Corruption Free India News : यमुना प्राधिकरण में भ्रष्टाचार के खिलाफ "अगस्त क्रांति" पर हल्ला बोल, करप्शन फ्री इंडिया संगठन का जोरदार प्रदर्शन, किसानों के मुद्दे सबसे अहम, रिश्वतखोरी और पारदर्शिता पर सवाल

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
यमुना प्राधिकरण में बढ़ते भ्रष्टाचार और लापरवाह रवैये के खिलाफ करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने “अगस्त क्रांति” के अवसर पर जोरदार हल्ला बोल प्रदर्शन किया। संगठन के कोर कमेटी के प्रमुख सदस्य मास्टर दिनेश नागर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे और ओएसडी अजय शर्मा को ज्ञापन सौंपा।
भ्रष्टाचार किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र होगा।”
प्रदर्शन का उद्देश्य
करप्शन फ्री इंडिया संगठन के संस्थापक चौधरी प्रवीण भारतीय और प्रेम प्रधान ने कहा कि यमुना प्राधिकरण का मकसद स्थानीय लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना था।
आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक और चिकित्सा सुविधाएँ बढ़ाना इस प्राधिकरण का मूल उद्देश्य था।
लेकिन, भ्रष्टाचार और अधिकारियों की मनमानी के कारण यह सपना चकनाचूर हो गया।
विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण द्वारा किए जा रहे ज्यादातर निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- टेंडरों में ब्लैक मनी और कमीशनखोरी का बोलबाला है।
- ठेकेदार केवल लाभ कमाने के लिए घटिया स्तर का निर्माण कर रहे हैं।
- कई योजनाएँ कागजों में ही सीमित रह गई हैं।
किसानों के मुद्दे सबसे अहम
प्रदर्शन में किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया।
- किसानों को अब तक 64% मुआवजा और 10% प्लॉट नहीं मिले।
- यमुना एक्सप्रेस-वे से जुड़े गाँवों के किसानों से टोल टैक्स वसूला जा रहा है, जो सीधा शोषण है।
- सरकार और प्राधिकरण की लापरवाही के कारण किसान लगातार परेशान हैं।
रिश्वतखोरी और पारदर्शिता पर सवाल
संगठन ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण के दफ्तर में
- लीज पास कराने के लिए ₹100/वर्गमीटर
- टीएम (Transfer Memorandum) के लिए ₹200/वर्गमीटर
की रिश्वत माँगी जाती है।
साथ ही,
- आरटीआई का जवाब नहीं दिया जाता।
- दफ्तर में जन सूचना अधिकारी और अपील अधिकारी का बोर्ड नहीं है।
- मुख्य सतर्कता अधिकारी का नाम, फोन नंबर और पता प्रदर्शित नहीं किया गया है।
- सिटीजन चार्टर तक नहीं लगाया गया है।
इन खामियों ने यह साबित कर दिया है कि प्राधिकरण में दलालों और भ्रष्टाचारियों का दबदबा है।
संगठन की मांगें
करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से यह मांगें रखीं—
- यमुना प्राधिकरण में चल रहे सभी निर्माण कार्यों की स्वतंत्र जांच हो।
- किसानों को तुरंत 64% मुआवजा और 10% प्लॉट दिए जाएं।
- टोल टैक्स से स्थानीय किसानों को छूट मिले।
- रिश्वतखोरी पर अंकुश लगाते हुए पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए।
- भ्रष्ट अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो।
- प्राधिकरण कार्यालय में RTI और Citizen Charter के बोर्ड तुरंत लगाए जाएं।
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख लोग
इस हल्ला बोल प्रदर्शन में बड़ी संख्या में संगठन के सदस्य और किसान मौजूद रहे।
इनमें प्रमुख थे –
- चौधरी प्रेमराज भाटी
- मास्टर दिनेश नागर
- डॉ. दीपक शर्मा
- प्रेम प्रधान
- कुलवीर भाटी
- राकेश नागर
- हरीश भाटी
- सुशील प्रधान
- यतेंद्र नागर
- बालेश्वर नागर
- लखमी पंडित
- धीरज नागर
- नीरज भाटी
- कमल नागर
- ब्रह्म प्रधान
- अभिषेक नागर
- जितेंद्र, नरेश भाटी, सुनील, हरेंद्र, तीमराज नागर
- विजय प्रधान, मोहित अधाना, पवन यादव, राम नागर
इन सबकी एकजुटता ने प्राधिकरण प्रशासन को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
आंदोलनकारियों का संदेश
संगठन के नेताओं ने स्पष्ट कहा –
“हम क्षेत्र के किसानों और आम जनता के अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। भ्रष्टाचार किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र होगा।”
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