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Noida Breaking News : "मुख्यमंत्री तक पहुंची फरियाद, अब हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग!, मेदांता हॉस्पिटल को थमाया नोटिस, ज्यादा बिल वसूलने और नियमों के उल्लंघन के आरोपों की होगी जांच", नोएडा में इलाज के नाम पर मनमानी पर सख्ती के संकेत, मरीज की शिकायत के बाद सीएमओ ने मांगा जवाब, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के पंजीकरण पर भी उठे गंभीर सवाल

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा के प्रतिष्ठित निजी अस्पताल मेदांता हॉस्पिटल के खिलाफ एक मरीज की शिकायत ने स्वास्थ्य विभाग को सक्रिय कर दिया है। मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचने के बाद गौतमबुद्ध नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर कई गंभीर बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। शिकायत में इलाज के दौरान तय राशि से कहीं अधिक बिल वसूलने का आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के पंजीकरण संबंधी नियमों के पालन पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब निजी अस्पतालों में इलाज की लागत, बिलिंग प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर लगातार बहस हो रही है। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई को मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज हुई थी शिकायत
जानकारी के अनुसार ग्रेटर नोएडा के कुलेसरा निवासी प्रशांत कुमार ने 12 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री के आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में भर्ती के समय उन्हें प्रतिदिन इलाज का अनुमानित खर्च 50 से 60 हजार रुपये बताया गया था। लेकिन उपचार पूरा होने के बाद जब अंतिम बिल दिया गया तो वह अनुमानित राशि से लगभग दोगुना निकला।
शिकायतकर्ता का कहना है कि अस्पताल ने अतिरिक्त शुल्क लेने से पहले न तो कोई स्पष्ट सूचना दी और न ही बिल में बढ़ोतरी का उचित कारण बताया। उनका आरोप है कि इस तरह की बिलिंग प्रक्रिया मरीजों और उनके परिजनों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालती है।

मुख्यमंत्री से गुहार के बाद शुरू हुई जांच
शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद मामला स्वास्थ्य विभाग को भेजा गया। इसके बाद गौतमबुद्ध नगर के सीएमओ कार्यालय ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू की। जांच के दौरान अस्पताल की बिलिंग प्रक्रिया के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था और कर्मचारियों के रिकॉर्ड की भी समीक्षा की गई। प्रारंभिक जांच में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए जिनके आधार पर अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल से निर्धारित समय के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है।

डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के पंजीकरण पर उठे सवाल
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अस्पताल में हाल के समय में कई नए डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन उनके संबंध में आवश्यक जानकारी और दस्तावेज सीएमओ कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराए गए। स्वास्थ्य विभाग ने इस पर गंभीर आपत्ति जताई है। अधिकारियों का कहना है कि द क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010 के तहत अस्पतालों के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

यूपी मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण अनिवार्य
जांच में यह भी पाया गया कि कुछ डॉक्टर दिल्ली मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत होने के बावजूद उत्तर प्रदेश में सेवाएं दे रहे थे। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में चिकित्सकीय सेवाएं देने के लिए संबंधित नियमों के अनुसार आवश्यक पंजीकरण होना चाहिए।
इसी प्रकार पैरामेडिकल स्टाफ के रिकॉर्ड और दस्तावेजों को लेकर भी विभाग ने अस्पताल से जवाब मांगा है।

सीएमओ ने जारी किए कड़े निर्देश
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि जिन डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों का आवश्यक पंजीकरण लंबित है, उसे तत्काल पूरा कराया जाए और उससे संबंधित सभी दस्तावेज निर्धारित समय सीमा के भीतर सीएमओ कार्यालय में जमा किए जाएं।
नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि अस्पताल निर्धारित समय के भीतर नियमों का पालन नहीं करता है तो क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, 2010 के तहत नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मरीजों को इलाज के दौरान पूरी पारदर्शिता मिलनी चाहिए। अस्पतालों को भर्ती से पहले संभावित खर्च का स्पष्ट अनुमान देना चाहिए और यदि उपचार के दौरान अतिरिक्त खर्च की आवश्यकता हो तो मरीज या उनके परिजनों को समय रहते इसकी जानकारी देना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट बिलिंग प्रणाली से मरीज और अस्पताल के बीच विश्वास बना रहता है तथा विवाद की स्थिति कम होती है।

स्वास्थ्य विभाग की जनता से अपील
सीएमओ कार्यालय ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी निजी अस्पताल में भर्ती होने से पहले उपचार का लिखित अनुमानित खर्च (Estimated Bill) अवश्य लें। यदि इलाज के दौरान बिना उचित कारण अतिरिक्त राशि वसूली जाती है या किसी प्रकार की अनियमितता दिखाई देती है तो उसकी शिकायत संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों या आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कराई जा सकती है।
विभाग ने यह भी कहा कि शिकायत मिलने पर नियमानुसार जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

निजी अस्पतालों की जवाबदेही पर बढ़ी चर्चा
इस मामले के सामने आने के बाद निजी अस्पतालों की बिलिंग प्रणाली, प्रशासनिक पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन को लेकर फिर से चर्चा तेज हो गई है। मरीजों का कहना है कि इलाज के दौरान खर्च और प्रक्रियाओं की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए ताकि उन्हें बाद में आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

Raftar Today
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