“दिमाग की सर्जरी में ग्रेटर नोएडा ने रचा इतिहास!, कांपते हाथों को मिला कंट्रोल—शारदा केयर ने पहली बार DBS से लिखी नई मेडिकल कहानी”, “त्वचा के नीचे फिट होगा ‘ब्रेन कंट्रोल डिवाइस’—रिमोट से चलेगा इलाज”, “ग्रेटर नोएडा बनेगा न्यूरोसर्जरी का नया हब!”

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा के हेल्थ सेक्टर में एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है, जिसने पूरे क्षेत्र को मेडिकल मैप पर एक नई पहचान दिला दी है। शारदा हेल्थ केयर सिटी ने पहली बार डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) जैसी अत्याधुनिक और जटिल न्यूरोसर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर यह साबित कर दिया है कि अब हाई-टेक इलाज सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं रहा।
इस सर्जरी को वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. रविंद्र श्रीवास्तव के नेतृत्व में अंजाम दिया गया, जो पार्किंसंस रोग से जूझ रहे एक मरीज के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है।
“क्या है DBS सर्जरी? जब दिमाग के ‘सर्किट’ को रीसेट करता है विज्ञान”
डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) कोई साधारण सर्जरी नहीं, बल्कि न्यूरोसाइंस और टेक्नोलॉजी का एक बेहतरीन संगम है। इस प्रक्रिया में मस्तिष्क के एक विशेष हिस्से सबथैलेमिक न्यूक्लियस में बेहद सूक्ष्म इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं। ये इलेक्ट्रोड दिमाग की असामान्य इलेक्ट्रिकल गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं, जिससे मरीज को कंपकंपी (Tremors), मांसपेशियों की अकड़न और धीमी गति जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
यह पूरी प्रक्रिया हाई-एंड इमेजिंग, रियल-टाइम न्यूरोफिजियोलॉजिकल मॉनिटरिंग और माइक्रो-प्रिसिशन टेक्निक के जरिए की जाती है, जिससे सर्जरी की सटीकता और सफलता दर काफी बढ़ जाती है।
“त्वचा के नीचे फिट होगा ‘ब्रेन कंट्रोल डिवाइस’—रिमोट से चलेगा इलाज”
इस सर्जरी का सबसे खास पहलू है इसका इम्प्लांटेबल पल्स जनरेटर। सर्जरी के दौरान लगाए गए इलेक्ट्रोड को एक छोटे डिवाइस से जोड़ा जाता है
यह डिवाइस शरीर की त्वचा के नीचे प्रत्यारोपित किया जाता है
यह लगातार इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजकर दिमाग की गतिविधियों को नियंत्रित करता है
दिलचस्प बात यह है कि इस डिवाइस को बाद में डॉक्टर जरूरत के अनुसार प्रोग्राम भी कर सकते हैं, जिससे मरीज को लंबे समय तक राहत मिलती है।
“महानगरों का मोनोपॉली खत्म—अब ग्रेटर नोएडा में मिलेगा हाई-एंड इलाज”
अब तक ऐसी जटिल सर्जरी के लिए मरीजों को दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन शारदा हेल्थ केयर सिटी की इस सफलता ने यह बाधा तोड़ दी है। अब: स्थानीय मरीजों को बाहर जाने की जरूरत नहीं
समय और पैसे दोनों की बचत
तुरंत और सुलभ इलाज की सुविधा
यह उपलब्धि क्षेत्रीय हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।
“सिर्फ पार्किंसंस ही नहीं—कई न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का समाधान”
विशेषज्ञों के अनुसार DBS तकनीक सिर्फ पार्किंसंस तक सीमित नहीं है। यह कई अन्य जटिल बीमारियों में भी कारगर साबित हो रही है, जैसे: डिस्टोनिया
एसेंशियल ट्रेमर
कुछ मानसिक और मूवमेंट डिसऑर्डर
खासतौर पर उन मरीजों के लिए यह तकनीक वरदान है, जिन पर दवाओं का असर सीमित हो चुका होता है।
“डॉक्टर बोले—यह सिर्फ सर्जरी नहीं, क्षेत्र की मेडिकल क्षमता का प्रमाण”
डॉ. रविंद्र श्रीवास्तव ने इस उपलब्धि को लेकर कहा कि इस स्तर की जटिल सर्जरी का स्थानीय स्तर पर सफल होना अस्पताल की उन्नत तकनीक, विशेषज्ञता और समर्पित टीमवर्क का परिणाम है। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले समय में और भी एडवांस न्यूरोसर्जिकल प्रक्रियाएं यहां शुरू की जाएंगी, जिससे मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज मिल सके।
“ग्रेटर नोएडा बनेगा न्यूरोसर्जरी का नया हब!”
इस सफलता के बाद यह साफ हो गया है कि ग्रेटर नोएडा अब सिर्फ इंडस्ट्रियल या एजुकेशन हब ही नहीं, बल्कि हेल्थकेयर के क्षेत्र में भी तेजी से उभर रहा है।
शारदा हेल्थ केयर सिटी की यह उपलब्धि आने वाले समय में और निवेश आकर्षित करेगी
मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देगी
क्षेत्र को सुपर स्पेशियलिटी हेल्थ हब बनाएगी
“उम्मीद की नई धड़कन—अब दिमागी बीमारियों का इलाज ‘पास’ में”
ग्रेटर नोएडा में पहली बार DBS सर्जरी का सफल होना सिर्फ एक मेडिकल उपलब्धि नहीं, बल्कि हजारों मरीजों के लिए नई उम्मीद का प्रतीक है। अब कांपते हाथ, धीमी चाल और असहाय जिंदगी से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत का रास्ता उनके अपने शहर में ही खुल चुका है।



