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DWPS School News : “कचरे से कला, जागरूकता से बदलाव”, दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल में वेस्ट मैनेजमेंट कार्यशाला ने जगाई पर्यावरण चेतना, 200 से अधिक छात्रों ने लिया उत्साहपूर्वक भाग, कचरे से रचनात्मक कला का अद्भुत प्रदर्शन, शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान Delhi World Public School में 13 फरवरी 2026 को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सार्थक और रचनात्मक पहल देखने को मिली। विद्यालय परिसर में वेस्ट मैनेजमेंट कार्यशाला का आयोजन HCL Lending Hands Foundation के सहयोग से किया गया। यह कार्यक्रम विद्यालय की माननीय निदेशक सुश्री कंचन कुमारी एवं आदरणीय प्रधानाचार्या डॉ. हीमा शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल कचरा प्रबंधन की जानकारी देना नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों को व्यवहारिक गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की वास्तविक समझ प्रदान करना भी था।


200 से अधिक छात्रों ने लिया उत्साहपूर्वक भाग
इस कार्यशाला में 200 से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। विद्यार्थियों ने विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखा कि किस प्रकार दैनिक जीवन में निकलने वाला कचरा पुनः उपयोग में लाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों को सूखा और गीला कचरा अलग करने, ई-वेस्ट के दुष्प्रभाव समझने तथा ‘रीयूज और रीसायकल’ की अवधारणा पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने उदाहरणों और डेमो के माध्यम से बताया कि यदि सही तरीके से कचरा प्रबंधन किया जाए तो पर्यावरण पर पड़ने वाला नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कचरे से रचनात्मक कला का अद्भुत प्रदर्शन
कार्यशाला का सबसे आकर्षक हिस्सा था छात्रों की रचनात्मक गतिविधियाँ। विद्यार्थियों ने बिसलेरी प्रकार की पानी की बोतलों के ढक्कनों से सुंदर गमले और पशु आकृतियाँ तैयार कीं। दही और आइसक्रीम के खाली कपों से रंग-बिरंगे सजावटी बोर्ड बनाए गए, जबकि त्यागे गए चार्जर और अन्य ई-वेस्ट सामग्री से अभिनव टाइल्स का निर्माण किया गया।
इन गतिविधियों ने यह साबित कर दिया कि ‘कचरा’ केवल बेकार वस्तु नहीं, बल्कि सही दृष्टिकोण के साथ वह रचनात्मकता और नवाचार का माध्यम भी बन सकता है।

पर्यावरण हितैषी आदतों पर दिया गया जोर
माननीय निदेशक सुश्री कंचन कुमारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक विषय नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे घर और स्कूल दोनों स्थानों पर सतत एवं पर्यावरण हितैषी आदतों को अपनाएं।
प्रधानाचार्या डॉ. हीमा शर्मा ने विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि आज के बच्चे कल के जिम्मेदार नागरिक हैं। यदि वे अभी से पर्यावरण के प्रति जागरूक होंगे, तो भविष्य में समाज को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा।

शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
कार्यशाला ने यह संदेश भी दिया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि व्यवहारिक जीवन में जिम्मेदारी निभाना भी उसका अहम हिस्सा है।
HCL Lending Hands Foundation की टीम ने छात्रों को बताया कि कॉर्पोरेट और शैक्षणिक संस्थानों की साझेदारी से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। इस प्रकार के कार्यक्रम छात्रों में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करते हैं।

प्रेरणादायक अनुभव बना आयोजन
पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के चेहरे पर उत्साह और सीखने की ललक साफ दिखाई दी। कार्यशाला के अंत में कई छात्रों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि अब वे घर पर भी कचरे को अलग-अलग वर्गों में बांटेंगे और रीसायकल के लिए जागरूकता फैलाएंगे।
यह कार्यशाला केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि छात्रों के लिए एक प्रेरणादायक अनुभव सिद्ध हुई, जिसने उन्हें पर्यावरण के प्रति सजग और जिम्मेदार बनने की दिशा में एक मजबूत कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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