Trading NewsNTPCगौतमबुद्ध नगरताजातरीनसोसाइटी

Breaking News : “मीटर में डाला बिजली का पैसा… और कट गया मेंटेनेंस!” अब नहीं चलेगी बिल्डरों की मनमानी, नोएडा-ग्रेटर नोएडा में प्री-पेड मीटर से कटौती पर बड़ी रोक, 250 से ज्यादा और सोसाइटी फ्लैट खरीदारों को मिली बड़ी राहत, PVVNL का सख्त आदेश, ‘मेंटेनेंस नहीं दिया तो बिजली काटेंगे’ वाला खेल खत्म, अब AOA और बिल्डरों पर होगी कार्रवाई

नोएडा/ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की हाईराइज सोसायटियों में रहने वाले हजारों फ्लैट मालिकों और निवासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से प्री-पेड बिजली मीटर के जरिए मेंटेनेंस चार्ज वसूली को लेकर चल रही शिकायतों के बाद अब पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। निगम ने साफ शब्दों में निर्देश जारी कर दिए हैं कि अब कोई भी बिल्डर, मेंटेनेंस एजेंसी या अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) प्री-पेड बिजली मीटर से मेंटेनेंस चार्ज नहीं काट सकेगा। यदि किसी सोसायटी में ऐसा पाया गया तो संबंधित AOA और बिल्डर के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस फैसले के बाद उन हजारों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो वर्षों से “मेंटेनेंस दो वरना बिजली बंद” जैसी स्थिति का सामना कर रहे थे। कई सोसायटियों में प्री-पेड मीटर में डाले गए बैलेंस से चुपचाप मेंटेनेंस चार्ज काट लिया जाता था, जिससे अचानक बिजली सप्लाई ठप हो जाती थी और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

“बिजली का पैसा डाला था, मेंटेनेंस में कट गया” — निवासियों की बढ़ती शिकायतों के बाद कार्रवाई
नोएडा और ग्रेटर नोएडा की कई ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में पिछले लंबे समय से यह शिकायत मिल रही थी कि यदि किसी निवासी ने समय पर मेंटेनेंस शुल्क जमा नहीं किया, तो AOA या बिल्डर प्री-पेड मीटर से सीधे राशि काट लेते थे। इससे बिजली का बैलेंस खत्म हो जाता था और फ्लैट की बिजली अचानक बंद हो जाती थी। सबसे ज्यादा परेशानी रात के समय होती थी। लोग ऑफिस से लौटते तो घर अंधेरे में मिलता। बुजुर्ग, छोटे बच्चे और मरीज गर्मी में परेशान होते थे। कई परिवारों का आरोप था कि बिना सूचना दिए ही बिजली काट दी जाती थी।
अब पीवीवीएनएल ने इस पूरी व्यवस्था को उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए स्पष्ट कर दिया है कि बिजली और मेंटेनेंस दो अलग-अलग सेवाएं हैं और दोनों का हिसाब भी अलग ही रखा जाएगा।

250 से ज्यादा सोसायटियों पर पड़ेगा सीधा असर
इस फैसले का असर नोएडा और ग्रेटर नोएडा की सैकड़ों सोसायटियों पर पड़ेगा। जानकारी के अनुसार—
नोएडा में लगभग 125 ग्रुप हाउसिंग सोसायटियां हैं
ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में 250 से अधिक सोसायटियां मौजूद हैं ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में बिजली सप्लाई करने वाली निजी कंपनी NPCL को भी इन निर्देशों का पालन करना होगा। अब सभी AOA और बिल्डरों को मेंटेनेंस शुल्क वसूलने के लिए अलग भुगतान प्रणाली बनानी पड़ेगी।

UPERC सप्लाई कोड के तहत जारी हुआ आदेश
पीवीवीएनएल ने यह आदेश UPERC Supply Code 2023-24 के प्रावधानों के तहत जारी किया है। बिजली विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्री-पेड मीटर का उपयोग केवल बिजली सेवाओं के लिए किया जा सकता है। इसमें—बिजली खपत, कॉमन एरिया बिजली, लिफ्ट संचालन, वाटर पंप स्ट्रीट लाइट अन्य विद्युत सेवाएं शामिल होंगी। लेकिन किसी भी हालत में इसका उपयोग मेंटेनेंस चार्ज वसूलने के लिए नहीं किया जा सकता।

एल्डिको आमंत्रण सोसायटी की शिकायत बनी बड़ी कार्रवाई की वजह
इस पूरे मामले ने तब जोर पकड़ा जब सेक्टर-119 स्थित एल्डिको आमंत्रण सोसायटी के निवासी तनिश मल्होत्रा ने इसकी औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मेंटेनेंस शुल्क बकाया होने के कारण बिजली सप्लाई बाधित की जा रही है और प्री-पेड मीटर से राशि काटी जा रही है।
मामला विद्युत नियामक आयोग तक पहुंचा। जांच के दौरान यह पाया गया कि प्री-पेड मीटर का उपयोग मेंटेनेंस वसूली के लिए करना नियमों के खिलाफ है। इसके बाद आयोग के निर्देश पर पीवीवीएनएल ने सख्त आदेश जारी कर दिए।
कार्यकारी अभियंता, विद्युत नगरीय वितरण खंड-5 की ओर से जारी पत्र संख्या 335 में साफ कहा गया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर यूपीईआरसी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।

अब मेंटेनेंस न देने पर नहीं कटेगी बिजली
इस आदेश के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि अब किसी भी निवासी की बिजली केवल इसलिए नहीं काटी जा सकेगी क्योंकि उसने मेंटेनेंस शुल्क जमा नहीं किया है।
बिजली डिस्कनेक्शन अब केवल उसी स्थिति में संभव होगा जब—बिजली बिल बकाया हो, बिजली चोरी या तकनीकी उल्लंघन हो
AOA और बिल्डरों को अब मेंटेनेंस शुल्क के लिए अलग माध्यम अपनाने होंगे, जैसे—ऑनलाइन पेमेंट, बैंक ट्रांसफर
चेक, डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म इससे बिजली व्यवस्था और मेंटेनेंस प्रबंधन दोनों में पारदर्शिता बढ़ेगी।

सोसायटियों में लंबे समय से चल रहा था विवाद
नोएडा-ग्रेटर नोएडा की कई सोसायटियों में बिजली और मेंटेनेंस शुल्क को लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। निवासी संगठनों का कहना था कि AOA और बिल्डर बिजली को “दबाव बनाने के हथियार” की तरह इस्तेमाल कर रहे थे।
कई मामलों में तो लोगों को घंटों और कई बार दिनों तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर भी ऐसी शिकायतें लगातार वायरल होती रही हैं।
अब नए आदेश के बाद माना जा रहा है कि— निवासी और AOA के बीच विवाद कम होंगे
बिजली व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी
उपभोक्ता अधिकारों को मजबूती मिलेगी


फ्लैट मालिकों ने फैसले का किया स्वागत

निवासियों और RWA संगठनों ने पीवीवीएनएल के इस फैसले का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि यह फैसला “हाईराइज सोसायटियों में रहने वाले मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी राहत” है।
कई लोगों ने इसे “ऐतिहासिक निर्णय” बताते हुए कहा कि अब बिजली जैसी जरूरी सेवा को मेंटेनेंस विवाद से अलग रखना जरूरी था।

अब क्या होगा आगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में—
कई सोसायटियों को अपनी बिलिंग प्रणाली बदलनी पड़ेगी
AOA के वित्तीय मॉडल में बदलाव आएगा
डिजिटल मेंटेनेंस कलेक्शन सिस्टम को बढ़ावा मिलेगा
साथ ही यह फैसला देश के अन्य शहरों की सोसायटियों के लिए भी मिसाल बन सकता है।

रफ़्तार टूडे की न्यूज
Raftar Today
Raftar Today

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button