Trending News : अब साथ नहीं दिखेंगे नोएडा के दो सबसे बड़े ठिकाने!, GIP मॉल और गार्डन गैलेरिया के बीच खिंचेगी नई लकीर, 15 हजार वर्गमीटर जमीन की ई-नीलामी से बदल जाएगा पूरा नक्शा, गेट नंबर-10 और 11 के बीच की जमीन बनी थी विवाद की वजह, वित्तीय संकट में फंसी यूनिटेक के कारण बढ़ा था विवाद

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा के सबसे चर्चित और व्यस्त व्यावसायिक केंद्रों में शामिल सेक्टर-38ए स्थित जीआईपी (ग्रेट इंडिया प्लेस) मॉल और गार्डन गैलेरिया के बीच अब एक नई दूरी बनने जा रही है। वर्षों से एक साझा परिसर के रूप में पहचान रखने वाले इन दोनों प्रतिष्ठित कॉमर्शियल हब के बीच स्थित लगभग 15 हजार वर्गमीटर जमीन को नोएडा प्राधिकरण ई-ऑक्शन के माध्यम से बेचने की तैयारी कर रहा है। इस फैसले के बाद दोनों परिसरों की संयुक्त पहचान इतिहास बन जाएगी और दोनों की अलग-अलग एंट्री, अलग पहचान और स्वतंत्र व्यावसायिक स्वरूप विकसित होगा।
नोएडा के सबसे चर्चित कॉमर्शियल हब का बदलने जा रहा स्वरूप
सेक्टर-38ए का इलाका लंबे समय से नोएडा का प्रमुख मनोरंजन और व्यावसायिक केंद्र माना जाता रहा है। यहां स्थित जीआईपी मॉल और गार्डन गैलेरिया न केवल खरीदारी बल्कि खान-पान और मनोरंजन के लिए भी लोगों की पहली पसंद रहे हैं। दोनों परिसरों के बीच मौजूद जमीन एक तरह से दोनों को जोड़ने का काम करती थी, लेकिन अब यह कड़ी टूटने वाली है। नोएडा प्राधिकरण ने इस जमीन को व्यावसायिक श्रेणी में रखते हुए ई-नीलामी के जरिए बेचने की तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि इस जमीन की कीमत करोड़ों रुपये में होगी और इससे प्राधिकरण को बड़ा राजस्व प्राप्त हो सकता है।
गेट नंबर-10 और 11 के बीच की जमीन बनी थी विवाद की वजह
जानकारी के मुताबिक जीआईपी मॉल और गार्डन गैलेरिया के बीच स्थित यह जमीन लंबे समय से कानूनी विवाद का हिस्सा रही थी। गेट नंबर-10 और गेट नंबर-11 के बीच स्थित लगभग 15 हजार वर्गमीटर भूमि को लेकर नोएडा प्राधिकरण और यूनिटेक ग्रुप के बीच मामला अदालत तक पहुंच गया था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने नोएडा प्राधिकरण के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद प्राधिकरण ने इस भूमि पर अपना अधिकार स्थापित करते हुए पिछले वर्ष इसके बड़े हिस्से पर कब्जा भी प्राप्त कर लिया था।
वित्तीय संकट में फंसी यूनिटेक के कारण बढ़ा था विवाद
गौरतलब है कि जीआईपी मॉल का निर्माण यूनिटेक ग्रुप द्वारा कराया गया था। बाद में कंपनी वित्तीय संकट में फंस गई और दिवालिया प्रक्रिया के दौर से गुजरने लगी। वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक के पुराने बोर्ड को हटाकर नया बोर्ड नियुक्त किया था ताकि अधूरी परियोजनाओं को पूरा किया जा सके। इसी दौरान विवादित जमीन का मामला भी सामने आया, जिस पर आखिरकार अदालत ने नोएडा प्राधिकरण के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद इस भूमि के भविष्य को लेकर नई योजनाओं पर काम शुरू किया गया।
अभी पार्किंग और पैदल मार्ग के रूप में हो रहा इस्तेमाल
वर्तमान समय में इस भूमि का एक हिस्सा दोपहिया वाहनों की पार्किंग के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जबकि शेष हिस्से का इस्तेमाल पैदल चलने वाले लोग करते हैं। यह इलाका दोनों परिसरों के बीच आने-जाने का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है।
दिलचस्प बात यह भी है कि इसी क्षेत्र में पहले एक ऐसा अनोखा रेस्टोरेंट संचालित होता था, जहां लगभग 90 मीटर की ऊंचाई पर झूलती कुर्सियों पर बैठकर लोग भोजन का आनंद लेते थे। यह आकर्षण काफी समय तक लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
ई-ऑक्शन के बाद बदल जाएगी दोनों परिसरों की पहचान
प्राधिकरण की योजना के अनुसार, ई-नीलामी के बाद यहां नया व्यावसायिक विकास किया जा सकता है। इससे जीआईपी मॉल और गार्डन गैलेरिया का संयुक्त स्वरूप समाप्त हो जाएगा और दोनों की अलग-अलग पहुंच व्यवस्था विकसित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दोनों परिसरों को अपनी स्वतंत्र ब्रांड पहचान बनाने का अवसर मिलेगा, वहीं नए निवेशकों के लिए भी यह क्षेत्र आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
प्राधिकरण को होगा बड़ा आर्थिक लाभ
सेक्टर-38ए नोएडा का सबसे प्रीमियम कॉमर्शियल इलाका माना जाता है। ऐसे में इस जमीन की ई-नीलामी से प्राधिकरण को बड़ी आर्थिक आय होने की संभावना है। यह क्षेत्र मेट्रो, एक्सप्रेसवे और प्रमुख आवासीय सेक्टरों से जुड़ा हुआ है, जिसके कारण यहां निवेश की संभावनाएं काफी अधिक मानी जा रही हैं।
आने वाले समय में बदल सकता है सेक्टर-38ए का पूरा नक्शा
विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय के बाद सेक्टर-38ए के व्यावसायिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नई परियोजनाओं के आने से रोजगार, व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं वर्षों से साथ दिखाई देने वाले जीआईपी मॉल और गार्डन गैलेरिया अब अलग-अलग पहचान के साथ नजर आएंगे। नोएडा के शहरी विकास की दिशा में यह फैसला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र की व्यावसायिक गतिविधियों पर दिखाई दे सकता है।



