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DM Breaking News : “ऑफिस की कुर्सी से शूटिंग रेंज तक”, गौतमबुद्धनगर की डीएम मेधा रूपम के अनोखे अंदाज ने इंटरनेट पर मचाई हलचल, पुराने गोल्ड मेडल वाले दिनों की यादें हुईं ताजा, 20 साल पुरानी यादें फिर हुईं ताजा, प्रशासन में सख्त, खेल में सटीक निशानेबाज

नोएडा, रफ़्तार टूडे। गौतमबुद्धनगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार चर्चा का कारण कोई प्रशासनिक फैसला, निरीक्षण अभियान या सरकारी बैठक नहीं है। इस बार उनकी लोकप्रियता का केंद्र बना है उनका एक अलग और प्रेरणादायक रूप, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। फाइलों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच व्यस्त रहने वाली डीएम मेधा रूपम का यह नया अंदाज लोगों को खूब पसंद आ रहा है। हाल ही में डीएम मेधा रूपम ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह एयर पिस्टल के साथ निशाना साधती हुई दिखाई दे रही हैं। तस्वीर सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया। कई लोगों ने इसे प्रेरणादायक बताया तो कुछ ने उनकी खेल प्रतिभा और बहुआयामी व्यक्तित्व की जमकर सराहना की। देखते ही देखते यह तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई।

स्कूल के दिनों से ही शूटिंग से रहा गहरा लगाव
बहुत कम लोग जानते हैं कि मेधा रूपम का शूटिंग से जुड़ाव कोई नया नहीं है। उनका यह सफर लगभग दो दशक पुराना है। स्कूली दिनों में ही उन्होंने एयर राइफल शूटिंग में रुचि दिखाई थी और धीरे-धीरे इस खेल में अपनी विशेष पहचान बनाई। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने शूटिंग में भी लगातार मेहनत की और कई प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया। केरल में अपनी शिक्षा के दौरान उन्होंने राज्य स्तरीय शूटिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और बेहतरीन उपलब्धियां हासिल कीं। वर्ष 2008 में जब वह 12वीं कक्षा की छात्रा थीं, तब उन्होंने केरल राज्य की शूटिंग टीम का प्रतिनिधित्व किया। 10 मीटर एयर राइफल प्रतियोगिता में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए नया रिकॉर्ड स्थापित किया था। इतना ही नहीं, केरल स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।

20 साल पुरानी यादें फिर हुईं ताजा
इंस्टाग्राम पर साझा की गई तस्वीर के साथ मेधा रूपम ने एक भावनात्मक संदेश भी लिखा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006-07 में एयर राइफल के साथ शुरू हुआ उनका सफर अब 2026 में एयर पिस्टल तक पहुंच चुका है और यह रोमांचक यात्रा लगातार जारी है।
उनका यह संदेश केवल एक तस्वीर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों के लिए प्रेरणा का माध्यम भी बन गया। यह संदेश बताता है कि जीवन में किसी भी जुनून को कभी छोड़ा नहीं जाना चाहिए। यदि व्यक्ति के अंदर लगन और समर्पण हो तो वर्षों बाद भी अपने शौक और प्रतिभा को नई ऊर्जा के साथ जिया जा सकता है।

प्रशासन में सख्त, खेल में सटीक निशानेबाज
उत्तर प्रदेश कैडर की 2014 बैच की आईएएस अधिकारी मेधा रूपम को एक तेज-तर्रार और सख्त प्रशासक के रूप में जाना जाता है। गौतमबुद्धनगर की जिलाधिकारी के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में प्रभावी भूमिका निभाई है। हाल के दिनों में श्रमिक आंदोलन के दौरान मौके पर पहुंचकर जिस तरह उन्होंने स्थिति को नियंत्रित किया था, उसकी भी व्यापक चर्चा हुई थी।
उनकी कार्यशैली को लेकर आम लोगों और प्रशासनिक हलकों में सकारात्मक छवि बनी हुई है। अब उनका यह खेल प्रेम और शूटिंग के प्रति लगाव उनके व्यक्तित्व का एक और मजबूत पक्ष सामने लेकर आया है।

आईएएस परिवार से संबंध, बचपन से मिली अनुशासन की सीख
मेधा रूपम का जन्म 21 अक्टूबर को आगरा में हुआ था। उनके पिता ज्ञानेश कुमार गुप्ता 1988 बैच के केरल कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे हैं और देश के मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। शुरुआती वर्षों के बाद उनका परिवार केरल चला गया, जहां मेधा रूपम की स्कूली शिक्षा पूरी हुई। यहीं से उनके भीतर खेल और शिक्षा दोनों के प्रति समान रुचि विकसित हुई। शूटिंग में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा को अपना लक्ष्य बनाया और अपनी मेहनत के दम पर भारतीय प्रशासनिक सेवा में स्थान प्राप्त किया।

सोशल मीडिया पर लोगों ने की जमकर तारीफ
डीएम मेधा रूपम की यह तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी जमकर प्रशंसा की। कई यूजर्स ने लिखा कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ अपने जुनून को जीवित रखना युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। कुछ लोगों ने उन्हें “आयरन लेडी विद गोल्डन एम” तो कुछ ने “लेडी शार्प शूटर डीएम” की उपाधि भी दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों का इस प्रकार अपने सकारात्मक शौक और उपलब्धियों को साझा करना समाज के युवाओं को प्रेरित करता है और उन्हें यह संदेश देता है कि सफलता के साथ-साथ अपने जुनून को भी जीवित रखा जा सकता है।

काम में प्रशासनिक सटीकता, खेल में परफेक्ट निशाना
गौतमबुद्धनगर की डीएम मेधा रूपम का यह नया अंदाज इस बात का प्रमाण है कि जीवन में बहुआयामी व्यक्तित्व ही वास्तविक सफलता की पहचान होता है। प्रशासनिक दायित्वों के बीच खेल के प्रति उनका समर्पण यह दर्शाता है कि मेहनत, अनुशासन और जुनून किसी भी क्षेत्र में व्यक्ति को अलग पहचान दिला सकते हैं। आज सोशल मीडिया पर छाई यह तस्वीर केवल एक फोटो नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि सपने और शौक कभी पुराने नहीं होते, बस उन्हें फिर से जीने का साहस होना चाहिए।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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