Greater Noida Authority News : "AC कमरों से बाहर निकलें अफसर, तभी बदलेगी ग्रेटर नोएडा की तस्वीर!", जनता की दो टूक मांग, फाइलों से नहीं, जमीनी निरीक्षण से ही होगा विकास; सीईओ से हर महीने जनसंवाद और फील्ड विजिट अनिवार्य करने की अपील

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शामिल ग्रेटर नोएडा आज आधुनिक बुनियादी ढांचे, ऊंची इमारतों, औद्योगिक निवेश और विश्वस्तरीय परियोजनाओं के कारण नई पहचान बना रहा है। लेकिन दूसरी ओर शहर और गांवों में रहने वाले हजारों नागरिक आज भी टूटी सड़कें, जलभराव, गंदगी, जाम सीवर, खराब स्ट्रीट लाइट, खुले नाले और बदहाल पार्क जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में अब लोगों की ओर से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एन. जी. रवि कुमार से एक महत्वपूर्ण जनहित मांग उठाई गई है कि प्राधिकरण के सभी अधिकारी कार्यालयों की चारदीवारी से बाहर निकलें और नियमित रूप से सेक्टरों व गांवों का स्थलीय निरीक्षण करें।
स्थानीय नागरिकों, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल कार्यालयों में बैठकर फाइलों और प्रस्तुतियों के आधार पर विकास कार्यों की समीक्षा करने से वास्तविक समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। जब तक अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर स्थिति नहीं देखेंगे, तब तक जमीनी हकीकत और सरकारी रिपोर्टों के बीच का अंतर बना रहेगा। लोगों का कहना है कि कई समस्याएं महीनों तक इसलिए बनी रहती हैं क्योंकि संबंधित अधिकारियों तक उनकी वास्तविक स्थिति पहुंच ही नहीं पाती।
नागरिकों का आरोप है कि अधिकांश विभाग तभी सक्रिय दिखाई देते हैं जब किसी समस्या को लेकर प्रदर्शन, धरना या मीडिया में खबरें प्रकाशित होती हैं। सामान्य दिनों में अनेक क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था प्रभावित रहती है, डस्टबिन भर जाते हैं, कूड़े के ढेर लगे रहते हैं और समय पर उनका निस्तारण नहीं हो पाता। बरसात के दौरान कई सेक्टरों और गांवों में जलभराव की समस्या आम हो जाती है, जिससे लोगों का आवागमन प्रभावित होता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
सड़कों की स्थिति को लेकर भी लोगों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि कई स्थानों पर सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, इंटरलॉकिंग टूट चुकी है और लंबे समय तक मरम्मत नहीं होने से वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं कई इलाकों में महीनों से स्ट्रीट लाइट बंद होने के कारण रात के समय अंधेरा छाया रहता है, जिससे दुर्घटनाओं और अपराध की आशंका भी बढ़ जाती है।
नागरिकों ने पेयजल और सीवर व्यवस्था को भी प्रमुख मुद्दा बताया। कई क्षेत्रों में दूषित पानी की शिकायतें, सीवर जाम और पाइपलाइन लीकेज जैसी समस्याएं लगातार सामने आती रहती हैं। पार्कों के रखरखाव में भी लापरवाही देखने को मिल रही है। कहीं घास सूखी पड़ी है तो कहीं बच्चों के खेल उपकरण खराब हैं। इसके अलावा खुले नालों, आवारा पशुओं और टूटी बाउंड्रीवाल जैसी समस्याएं भी लोगों की सुरक्षा के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने सुझाव दिया है कि प्राधिकरण प्रत्येक माह “जनसंवाद दिवस” आयोजित करे, जिसमें सीईओ, सभी विभागाध्यक्ष, संबंधित अधिकारी, विभिन्न सेक्टरों के आरडब्ल्यूए पदाधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर समस्याओं पर चर्चा करें। इस बैठक में केवल शिकायतें सुनने तक सीमित न रहकर प्रत्येक समस्या के समाधान की समय-सीमा और जिम्मेदार अधिकारी भी तय किए जाएं। अगली बैठक में उन कार्यों की समीक्षा कर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही मांग की गई है कि प्रत्येक अधिकारी के लिए महीने में कम से कम दो दिन फील्ड विजिट अनिवार्य किया जाए। निरीक्षण के दौरान ली गई फोटो, वीडियो और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि नागरिक भी कार्यों की प्रगति देख सकें। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
नागरिकों का कहना है कि जनसुनवाई केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अधिकारी जनता के कर से मिलने वाले संसाधनों पर कार्य करते हैं, इसलिए जनता के बीच जाकर समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना उनकी प्रशासनिक तथा नैतिक जिम्मेदारी है। यदि अधिकारी नियमित रूप से जमीनी निरीक्षण करेंगे तो छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान समय रहते हो सकेगा और बड़े विवादों तथा आंदोलनों की नौबत भी नहीं आएगी।
लोगों का मानना है कि ग्रेटर नोएडा को वास्तव में स्वच्छ, सुरक्षित, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय शहर बनाने के लिए योजनाओं के साथ-साथ प्रभावी निगरानी भी उतनी ही जरूरी है। विकास केवल नई परियोजनाओं की घोषणा से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने से दिखाई देता है। इसलिए अब समय आ गया है कि प्राधिकरण “ऑफिस से बाहर, जनता के बीच” की कार्यसंस्कृति अपनाए और विकास कार्यों की निगरानी सीधे धरातल पर जाकर करे।
शहरवासियों को उम्मीद है कि यदि प्राधिकरण इस दिशा में ठोस कदम उठाता है तो न केवल समस्याओं का त्वरित समाधान होगा, बल्कि नागरिकों और प्रशासन के बीच विश्वास भी मजबूत होगा। यही पहल ग्रेटर नोएडा को वास्तव में एक आदर्श, आधुनिक और नागरिक-अनुकूल शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।


