UP Noida News : “कचरे से चलेगी गाड़ी!, नोएडा में बनेगा 300 टन का मेगा बायोगैस प्लांट—अब ‘वेस्ट’ नहीं, बनेगा ‘वैल्यू’!”, “प्राधिकरण और IGL की साझेदारी—कागज से जमीन तक पहुंचेगा प्रोजेक्ट”, “CEO प्राधिकरण कृष्णा करुणेश का दावा—नोएडा बनेगा ग्रीन और क्लीन मॉडल”

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा शहर अब स्वच्छता और ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। कचरे के ढेर और प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे शहर को राहत देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। नोएडा प्राधिकरण और इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) के बीच हुए समझौते के तहत शहर में 300 टन प्रतिदिन क्षमता वाला कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट लगाया जाएगा। यह प्रोजेक्ट न केवल कचरा प्रबंधन की तस्वीर बदलेगा, बल्कि पर्यावरण और ऊर्जा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव लेकर आएगा।
“कचरे से कमाई का नया फॉर्मूला—अब हर दिन 300 टन वेस्ट बनेगा एनर्जी”
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत नोएडा में रोजाना निकलने वाले 300 टन ऑर्गेनिक (गीले) कचरे को प्रोसेस कर बायोगैस बनाई जाएगी। इस गैस को कंप्रेस कर CNG के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे वाहन चल सकेंगे।
यह पूरा प्रोजेक्ट भारत सरकार की SATAT योजना के तहत विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा को बढ़ावा देना है।
“प्राधिकरण और IGL की साझेदारी—कागज से जमीन तक पहुंचेगा प्रोजेक्ट”
प्राधिकरण कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कृष्णा करुणेश और संजीव कुमार भाटिया ने Letter of Intent (LoI) पर हस्ताक्षर कर इस परियोजना को औपचारिक रूप दिया। इस साझेदारी में नोएडा प्राधिकरण जमीन उपलब्ध कराएगा और कचरे की सप्लाई सुनिश्चित करेगा
IGL प्लांट का निर्माण, संचालन और तकनीकी प्रबंधन संभालेगी
यह मॉडल पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) का एक बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।
“प्रदूषण पर लगेगी लगाम—लैंडफिल का बोझ होगा कम”
नोएडा में कचरे की सबसे बड़ी समस्या लैंडफिल साइट्स पर बढ़ता दबाव है। इस प्लांट के शुरू होने से गीले कचरे को सीधे प्रोसेस किया जाएगा, जिससे:
मीथेन गैस का उत्सर्जन कम होगा
लैंडफिल साइट्स पर कचरे का ढेर घटेगा
पर्यावरण प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी
विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
“गैस के साथ मिलेगा बोनस—जैविक खाद से किसानों को फायदा”
इस प्लांट का एक और बड़ा फायदा यह है कि बायोगैस के साथ-साथ बायो-मैन्योर (जैविक खाद) भी तैयार होगी।
यह खाद: किसानों के लिए सस्ती और उपयोगी होगी
मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगी
केमिकल फर्टिलाइजर पर निर्भरता कम करेगी
यानी यह प्रोजेक्ट सिर्फ शहर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा।
“सर्कुलर इकोनॉमी की ओर बड़ा कदम—अब ‘जीरो वेस्ट सिटी’ का सपना करीब”
कचरे को संसाधन में बदलने की यह पहल सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल का मजबूत उदाहरण है।
इसका मतलब है जो कचरा पहले समस्या था, वही अब संसाधन बनकर उपयोग में आएगा
नोएडा को ‘जीरो वेस्ट सिटी’ बनाने के विजन में यह प्रोजेक्ट मील का पत्थर साबित हो सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी का संगम—भविष्य के शहर की झलक”
IGL जैसी अनुभवी कंपनी के हाथों में इस प्रोजेक्ट का संचालन होना इसकी सफलता की संभावना को और मजबूत करता है। आधुनिक तकनीक के जरिए:
कचरे की प्रोसेसिंग तेज और सुरक्षित होगी
गैस उत्पादन की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी
पूरे सिस्टम को स्मार्ट तरीके से मॉनिटर किया जाएगा
यह प्रोजेक्ट नोएडा को देश के स्मार्ट और सस्टेनेबल शहरों की सूची में आगे ले जा सकता है।
“CEO प्राधिकरण कृष्णा करुणेश का दावा—नोएडा बनेगा ग्रीन और क्लीन मॉडल”
कृष्णा करुणेश ने इस पहल को शहर के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह प्रोजेक्ट नोएडा को प्रदूषण मुक्त और सस्टेनेबल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
उनके अनुसार, यह केवल एक प्लांट नहीं बल्कि भविष्य की शहरी योजना का हिस्सा है, जहां कचरे को बोझ नहीं बल्कि संसाधन माना जाएगा।
“अब कचरा नहीं बनेगा समस्या—नोएडा बनेगा देश का ‘ग्रीन एनर्जी हब’”
नोएडा में बनने वाला यह 300 TPD बायोगैस प्लांट शहर की सोच और सिस्टम दोनों को बदलने वाला है।
जहां एक तरफ यह पर्यावरण को बचाएगा, वहीं दूसरी तरफ ऊर्जा, रोजगार और कृषि क्षेत्र को भी फायदा पहुंचाएगा।
आने वाले समय में यह मॉडल देश के अन्य शहरों के लिए भी रोल मॉडल बन सकता है।



