिया।
डॉ शर्मा ने अपने प्रेरणास्पद संबोधन में कहा:
“डॉक्टरी केवल इलाज नहीं, यह मानवता की सेवा है। लेकिन समाज को यह भी समझना होगा कि डॉक्टर भी इंसान हैं, उन्हें भी थकान, दर्द और भावनात्मक संबल की ज़रूरत होती है।”
डॉक्टरों का मानसिक स्वास्थ्य भी है अहम विषय
डॉ निरुपमा गुप्ता ने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान खींचते हुए कहा:
“हम डॉक्टर्स को अक्सर सुपरहीरो समझते हैं — जो थकते नहीं, टूटते नहीं। लेकिन सच यह है कि हमारे भीतर भी एक इंसान होता है, जो तनाव, थकान और भावनात्मक दबाव से जूझता है। इस डॉक्टर्स डे पर हमें इस पहलू को भी समझना होगा।”
उनके वक्तव्य पर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने तालियों के साथ सहमति जताई। यह बात बिल्कुल स्पष्ट हुई कि आज के दौर में ‘Emotionally Sustainable Healthcare’ की भी आवश्यकता है।
“डॉक्टर देश के सैनिक हैं” — हेल्थसिटी के VP का जोशीला संबोधन
शारदा केयर हेल्थसिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के वाईस प्रेसिडेंट रिषभ गुप्ता ने डॉक्टरों को ‘आंतरिक सीमाओं के रक्षक’ बताते हुए कहा:
“हमारे देश के डॉक्टर वे सैनिक हैं, जो बिना बंदूक के लड़ते हैं। वे न सीमाओं पर खड़े होते हैं, न बैरिकेड्स के पीछे — लेकिन उनका युद्ध है ज़िंदगी और मौत के बीच, हर दिन।”
उन्होंने कोविड-19 महामारी की मिसाल देते हुए कहा कि कैसे डॉक्टरों ने परिवार से दूर रहकर, पीपीई किट में कई-कई घंटे काम कर, लाखों लोगों की जान बचाई।
“डॉक्टरों के बिना जीवन की कल्पना नहीं” — शारदा ग्रुप के वाइस चेयरमैन वाई. के. गुप्ता का संदेश
वाईके गुप्ता, वाइस चेयरमैन, शारदा ग्रुप ने डॉक्टरों के योगदान को नमन करते हुए कहा:
“हर दिन एक डॉक्टर मरीजों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए काम करता है, लेकिन अक्सर वह अपनी खुद की सेहत और भावनात्मक संतुलन को अनदेखा कर देता है। आज का दिन डॉक्टरों के समर्पण और बलिदान को सम्मानित करने का दिन है।”
उन्होंने यह भी जोड़ते हुए कहा कि मेडिकल संस्थानों को अब ऐसे प्रयास करने चाहिए जिससे डॉक्टरों को बेहतर कामकाजी माहौल, मानसिक राहत और वर्क-लाइफ बैलेंस मिले।
कविता, संगीत और मुस्कान से सजा यह दिन
कार्यक्रम के दौरान एक सांस्कृतिक सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें स्टाफ और छात्रों ने कविता पाठ, गीत प्रस्तुति और स्मृति साझा कार्यक्रम में भाग लिया। एक डॉक्टर द्वारा सुनाई गई कविता — “हम भी इंसान हैं…” — ने पूरे हॉल को भावुक कर दिया।
एक डॉक्टर की कलम से — ‘हमसे मत मांगो चमत्कार’
इस कार्यक्रम में मौजूद एक वरिष्ठ चिकित्सक ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा:
“जब हम ऑपरेशन थिएटर में होते हैं, तो हमारा हर निर्णय किसी की ज़िंदगी से जुड़ा होता है। हमसे हर बार चमत्कार की उम्मीद मत रखिए, बस एक इंसान के रूप में हमारा सम्मान कीजिए।”
कार्यक्रम के उद्देश्य और भविष्य की दिशा
इस आयोजन का उद्देश्य न केवल डॉक्टरों को सम्मान देना था, बल्कि मेडिकल पेशे से जुड़े गहरे मुद्दों — जैसे बर्नआउट, वर्कलोड, और मनोवैज्ञानिक दबाव — पर भी चर्चा करना था।
यह निर्णय लिया गया कि शारदा अस्पताल में एक “Doctors’ Wellness Program” की शुरुआत की जाएगी, जिसमें चिकित्सकों को नियमित मानसिक स्वास्थ्य सहायता, काउंसलिंग, योग और रिलैक्सेशन सेशन प्रदान किए जाएंगे।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख चेहरे
इस गरिमामयी आयोजन में शारदा अस्पताल के विभिन्न विभागों के प्रमुख डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, मेडिकल छात्रों और मैनेजमेंट टीम के सदस्यों ने भाग लिया। सभी ने इस दिन को डॉक्टरों के त्याग और समर्पण के प्रतीक के रूप में मनाया।
डॉक्टर्स डे: क्यों है यह दिन खास?
भारत में हर साल 1 जुलाई को राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे मनाया जाता है, यह दिन महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि के रूप में चिह्नित है। इसका उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत लोगों के समर्पण को मान्यता देना और उनके प्रति समाज में सम्मान की भावना को बढ़ावा देना है।
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