Noida Authority News : किसानों का धैर्य टूटा, प्राधिकरण के खिलाफ फूटा गुस्सा 81 गांवों के किसानों ने खोला मोर्चा, नोएडा प्राधिकरण में घुसने की कोशिश, अनिश्चितकालीन धरना शुरू, महिलाएं भी बड़ी संख्या में उतरीं सड़कों पर, किसानों ने बताया, “हमारी ज़मीन ली, वादे भूले गए”, “अब नहीं सहेंगे वादे और धोखा” – गूंजा किसानों का हुंकार

नोएडा, रफ़्तार टुडे। लंबे इंतज़ार और बार-बार वादाखिलाफी से अब किसानों का सब्र जवाब दे चुका है। नोएडा प्राधिकरण द्वारा वर्षों से अधिग्रहित जमीनों का मुआवजा, आबादी भूमि निस्तारण और प्लॉट आवंटन जैसे वादे पूरे न होने से गुस्साए 81 गांवों के किसानों ने बुधवार को नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर ज़बरदस्त प्रदर्शन किया।
इस दौरान किसान मंच के बैनर तले हजारों किसान, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर नारेबाजी करते हुए प्राधिकरण कार्यालय की ओर बढ़े। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब भीड़ ने प्राधिकरण परिसर में घुसने का प्रयास किया, जिसे पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोक दिया।
“अब नहीं सहेंगे वादे और धोखा” – गूंजा किसानों का हुंकार
किसानों का कहना है कि वर्षों से वे अपने अधिकारों के लिए लगातार आंदोलन, ज्ञापन और बैठकें कर चुके हैं, लेकिन प्राधिकरण और शासन की ओर से सिर्फ आश्वासन ही मिले, कार्रवाई नहीं। आक्रोशित किसानों ने कहा कि अब वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। “जब तक मुआवजा, प्लॉट और रोजगार नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा,” यह नारा पूरे धरनास्थल पर गूंजता रहा।
भारतीय किसान मंच के नेतृत्व में हुए इस विरोध में दर्जनों गांवों के प्रधान, किसान नेता और महिलाएं भी शामिल हुईं।
धरने में थाप्पा, गढ़ी चौखण्डी, मामूरा, सोरखा, सलारपुर, गिझौड़, बिसरख, छपरौला, बरौला, सर्फाबाद, झुंझुनू, पल्ला, दनकौर समेत 81 गांवों के किसान मौजूद रहे।
किसानों ने बताया, “हमारी ज़मीन ली, वादे भूले गए”
धरने में किसानों ने मंच से कहा कि “हमारी जमीनें विकास के नाम पर ले ली गईं, लेकिन बदले में जो वादे किए गए थे – वे सब अधूरे रह गए।” किसानों के मुताबिक, जब जमीन अधिग्रहित की गई थी, तब 64 प्रतिशत बढ़ा हुआ मुआवजा, प्रभावित परिवारों को स्थायी रोजगार और 10% आबादी प्लॉट देने की बात कही गई थी। लेकिन आज वर्षों बीत जाने के बाद भी न तो मुआवजा मिला, न प्लॉट, न ही रोजगार।
किसान महेंद्र भाटी कुमार ने कहा कि “सरकार और प्राधिकरण की बैठकों में बस फाइलें घूमती रहती हैं। अधिकारी आते हैं, वादे करते हैं, फिर सब भूल जाते हैं। अब हम सिर्फ बातों से नहीं, हक लेकर जाएंगे।”
भारी पुलिस बल की तैनाती, प्राधिकरण परिसर में मचा हड़कंप
किसानों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए प्राधिकरण कार्यालय पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई। एसपी (सिटी) और सीओ स्तर के अधिकारी मौके पर पहुंचे।
प्रशासन ने बैरिकेडिंग लगाकर किसानों को मुख्य भवन में घुसने से रोक दिया। हालांकि इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच कुछ समय के लिए धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाल लिया।
धरनास्थल पर पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
महिलाओं और बुजुर्ग किसानों के बैठने के लिए अलग स्थान बनाया गया, जबकि युवाओं को शांति बनाए रखने की अपील की गई।
“धरना अनिश्चितकाल तक चलेगा”
किसानों ने ऐलान किया कि यह आंदोलन अब कोई एक-दो दिन का प्रदर्शन नहीं, बल्कि अनिश्चितकालीन धरना होगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी सभी मांगें –
1. 64% बढ़े हुए मुआवजे का भुगतान,
2. आबादी भूमि का निस्तारण,
3. 10% आबादी प्लॉट का आवंटन,
4. प्रभावित परिवारों को स्थायी रोजगार – पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरना स्थल पर दिन-रात किसानों का जमावड़ा लग रहा है। कई गांवों से किसान भोजन, पानी और तंबू लेकर पहुंचे हैं ताकि लंबे समय तक आंदोलन जारी रखा जा सके।
प्राधिकरण बोला – “मांगों पर विचार जारी है”
नोएडा प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि किसानों की अधिकांश मांगें “विचाराधीन” हैं।
उन्होंने कहा “प्राधिकरण किसानों के साथ बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है। लेकिन कुछ मुद्दे शासन स्तर पर लंबित हैं, जिन पर निर्णय आने में समय लगेगा।”
हालांकि किसानों ने इस बयान को “औपचारिक बहाना” बताते हुए अस्वीकार कर दिया।
किसान नेताओं का कहना है कि हर बार यही कहा जाता है कि विचार चल रहा है, लेकिन सालों गुजर गए, कुछ नहीं हुआ।
महिला किसानों की भी बड़ी भागीदारी
इस बार धरने की खास बात यह रही कि महिलाएं बड़ी संख्या में सड़क पर उतरीं। उन्होंने नारों में अपनी आवाज़ जोड़ी और कहा कि “अब हम घर में नहीं बैठेंगे, जब तक हमारे पति-पुत्रों का हक नहीं मिलेगा।”
महिला किसान सुनीता देवी ने कहा “हमने अपनी जमीन दी ताकि हमारे बच्चों का भविष्य बने, लेकिन आज हम खुद अपने हक के लिए दर-दर भटक रहे हैं।”
किसान संगठनों का एकजुट समर्थन
धरने को भारतीय किसान मंच के साथ-साथ भारतीय किसान यूनियन (भानू), राष्ट्रीय किसान सभा, किसान एकता मंच और ग्रेटर नोएडा किसान संघ जैसे कई संगठनों का समर्थन प्राप्त हुआ है। इन संगठनों ने कहा कि अगर प्रशासन ने जल्द किसानों की मांगें नहीं मानीं, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा और नोएडा से लेकर लखनऊ तक मार्च किया जाएगा।
विकास की कीमत पर किसानों का संघर्ष जारी
नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे विकसित हो रहे इलाकों में किसानों की नाराज़गी अब सिर्फ आवाज़ नहीं, बल्कि एक चेतावनी बन चुकी है।
सरकार और प्राधिकरण को अब यह समझना होगा कि विकास तभी सार्थक होगा, जब उसमें किसानों की खुशहाली और न्याय भी शामिल हो। फिलहाल, नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर किसानों का आंदोलन तेज़ी से राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बनता जा रहा है।



