Breaking News : "रामलला को चढ़ाई गई 800 ग्राम सोने से जड़ी रामचरितमानस आखिर कहां गई?," पूर्व गृह सचिव के सनसनीखेज दावे से मचा सियासी और धार्मिक भूचाल, चढ़ावा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल, कुछ महीनों बाद दर्शन करने पहुंचे परिजन तो नहीं मिली रामचरितमानस, नृपेंद्र मिश्र से भी किया संपर्क

अयोध्या, रफ़्तार टूडे। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और श्रद्धालुओं द्वारा भेंट की गई बहुमूल्य वस्तुओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। इस बार मामला इसलिए भी अधिक चर्चा में है क्योंकि आरोप लगाने वाले कोई सामान्य व्यक्ति नहीं, बल्कि भारत सरकार के पूर्व गृह सचिव और मध्य प्रदेश कैडर के 1970 बैच के वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एस. लक्ष्मीनारायण हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनके परिवार द्वारा भगवान रामलला को श्रद्धापूर्वक भेंट की गई करीब 800 ग्राम सोने से जड़ी विशेष रामचरितमानस अब मंदिर परिसर में दिखाई नहीं दे रही है। इस दावे के सामने आने के बाद धार्मिक, प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच पहले से ही पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) के स्तर पर चल रही है। ऐसे में पूर्व गृह सचिव का बयान पूरे घटनाक्रम को नया आयाम देता दिखाई दे रहा है। हालांकि इस मामले में संबंधित पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
रामनवमी पर श्रद्धा के साथ की थी अनमोल भेंट, परिवार की आस्था से जुड़ा था विशेष ग्रंथ
पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायण ने बताया कि उनका परिवार पीढ़ियों से भगवान श्रीराम का अनन्य भक्त रहा है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली रामनवमी, 8 अप्रैल 2024 के अवसर पर उन्होंने अपने परिवार की ओर से एक विशेष स्वर्णजड़ित रामचरितमानस मंदिर में भेंट की थी। उनके अनुसार इस ग्रंथ का वजन लगभग सवा कुंतल था और इसके आवरण सहित कई हिस्सों पर करीब 800 ग्राम सोने का उपयोग किया गया था।
उन्होंने बताया कि इस पवित्र ग्रंथ को अयोध्या प्रशासन के सहयोग से मंदिर परिसर तक पहुंचाया गया था और श्रद्धापूर्वक भगवान रामलला को समर्पित किया गया। उनके अनुसार यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि परिवार की वर्षों पुरानी आस्था और भावनाओं का प्रतीक था।

कुछ महीनों बाद दर्शन करने पहुंचे परिजन तो नहीं मिली रामचरितमानस
एस. लक्ष्मीनारायण के अनुसार, कुछ समय बाद जब उनके परिवार के सदस्य दर्शन करने मंदिर पहुंचे तो उन्हें वह विशेष रामचरितमानस दिखाई नहीं दी। इसके बाद परिवार ने मंदिर प्रशासन से जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन उन्हें स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इसके बाद वह स्वयं अयोध्या पहुंचे और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया। उन्होंने कई बार यह जानने का प्रयास किया कि आखिर उनके परिवार द्वारा भेंट किया गया यह बहुमूल्य धार्मिक ग्रंथ कहां रखा गया है, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जानकारी नहीं मिल सकी।
ट्रस्ट पदाधिकारियों से कई बार संपर्क, समाधान नहीं मिलने का आरोप
पूर्व गृह सचिव का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से कई बार मुलाकात की। उन्होंने पत्र, संदेश और अन्य माध्यमों से भी अपनी बात रखी, लेकिन अब तक उन्हें ऐसा कोई उत्तर नहीं मिला जिससे उनकी शंका दूर हो सके।
उन्होंने यह भी बताया कि इस रामचरितमानस के निर्माण में उनकी माता के आभूषणों का सोना भी लगाया गया था। इसलिए यह केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से भी उनके परिवार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
‘रसीद भी नहीं मिली’—पूर्व गृह सचिव का एक और दावा
एस. लक्ष्मीनारायण ने एक और महत्वपूर्ण दावा करते हुए कहा कि जब उन्होंने यह भेंट भगवान रामलला को समर्पित की थी, तब उन्होंने किसी प्रकार की रसीद नहीं मांगी क्योंकि इसे उन्होंने अपनी श्रद्धा का विषय माना था।
हालांकि बाद में जब उन्होंने इस संबंध में जानकारी जुटाने का प्रयास किया तो उन्हें इस भेंट का कोई आधिकारिक प्राप्ति-पत्र भी उपलब्ध नहीं कराया गया। उनका कहना है कि यदि रसीद या रिकॉर्ड उपलब्ध होता तो आज इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
नृपेंद्र मिश्र से भी किया संपर्क
पूर्व गृह सचिव के अनुसार उन्होंने राम मंदिर निर्माण कार्य से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी नृपेंद्र मिश्र से भी इस विषय पर संपर्क किया था। उन्होंने बताया कि उन्हें आश्वासन तो मिला, लेकिन उनकी भेंट की गई रामचरितमानस के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी या समाधान सामने नहीं आया।
पहले से चल रही जांच के बीच बढ़ी संवेदनशीलता
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामलों की जांच पहले से पुलिस और एसआईटी कर रही है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस प्रकरण में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा चुकी है। ऐसे में पूर्व गृह सचिव के आरोपों ने इस पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। हालांकि यह स्पष्ट करना भी आवश्यक है कि उनके आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी संबंधित जांच एजेंसियों या ट्रस्ट की ओर से नहीं की गई है।
राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज
इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी शुरू हो गई हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि श्रद्धापूर्वक भेंट की गई स्वर्णजड़ित रामचरितमानस वास्तव में गायब है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक हलकों में भी बहस तेज हो गई है।
ट्रस्ट की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार किया जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और पूर्व गृह सचिव द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्ष क्या स्पष्टीकरण देता है। यदि यह मामला जांच में सही पाया जाता है तो यह केवल एक बहुमूल्य धार्मिक भेंट का प्रश्न नहीं रहेगा, बल्कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली बहुमूल्य वस्तुओं के संरक्षण, अभिलेखीकरण और पारदर्शिता से जुड़े व्यापक सवाल भी खड़े करेगा। वहीं यदि आरोप असत्य सिद्ध होते हैं तो जांच से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।



