स्वास्थ्यHealthगौतमबुद्ध नगरग्रेटर नोएडाब्रेकिंग न्यूज़

Felix Hospital News : ग्रेटर नोएडा के फेलिक्स अस्पताल में निर्माण के दौरान बड़ा हादसा!, दीवार ढहने से सात मजदूर दबे, पांच की हालत गंभीर, सुरक्षा लापरवाही बनी मौत का सबब, पुलिस ने जांच शुरू की, ठेकेदार और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप, हादसे से निकला बड़ा सबक – बिना सुरक्षा जांच के नहीं शुरू हो कोई निर्माण

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। ग्रेटर नोएडा के प्रतिष्ठित फेलिक्स अस्पताल में सोमवार को निर्माण कार्य के दौरान बड़ा हादसा हो गया। वॉटर टैंक की खुदाई के दौरान अस्पताल की दीवार अचानक गिर पड़ी, जिससे सात मजदूर मलबे के नीचे दब गए। हादसे में पांच मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत ही पुलिस की मदद से अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रारंभिक जांच में निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी सामने आई है। घटना ने स्थानीय प्रशासन और प्राधिकरण की कार्यशैली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

दीवार गिरते ही मचा हड़कंप, चीख-पुकार से गूंजा निर्माण स्थल

मिली जानकारी के अनुसार, गामा-1 सेक्टर स्थित फेलिक्स अस्पताल परिसर में सोमवार दोपहर जेसीबी मशीन से वॉटर टैंक के लिए खुदाई का कार्य चल रहा था। खुदाई इतनी गहराई तक चली गई कि पास की अस्पताल की बाहरी दीवार कमजोर होकर अचानक भरभरा कर गिर पड़ी।
देखते ही देखते, वहां काम कर रहे मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। सात मजदूर मलबे में दब गए, जिनमें से पांच की हालत नाजुक बताई जा रही है। मौके पर मौजूद लोगों ने शोर मचाकर पुलिस को सूचना दी।

पुलिस ने दिखाई तत्परता, घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया

सूचना मिलते ही बीटा-2 थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और दबे हुए मजदूरों को बाहर निकाला। घायलों को तत्काल पास के ही अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ मजदूरों की हालत गंभीर बनी हुई है।

सुरक्षा इंतजामों की खुली पोल – बिना सुरक्षा उपकरणों के हो रहा था काम

हादसे के बाद जब रफ़्तार टुडे की टीम ने मौके की जांच की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। निर्माण स्थल पर सुरक्षा बैरिकेड, चेतावनी बोर्ड, या सेफ्टी बेल्ट जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं।
ना तो मजदूरों को हेलमेट या सेफ्टी किट दी गई थी, और ना ही आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित किया गया था। सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार द्वारा जल्दबाज़ी में काम पूरा करने के चक्कर में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई गईं।

अस्पताल की दीवार की मजबूती पर भी सवाल

स्थानीय निवासियों का कहना है कि फेलिक्स अस्पताल की बाउंड्री वॉल पहले से ही कमजोर थी। “दीवार पर जगह-जगह दरारें पड़ी हुई थीं, कई बार इसकी शिकायत की गई थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया,” एक स्थानीय निवासी ने बताया।
अब वही दीवार मजदूरों के लिए जानलेवा साबित हुई।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया—‘बस एक जोरदार आवाज आई और सब खत्म हो गया’

मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी राजेश कुमार ने बताया “जेसीबी से खुदाई चल रही थी, तभी एक तेज़ आवाज आई और पूरा हिस्सा धंस गया। सबकुछ धूल में लिपट गया। मजदूरों की चीखें सुनकर हम लोग दौड़े, लेकिन मलबा इतना भारी था कि खुद कुछ नहीं कर पाए।” कुछ मजदूरों को स्थानीय लोगों ने अपने हाथों से मलबा हटाकर निकाला।

पुलिस ने जांच शुरू की, ठेकेदार और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप

हादसे की जानकारी मिलते ही बीटा-2 थाना पुलिस ने घटना स्थल को घेर लिया और जांच शुरू कर दी। सूत्रों के अनुसार, निर्माण कार्य का कोई आधिकारिक अनुमति पत्र या सेफ्टी ऑडिट रिकॉर्ड नहीं मिला है। पुलिस का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन और ठेकेदार की भूमिका की जांच की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन पर भी उठे सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर ग्रेटर नोएडा में निर्माण कार्यों की सुरक्षा निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्राधिकरण के निरीक्षण अधिकारी अक्सर कागज़ों पर जांच पूरी दिखा देते हैं, जबकि साइट पर हालात बिल्कुल अलग रहते हैं। अभी कुछ ही महीनों पहले इसी इलाके में एक अन्य निर्माण स्थल पर भी दीवार गिरने से मजदूर घायल हुए थे, लेकिन तब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी।

स्थानीय लोगों ने जताया रोष

मौके पर जुटे लोगों ने कहा कि यदि प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने पहले से सुरक्षा उपाय किए होते, तो यह हादसा नहीं होता। एक स्थानीय व्यापारी ने कहा “अस्पताल जैसी जगह से तो हम उम्मीद करते हैं कि वे हर चीज़ में सुरक्षा का ध्यान रखेंगे। पर यहां खुद उनके निर्माण कार्य में जान से खिलवाड़ हो रहा है।”

हादसे से निकला बड़ा सबक – बिना सुरक्षा जांच के नहीं शुरू हो कोई निर्माण

यह हादसा सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए सबक है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निर्माण कार्य की शुरुआत से पहले तकनीकी और संरचनात्मक सुरक्षा की विस्तृत जांच आवश्यक है।
ग्रेटर नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में सुरक्षा मानकों का पालन अब सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है।

अधिकारियों ने लिया संज्ञान

घटना की जानकारी मिलते ही प्राधिकरण के अधिकारी और फायर ब्रिगेड टीम भी मौके पर पहुंची। निर्देश पर एक जांच समिति गठित की जा सकती है, जो यह पता लगाएगी कि क्या निर्माण कार्य नियमानुसार और लाइसेंस प्राप्त ठेकेदार के माध्यम से हो रहा था या नहीं।

घायलों की हालत पर नज़र, जांच रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई

इस समय घायलों का इलाज फेलिक्स अस्पताल में ही चल रहा है। पुलिस ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने बयान देने से इंकार किया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि “निर्माण कार्य आउटसोर्स ठेकेदार के जिम्मे था।”

सवाल अब भी वही – आखिर कब सुधरेंगे निर्माण सुरक्षा के हालात?

यह घटना एक बार फिर उस दर्दनाक सच्चाई को उजागर करती है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच मजदूरों की सुरक्षा अब भी उपेक्षित है।
जबकि ग्रेटर नोएडा जैसे शहर में हर महीने करोड़ों के निर्माण कार्य हो रहे हैं, सुरक्षा मानकों का पालन केवल कागज़ों तक सीमित है।

रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
Raftar Today

Related Articles

Back to top button