Noida International University News : रील लाइफ बनाम रियल लाइफ, अमोघ लीला दास प्रभु ने नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में छात्रों और अभिभावकों को दिया जीवन का गहरा संदेश, गीता का उपहार और प्रश्नोत्तर सत्र

नोएडा, रफ़्तार टुडे।
नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (NIU) ने एक ऐसा प्रेरणादायी और अविस्मरणीय कार्यक्रम आयोजित किया जिसने छात्रों और उनके अभिभावकों के जीवन में नई ऊर्जा भर दी। इस विशेष अवसर पर प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और मोटिवेशनल स्पीकर अमोघ लीला दास प्रभु, उपाध्यक्ष, ISKCON द्वारका, मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के प्रथम वर्ष के बी.टेक छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए खासतौर से आयोजित किया गया था, जिसमें “रील लाइफ बनाम रियल लाइफ” विषय पर केंद्रित प्रेरक सत्र हुआ।
कुलपति का स्वागत और शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति प्रो. (डॉ.) उमा भारद्वाज ने मुख्य अतिथि का स्वागत और सम्मान करके की। उन्होंने कहा –
“सही शिक्षा और सही मार्गदर्शन ही छात्रों को उनके वास्तविक लक्ष्य तक पहुंचाता है। अमोघ लीला दास प्रभु जैसे आध्यात्मिक गुरु का मार्गदर्शन मिलना हमारे छात्रों के लिए सौभाग्य है। यह सत्र न केवल बच्चों को बल्कि अभिभावकों को भी जीवन की दिशा दिखाएगा।”
शिक्षा और आध्यात्मिकता का मेल
डॉ. तान्या सिंह, डीन एकेडमिक्स, ने भी अपने स्वागत भाषण में कहा –
“आज की पीढ़ी पूरी तरह तकनीक पर निर्भर हो गई है। लेकिन आध्यात्मिकता हमें यह सिखाती है कि जीवन केवल गैजेट्स और सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। आज का यह सत्र निश्चित ही हम सभी को आत्मचिंतन और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देगा।”
रील लाइफ बनाम रियल लाइफ – प्रभुजी का संदेश
अपने मुख्य संबोधन में अमोघ लीला दास प्रभु ने फिल्मों और असल जिंदगी के बीच के फर्क को बेहद रोचक अंदाज में समझाया। उन्होंने कहा –
“फिल्मों में कॉलेज लाइफ को केवल मस्ती, दोस्ती और बेफिक्री से जोड़कर दिखाया जाता है, जबकि असली जिंदगी में अनुशासन, जिम्मेदारी और ज्ञान ही सफलता की असली चाबी है।”
उन्होंने छात्रों को सावधान करते हुए कहा कि –
मोबाइल और सोशल मीडिया की लत युवाओं का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुकी है। नशे और अस्वस्थ रिश्ते जीवन को गलत राह पर ले जाते हैं।
शारीरिक निष्क्रियता मानसिक और शारीरिक दोनों ही स्वास्थ्य को कमजोर करती है।
उनके शब्दों में –
“तकनीक एक शानदार सेवक है, लेकिन बहुत खराब मालिक। अगर आप इसे नियंत्रित नहीं करेंगे तो यह आपको नियंत्रित कर लेगी।”
छात्रों के लिए सीख
यह सत्र छात्रों और अभिभावकों के लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक आत्मिक अनुभव था। इसने यह बताया कि रील लाइफ का झूठा आकर्षण हमें भटका सकता है, लेकिन रियल लाइफ में अनुशासन और ज्ञान ही असली ताकत है। छात्रों ने सीखा कि करियर के साथ-साथ जीवन के मूल्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
और सबसे बड़ी सीख – तकनीक का उपयोग हमें नियंत्रित करने के लिए नहीं, बल्कि हमारी प्रगति के साधन के रूप में होना चाहिए।
विश्वविद्यालय और मठ का उदाहरण
प्रभुजी ने छात्रों को यह भी समझाया कि जैसे मठ में रहने वाला साधु अपने नियमों का पालन करता है, वैसे ही विश्वविद्यालय में छात्र को अपने छात्र धर्म का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा –
“किसी भी जगह का वातावरण आपको उसी रूप में ढलने की प्रेरणा देता है। विश्वविद्यालय में आपका उद्देश्य केवल पढ़ाई नहीं बल्कि जीवन की सही दिशा प्राप्त करना भी होना चाहिए।”
गीता का उपहार और प्रश्नोत्तर सत्र
सत्र के अंत में अमोघ लीला दास प्रभु ने छात्रों को भगवद गीता पर हस्ताक्षर कर उन्हें भेंट की। यह केवल एक किताब नहीं, बल्कि उनके लिए जीवन का मार्गदर्शक बनने वाला संदेश था।
इसके बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच एक प्रेरक प्रश्नोत्तर सत्र हुआ, जिसमें प्रभुजी ने धैर्यपूर्वक हर सवाल का उत्तर दिया। उनके उत्तरों में आध्यात्मिकता के साथ-साथ आधुनिक जीवन की चुनौतियों के समाधान भी छिपे थे।
धन्यवाद ज्ञापन और समापन
कार्यक्रम का समापन आकाश शर्मा, निदेशक प्रवेश एवं आउटरीच, के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने कहा –
“एनआईयू को गर्व है कि वह छात्रों को केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन मूल्य भी प्रदान कर रहा है। अमोघ लीला दास प्रभु का यह सत्र निश्चित रूप से छात्रों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा।”



