Gujjer Samaj News : “किसान आंदोलन के अग्रदूत को शत-शत नमन” — विजय सिंह पथिक जयंती पर उमड़ा जनसैलाब, गुर्जर महासभा के भव्य कार्यक्रम में इतिहास, संघर्ष और समाज की एकता की गूंज, स्वतंत्रता संग्राम और किसान आंदोलनों के प्रेरणास्रोत, महात्मा गांधी भी थे पथिक जी के विचारों से प्रभावित
मुख्य अतिथि जयंत चौधरी ने युवाओं को किया प्रेरित, महासभा के संरक्षक Dr Yashveer Singh, अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिश्चंद्र भाटी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पी कसाना, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सविंदर भाटी और सुनील भाटी मौजूद

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर विचारक और किसान आंदोलनों के अग्रदूत Vijay Singh Pathik की जयंती के अवसर पर Akhil Bharatiya Gurjar Mahasabha द्वारा ग्रेटर नोएडा में एक भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए समाज के प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों और हजारों लोगों ने भाग लेकर पथिक जी के संघर्ष, विचारों और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को याद किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि विजय सिंह पथिक केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं बल्कि किसान आंदोलन के ऐसे अग्रदूत थे जिन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाकर पूरे देश में नई चेतना पैदा की।
कार्यक्रम के दौरान पूरे वातावरण में देशभक्ति, समाजिक एकता और इतिहास की प्रेरणादायक गूंज सुनाई दी। मंच से वक्ताओं ने पथिक जी के जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने रखा और युवाओं से उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
स्वतंत्रता संग्राम और किसान आंदोलनों के प्रेरणास्रोत
कार्यक्रम में वक्ताओं ने विस्तार से बताया कि विजय सिंह पथिक का जन्म 27 फरवरी 1882 को उत्तर प्रदेश के Bulandshahr जनपद में हुआ था। वे केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं बल्कि एक प्रतिभाशाली लेखक, कवि और पत्रकार भी थे। उन्होंने अपने लेखों, कविताओं और समाचार पत्रों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य किया।
पथिक जी ने किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए कई आंदोलनों का नेतृत्व किया। उनके द्वारा संचालित किसान आंदोलन को उस दौर में एक अनूठा प्रयोग माना गया, जिसने आगे चलकर पूरे देश में किसानों के संगठित आंदोलनों को प्रेरणा दी। वक्ताओं ने कहा कि पथिक जी का संघर्ष केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने पूरे देश में किसानों और आम लोगों के अधिकारों की लड़ाई को मजबूत किया।
महात्मा गांधी भी थे पथिक जी के विचारों से प्रभावित
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि राष्ट्रपिता Mahatma Gandhi भी विजय सिंह पथिक के कार्यों और विचारों से अत्यंत प्रभावित थे। गांधी जी ने उन्हें अपने साथ Wardha Ashram आने का निमंत्रण दिया था और वहां से अखबार प्रकाशित करने का आग्रह किया था।
इसके बाद पथिक जी ने लगभग एक वर्ष तक वर्धा आश्रम से अखबार का प्रकाशन किया और समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य जारी रखा। उस समय प्रसिद्ध उद्योगपति और समाजसेवी Jamnalal Bajaj ने भी उनके आंदोलनों में आर्थिक सहयोग प्रदान किया था। यह सहयोग इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि पथिक जी स्वतंत्र लेखन और आंदोलनों के माध्यम से समाज की सेवा कर रहे थे।
समाज की ओर से किया गया सम्मान
कार्यक्रम की अध्यक्षता Harish Chandra Bhati, राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhil Bharatiya Gurjar Mahasabha ने की, जबकि संरक्षक Dr Yashveer Singh की विशेष उपस्थिति रही।
इस अवसर पर समाज की ओर से मुख्य अतिथि जयंत चौधरी को पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया।

अजमेर बनी कर्मभूमि, अन्याय के खिलाफ उठाई आवाज
पथिक जी ने बाद में Ajmer को अपनी कर्मभूमि बनाया और वहीं से उन्होंने अपने सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों का संचालन किया। उन्होंने कई रियासतों में लगाए गए अन्यायपूर्ण करों के खिलाफ संघर्ष किया और किसानों को राहत दिलाने के लिए आवाज उठाई।
उन्होंने Rajasthan Seva Sangh की स्थापना कर सामाजिक जागरूकता और संगठन को मजबूत किया। साथ ही राजपूताना क्षेत्र में कांग्रेस संगठन को खड़ा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इतिहासकारों का मानना है कि “राजपूताना” नाम के स्थान पर “राजस्थान” शब्द को पहचान दिलाने में भी पथिक जी का योगदान उल्लेखनीय रहा।
मुख्य अतिथि जयंत चौधरी ने युवाओं को किया प्रेरित
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि Jayant Chaudhary, केंद्रीय राज्य मंत्री (कौशल विकास एवं उद्यमिता तथा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) रहे। अपने संबोधन में उन्होंने किसानों की एकता और विजय सिंह पथिक के संघर्षों की सराहना करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज और देश के विकास में योगदान देना चाहिए।
उन्होंने युवाओं को शिक्षा और तकनीक से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिक युग में तकनीकी ज्ञान ही विकास की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने बताया कि वे पहले भी Dankaur क्षेत्र के विकास के लिए लगभग तीन करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान कर चुके हैं और आगे भी समाज और युवाओं के लिए हर संभव सहयोग करते रहेंगे।
महिलाओं के गीत बने कार्यक्रम का आकर्षण
इस आयोजन में Himachal Pradesh, Jammu and Kashmir, Uttarakhand, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh और Rajasthan सहित कई राज्यों से समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
विशेष रूप से बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर से हजारों की संख्या में महिलाओं ने कार्यक्रम में भाग लिया और विजय सिंह पथिक के सम्मान में गीत प्रस्तुत किए, जो इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा।
समाज की ओर से किया गया सम्मान
कार्यक्रम की अध्यक्षता Harish Chandra Bhati (राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय गुर्जर महासभा) ने की, जबकि महासभा के संरक्षक Dr Yashveer Singh की विशेष उपस्थिति रही। इस अवसर पर समाज की ओर से मुख्य अतिथि जयंत चौधरी को पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में महासभा के कई पदाधिकारी और समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें Savinder Bhati, K P Kasana, Ramkesh Chaprana, Dr Jile Ram, Rajpal Kasana, Pankaj Rausa, Ashok Bhati, Janardan Bhati और Namit Bhati सहित कई प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए।
देशभर से जुटे प्रतिनिधि, महिलाओं के गीत बने आकर्षण
कार्यक्रम में Himachal Pradesh, Jammu and Kashmir, Uttarakhand, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh और Rajasthan सहित कई राज्यों से समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
विशेष रूप से बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर से हजारों की संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर विजय सिंह पथिक के सम्मान में पारंपरिक गीत प्रस्तुत किए, जो कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहे।
सरदार पटेल सामाजिक चेतना रैली की घोषणा
कार्यक्रम के दौरान महासभा के पदाधिकारियों ने घोषणा की कि आगामी 31 अक्टूबर को Sardar Vallabhbhai Patel की स्मृति में “सरदार पटेल सामाजिक चेतना रैली” का आयोजन किया जाएगा। इस रैली में एक लाख से अधिक गुर्जर समाज के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
पथिक जी के आदर्शों पर चलने का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने राष्ट्रहित और समाजहित में विजय सिंह पथिक के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि पथिक जी का जीवन संघर्ष, साहस और समाज सेवा का प्रतीक है और उनकी विचारधारा आज भी समाज को एकजुट होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।



