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Breaking BJP News : 72 हजार वर्ग मीटर के GH-11 प्लॉट को लेकर बड़ा विवाद, पूर्व GNIDA अधिकारी समेत 14 लोगों पर FIR; फर्जी दस्तावेज, रकम हड़पने और धमकी के गंभीर आरोप, 20 हजार वर्ग मीटर जमीन की सब-लीज का आरोप भाजपा से टिकट मांग रही कुशाल सिंह ,पति रविंद्र तोंगड़ पर FIR दर्ज

FIR के अनुसार मामले में रविन्द्र टोंगड़, कुशल सिंह, कुनाल भल्ला, सतीश गर्ग, हिमांशु गोयल, सुरेन्द्र सिंह वर्मा, नवीन चौधरी, सचिन, मनोज, पी.एस. मिश्रा, श्रीनिवास समेत अन्य अज्ञात लोगों के नाम सामने आए हैं। दस्तावेज में सीआरसी से जुड़े कुछ निदेशकों का भी उल्लेख किया गया है। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(3), 351(2), 352, 61(2), 340(2), 336(3), 338, 318(1), 318(4), 316(5) और 316(3) सहित विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। साथ ही शिकायत में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं का भी उल्लेख किया गया है।

नोएडा, रफ्तार टुडे। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के GH-11 प्लॉट से जुड़ा एक पुराना और गंभीर विवाद अब पुलिस की जांच के दायरे में पहुंच गया है। गायत्री हॉस्पिटलिटी एंड रियल्कॉन लिमिटेड की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र और उसके आधार पर दर्ज एफआईआर में कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि अवि सिंह ने कई लोगों पर करीब 72 हजार वर्ग मीटर के भूखंड से संबंधित दस्तावेजों में कथित हेराफेरी, फर्जीवाड़ा, रकम के गबन, पद के दुरुपयोग और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले में पूर्व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अधिकारी रविन्द्र टोंगड़ समेत कई लोगों को नामजद किया गया है, जबकि कुछ अन्य व्यक्तियों को अज्ञात आरोपी बताया गया है।

एफआईआर के रिकॉर्ड के अनुसार मामला थाना सेक्टर-20, नोएडा में दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले के जांच अधिकारी के तौर पर उपनिरीक्षक जितेंद्र सिंह को नामित किया गया है।

72 हजार वर्ग मीटर के GH-11 भूखंड से जुड़ा है विवाद

शिकायत में कहा गया है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित GH-11 प्लॉट का कुल क्षेत्रफल लगभग 72,000 वर्ग मीटर था और यह भूखंड गायत्री हॉस्पिटलिटी एंड रियल्कॉन लिमिटेड को प्राधिकरण की ओर से आवंटित किया गया था। कंपनी की ओर से अवि सिंह को 25 मई 2022 के अधिकार पत्र के माध्यम से शिकायत, कानूनी कार्रवाई, साक्ष्य प्रस्तुत करने और मुकदमे की पैरवी सहित विभिन्न कार्यों के लिए अधिकृत प्रतिनिधि बताया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भूखंड के आवंटन के समय कंपनी में कई लोग निदेशक के रूप में कार्यरत थे। बाद में कंपनी के निदेशक मंडल में कुछ अन्य लोगों को शामिल किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इन्हीं लोगों के बीच रिश्तेदारी और व्यावसायिक संबंधों का इस्तेमाल करते हुए भूखंड से संबंधित निर्णयों को प्रभावित किया गया।

20 हजार वर्ग मीटर जमीन की सब-लीज का आरोप

शिकायत में सबसे महत्वपूर्ण आरोप करीब 20 हजार वर्ग मीटर जमीन की कथित सब-लीज को लेकर लगाया गया है। आरोप के मुताबिक वर्ष 2013 के आसपास प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए 20 हजार वर्ग मीटर भूमि बेचने पर सहमति बनी थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी दौरान रविन्द्र टोंगड़ ने अपने पद का कथित दुरुपयोग करते हुए उक्त भूमि की सब-लीज एक कंपनी के नाम करा ली।

शिकायत में दावा किया गया है कि संबंधित कंपनी में मनोज और सचिन को निदेशक तथा रविन्द्र टोंगड़ की पत्नी कुशल सिंह को शेयरधारक बनाया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस लेनदेन के लिए संबंधित जमीन के एवज में अपेक्षित धनराशि का भुगतान नहीं किया गया और विभागीय स्तर पर मिलीभगत करके जमीन का हस्तांतरण कराया गया। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। इनकी वास्तविकता का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में होना है। इसी के ऊपर FIR दर्ज हुआ है।

दस्तावेजों और बैलेंस शीट से खुलासा होने का दावा

शिकायत में कहा गया है कि कथित अनियमितताओं को कंपनी की बैलेंस शीट, सब-लीज डीड और प्राधिकरण की ओर से जारी आदेश-पत्रों का अध्ययन करने पर समझा जा सकता है। शिकायतकर्ता का दावा है कि जमीन से जुड़ी रकम को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था और आरोपित पक्ष से बार-बार हिसाब-किताब तथा बकाया रकम लौटाने की मांग की जाती रही, लेकिन कथित तौर पर कोई संतोषजनक समाधान नहीं हुआ। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि वर्ष 2018 में संबंधित जमीन पर परियोजना लाने के लिए CRC के साथ ज्वाइंट वेंचर/ज्वाइंट प्रोजेक्ट से संबंधित गतिविधियां आगे बढ़ीं। इसी दौरान जमीन और कंपनी से संबंधित दस्तावेजों तथा हिस्सेदारी को लेकर विवाद और गहरा गया।

2025 में रकम और दस्तावेजों को लेकर फिर उठाया मामला

शिकायतकर्ता अवि सिंह के अनुसार 11 दिसंबर 2025 को उन्होंने संबंधित लोगों से फोन पर संपर्क कर बकाया रकम लौटाने, हिसाब करने और दस्तावेजों को दुरुस्त कराने का अनुरोध किया था। आरोप है कि इसके बाद उन्हें कथित रूप से मुंह बंद रखने और रकम तथा ब्याज भूल जाने की धमकी दी गई। शिकायत में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि अवि सिंह का पीछा अज्ञात मोटरसाइकिल सवारों द्वारा किया गया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। इन धमकियों के कारण शिकायतकर्ता ने स्वयं को भयभीत और असुरक्षित बताया।

थाना सेक्टर-20 में दी गई थी शिकायत

दस्तावेजों में उल्लेख है कि धमकी की घटना के संबंध में पहले भी थाना सेक्टर-20, नोएडा में लिखित शिकायत दी गई थी। शिकायतकर्ता ने पुलिस को यह भी बताया कि उनके कार्यालय में कथित रूप से फर्जी और कूटरचित दस्तावेज सुरक्षित हैं तथा संबंधित मामले से जुड़ी मीटिंग भी कार्यालय में हुई थी। शिकायत में कथित गबन की रकम और दस्तावेजों की बरामदगी के लिए पुलिस जांच की आवश्यकता बताई गई।

इन लोगों के नाम FIR में शामिल

दस्तावेजों के अनुसार मामले में रविन्द्र टोंगड़, कुशल सिंह, कुनाल भल्ला, सतीश गर्ग, हिमांशु गोयल, सुरेन्द्र सिंह वर्मा, नवीन चौधरी, सचिन, मनोज, पी.एस. मिश्रा, श्रीनिवास समेत अन्य अज्ञात लोगों के नाम सामने आए हैं। दस्तावेज में सीआरसी से जुड़े कुछ निदेशकों का भी उल्लेख किया गया है। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(3), 351(2), 352, 61(2), 340(2), 336(3), 338, 318(1), 318(4), 316(5) और 316(3) सहित विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। साथ ही शिकायत में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं का भी उल्लेख किया गया है।

पुलिस जांच में सामने आएगा पूरा सच

एफआईआर दर्ज होने के बाद अब इस पूरे मामले की जांच पुलिस के जिम्मे है। पुलिस के सामने जमीन की मूल आवंटन प्रक्रिया, लीज डीड, सब-लीज डीड, भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड, कंपनी की बैलेंस शीट, निदेशकों की नियुक्ति, शेयरहोल्डिंग, प्राधिकरण की फाइलों और कथित फर्जी दस्तावेजों की जांच अहम होगी। जांच में यह भी स्पष्ट होगा कि 20 हजार वर्ग मीटर जमीन से संबंधित कथित लेनदेन किस प्रक्रिया के तहत हुआ, निर्धारित रकम का भुगतान हुआ या नहीं, दस्तावेजों में कोई हेराफेरी हुई अथवा नहीं और शिकायतकर्ता को दी गई कथित धमकियों के पीछे कौन लोग थे। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर उपनिरीक्षक जितेंद्र सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। इस हाई-प्रोफाइल भूमि विवाद में अब जांच की दिशा और सामने आने वाले दस्तावेज यह तय करेंगे कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।

रफ़्तार टूडे NOTE: खबर में वर्णित जमीन, दस्तावेज, रकम, फर्जीवाड़े और धमकी से संबंधित बातें शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत एवं FIR में लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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