शिक्षाग्रेटर नोएडा

GIMS College News : “आइडिया से इम्पैक्ट तक!”, GIMS के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य समापन, 150+ शोध पत्रों ने दिखाई ‘सस्टेनेबल फ्यूचर’ की राह, ग्लोबल पार्टनरशिप के साथ ज्ञान का महाकुंभ, 10 प्रमुख विषयों पर गहन मंथन—भविष्य की दिशा तय

International Conference in GIMS concludes with Great ideas, 150+ research papers show the path to a ‘Sustainable Future’

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा स्थित GNIOT Institute of Management Studies (GIMS) में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य समापन हुआ, जिसने शिक्षा, शोध और वैश्विक सहयोग का एक नया मानक स्थापित किया। “व्यवसाय और शासन में रूपांतरण द्वारा सतत एवं समावेशी विकास” थीम पर आधारित इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधार्थियों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लेकर विचारों का समृद्ध आदान-प्रदान किया।

ग्लोबल पार्टनरशिप के साथ ज्ञान का महाकुंभ

यह सम्मेलन Russian State Social University के सहयोग से आयोजित किया गया, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय आयाम मिला। हाइब्रिड (ऑनलाइन + ऑफलाइन) मोड में आयोजित इस कार्यक्रम में दुनिया के विभिन्न हिस्सों से प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की।
दो दिनों के दौरान 150 से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिन्होंने सतत विकास, समावेशी वृद्धि और आधुनिक व्यावसायिक चुनौतियों के विभिन्न पहलुओं को गहराई से उजागर किया।

मुख्य अतिथियों और वक्ताओं ने दिए दूरदर्शी विचार

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. (डॉ.) अरविंद कुमार (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉ. त्सारितोवा क्रिस्टीना गेरासिमोव्ना और डॉ. आकांक्षा मिश्रा ने मुख्य वक्ता के रूप में समकालीन व्यापारिक परिदृश्य, नवाचार और सतत विकास की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।

10 प्रमुख विषयों पर गहन मंथन—भविष्य की दिशा तय

सम्मेलन में कुल 10 अहम विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें शामिल रहे फिनटेक और वित्तीय नवाचार
मानव संसाधन एवं डेटा एनालिटिक्स
मार्केटिंग और उपभोक्ता व्यवहार
अंतरराष्ट्रीय व्यापार
सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स
डिजिटल गवर्नेंस
पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन
प्रबंधन शिक्षा
रणनीतिक नेतृत्व
सस्टेनेबिलिटी और क्लाइमेट एक्शन
इन विषयों पर प्रस्तुत शोध पत्रों ने यह स्पष्ट किया कि आने वाला समय टेक्नोलॉजी, नीति और प्रबंधन के बेहतर समन्वय पर आधारित होगा।

शोधार्थियों को मिला वैश्विक मंच और मार्गदर्श

देश के विभिन्न केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्रोफेसरों ने सत्र अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन से युवा शोधार्थियों को अपने रिसर्च को और बेहतर बनाने तथा नए दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर मिला। द्विस्तरीय अंध समीक्षा (Double Blind Review) प्रक्रिया के बाद चयनित शोध पत्रों को अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित किया जाएगा, जिससे प्रतिभागियों को वैश्विक पहचान मिलेगी।

संस्थान की भूमिका—नेतृत्व और नवाचार का संगम

इस सम्मेलन का आयोजन स्वदेश कुमार सिंह के नेतृत्व में किया गया, जबकि प्रो. (डॉ.) भूपेंद्र कुमार सोम और प्रो. (डॉ.) रुचि रायत के मार्गदर्शन ने इसे सफल बनाने में अहम योगदान दिया। संयोजक डॉ. अंशुल अग्रवाल और डॉ. प्रियांक कुलश्रेष्ठ ने प्रतिभागियों के योगदान की सराहना करते हुए इसे अंतःविषयक शोध सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

पूर्व-सम्मेलन कार्यशाला—शोध कौशल को मिली धार

सम्मेलन से पहले आयोजित कार्यशाला में शोधार्थियों को उन्नत शोध पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया गया। इस पहल ने युवा प्रतिभागियों को रिसर्च की बारीकियों को समझने और अपने कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए तैयार किया।

शिक्षा और शोध के जरिए भविष्य की नई दिशा

GNIOT Institute of Management Studies में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन न केवल एक शैक्षणिक आयोजन रहा, बल्कि यह एक ऐसा मंच बना जिसने शिक्षा, उद्योग और नीति के बीच मजबूत सेतु का निर्माण किया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि अगर सही दिशा में शोध और नवाचार को बढ़ावा दिया जाए, तो भारत वैश्विक स्तर पर ज्ञान और प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

Gaurav sharma
Abhishek Sharma

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