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Data Centre Hub In Greater Noida : ग्रेटर नोएडा में डिजिटल क्रांति की दस्तक!, ₹21 हजार करोड़ के निवेश से बनेगा देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर हब, हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार, टेक्नोलॉजी और अर्थव्यवस्था को लगेगा हाईस्पीड इंजन, अडानी, माइक्रोसॉफ्ट और योटा ने भी दिखाई मजबूत दिलचस्पी

डेटा सेंटर सेक्टर में सबसे बड़े निवेशकों में शामिल अडानी समूह ग्रेटर नोएडा में अपने दो प्रमुख प्रोजेक्ट्स पर लगभग 7,500 करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। निर्माण, इंजीनियरिंग, आईटी, सुरक्षा, संचालन और रखरखाव सहित अनेक क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। जिस ग्रेटर नोएडा को अब तक औद्योगिक, शैक्षणिक और रियल एस्टेट हब के रूप में जाना जाता था, अब वही शहर देश की डिजिटल राजधानी बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में ग्रेटर नोएडा और गौतमबुद्ध नगर का नाम भारत के सबसे बड़े डेटा सेंटर हब के रूप में दर्ज हो सकता है। इसकी वजह है यहां हो रहा 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक का विशाल निवेश, जिसने पूरे एनसीआर ही नहीं बल्कि देश के आईटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश केवल विशाल इमारतों या सर्वर पार्क तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे रोजगार, तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप इकोसिस्टम, रियल एस्टेट, परिवहन, बिजली, लॉजिस्टिक्स और स्थानीय व्यापार को भी अभूतपूर्व गति मिलेगी। ग्रेटर नोएडा अब केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल भविष्य की नई पहचान बनने की ओर अग्रसर है।

डेटा सेंटर निवेश का नया केंद्र बना ग्रेटर नोएडा

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार की उद्योग और आईटी अनुकूल नीतियों के चलते ग्रेटर नोएडा में डेटा सेंटर कंपनियों का तेजी से आगमन हुआ है। डिजिटल सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ई-कॉमर्स और फिनटेक सेक्टर की बढ़ती मांग को देखते हुए बड़ी कंपनियां यहां अपने अत्याधुनिक डेटा सेंटर स्थापित कर रही हैं।

इस समय अडानी कनेक्ट्स, योटा, नेक्स्ट्रा, कंट्रोलएस, एसटीटी जैसी अग्रणी कंपनियां ग्रेटर नोएडा में अपने बड़े प्रोजेक्ट विकसित कर रही हैं। कई डेटा सेंटर पार्क संचालन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि कई परियोजनाओं का निर्माण युद्ध स्तर पर जारी है।

अडानी समूह करेगा 7,500 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश

डेटा सेंटर सेक्टर में सबसे बड़े निवेशकों में शामिल अडानी समूह ग्रेटर नोएडा में अपने दो प्रमुख प्रोजेक्ट्स पर लगभग 7,500 करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। निर्माण, इंजीनियरिंग, आईटी, सुरक्षा, संचालन और रखरखाव सहित अनेक क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।

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माइक्रोसॉफ्ट और योटा ने भी दिखाई मजबूत दिलचस्पी

दुनिया की अग्रणी टेक्नोलॉजी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने भी सेक्टर-145 में भूमि लेकर अपनी परियोजना को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। इस परियोजना में लगभग 1,800 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है। वहीं योटा ने उत्तर प्रदेश में भविष्य में लगभग 39 हजार करोड़ रुपये तक निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। यदि यह निवेश पूरी तरह साकार होता है, तो उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े डेटा सेंटर राज्यों में शामिल हो जाएगा।

रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा

विशेषज्ञों के अनुसार डेटा सेंटर केवल तकनीकी परियोजनाएं नहीं होते, बल्कि इनके आसपास पूरा आर्थिक इकोसिस्टम विकसित होता है। इन परियोजनाओं के कारण—हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनियों का विस्तार होगा। स्टार्टअप्स को बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा। होटल, परिवहन, रियल एस्टेट और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। बिजली, इंटरनेट और संचार व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। इसका सीधा लाभ गौतमबुद्ध नगर के साथ-साथ पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को मिलेगा।

उत्तर प्रदेश की डेटा सेंटर नीति बनी बड़ी ताकत

उत्तर प्रदेश सरकार की डेटा सेंटर नीति को इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रकार की सुविधाएं और प्रोत्साहन उपलब्ध कराए हैं। परिणामस्वरूप देश और विदेश की बड़ी कंपनियां उत्तर प्रदेश, विशेषकर ग्रेटर नोएडा को अपनी पहली पसंद बना रही हैं। सरकार ने बढ़ते निवेश को देखते हुए अपने लक्ष्य भी बढ़ाए हैं, जिससे आने वाले वर्षों में और अधिक परियोजनाओं के आने की संभावना है।

नोएडा एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे देंगे अतिरिक्त बढ़त

ग्रेटर नोएडा की सबसे बड़ी ताकत इसकी शानदार कनेक्टिविटी है। जल्द शुरू होने वाला नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और मेट्रो नेटवर्क इस क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक आकर्षक बना रहे हैं।बेहतरीन सड़क नेटवर्क, पर्याप्त बिजली आपूर्ति और आधुनिक शहरी सुविधाओं के कारण डेटा सेंटर कंपनियों को यहां संचालन में काफी सुविधा मिल रही है।

रियल एस्टेट और स्थानीय व्यापार को भी मिलेगा लाभ

डेटा सेंटर परियोजनाओं के विस्तार का असर केवल आईटी सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में आसपास के आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। इससे रियल एस्टेट सेक्टर को नई गति मिलेगी और छोटे व्यापारियों, सेवा प्रदाताओं तथा स्थानीय उद्यमियों के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे।

डिजिटल भारत के भविष्य में ग्रेटर नोएडा की होगी बड़ी भूमिका

जिस प्रकार कभी बेंगलुरु को आईटी और हैदराबाद को टेक्नोलॉजी हब के रूप में पहचान मिली, उसी तरह अब ग्रेटर नोएडा देश के डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। लगातार हो रहे हजारों करोड़ रुपये के निवेश, वैश्विक कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी और सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियां यह संकेत दे रही हैं कि ग्रेटर नोएडा का भविष्य अब केवल औद्योगिक नहीं, बल्कि डिजिटल, तकनीकी और वैश्विक बनने जा रहा है।

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