Breaking News : “अब नहीं चलेगी चुप्पी!”, सूरजपुर जिला मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू, भूजल दोहन से लेकर स्कूलों-अस्पतालों की ‘लूट’ तक गरजे आंदोलनकारी, गौतमबुद्ध नगर में जनआक्रोश का बड़ा विस्फोट, प्राइवेट स्कूलों और अस्पतालों की ‘मनमानी’ पर भी उठा सवाल

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। गौतमबुद्ध नगर में वर्षों से लंबित जनसमस्याओं, बढ़ते भ्रष्टाचार, भूजल दोहन, किसानों की अनदेखी और निजी संस्थानों की मनमानी के खिलाफ आखिरकार जनता का गुस्सा खुलकर सड़कों पर उतर आया है। जिला मुख्यालय सूरजपुर सोमवार सुबह उस समय जनआक्रोश का केंद्र बन गया, जब करप्शन फ्री इंडिया संगठन के संस्थापक चौधरी प्रवीण भारतीय ने हजारों लोगों की समस्याओं को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी।
सुबह 10 बजे शुरू हुए इस आंदोलन ने देखते ही देखते एक बड़े जनांदोलन का रूप लेना शुरू कर दिया। सूरजपुर जिला मुख्यालय परिसर में बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक इकट्ठा हुए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलनकारियों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समस्याओं का स्थायी समाधान चाहिए।
“जनता परेशान, अफसर बेपरवाह” — आंदोलनकारियों का बड़ा आरोप
करप्शन फ्री इंडिया संगठन के संस्थापक सदस्य आलोक नागर ने बताया कि गौतमबुद्ध नगर में लंबे समय से कई गंभीर समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग और अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में बड़े स्तर पर बिल्डरों द्वारा अवैध भूजल दोहन किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में जल संकट और भयावह हो सकता है। जगह-जगह टैंकर माफिया सक्रिय हैं और भूमिगत जल तेजी से नीचे जा रहा है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही।
आलोक नागर ने कहा कि—“जब तक जनता सड़कों पर नहीं उतरती, तब तक प्रशासन जागता नहीं। यह भूख हड़ताल जनता की आवाज़ है और अब इसे दबाया नहीं जा सकेगा।”
किसानों की समस्याओं को लेकर भी सरकार पर निशाना
भूख हड़ताल में किसानों के मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। आंदोलनकारियों का कहना है कि जिले के किसानों को आज भी उनकी मूलभूत समस्याओं से राहत नहीं मिल रही।
कई गांवों में विकास कार्य अधूरे पड़े हैं, मुआवजा विवाद जारी हैं और स्थानीय किसानों के बच्चों को रोजगार व शिक्षा में प्राथमिकता देने के वादे केवल भाषणों तक सीमित रह गए हैं।
संगठन ने मांग उठाई कि जिन बिल्डरों और संस्थानों को किसानों की जमीन पर परियोजनाएं विकसित करने की अनुमति दी गई है, वे अपनी लीज डीड के अनुसार स्थानीय किसानों के बच्चों को शिक्षा और इलाज में विशेष छूट दें।
प्राइवेट स्कूलों और अस्पतालों की ‘मनमानी’ पर भी उठा सवाल
आंदोलनकारियों ने निजी स्कूलों और अस्पतालों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि जिले में कई निजी स्कूल और अस्पताल आम लोगों से मनमाना शुल्क वसूल रहे हैं। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार शिक्षा और इलाज के बढ़ते खर्च से परेशान हैं, लेकिन प्रशासन की निगरानी कमजोर है। आंदोलनकारियों ने मांग की कि—
निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण हो
अस्पतालों में इलाज की दरें पारदर्शी हों
स्थानीय लोगों को रियायत मिले
लूटखसोट पर तत्काल रोक लगे
नकली खाद्य पदार्थों की बिक्री पर सख्त कार्रवाई की मांग
भूख हड़ताल के दौरान खाद्य सुरक्षा का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया गया। संगठन के नेताओं ने आरोप लगाया कि बाजारों में खुलेआम नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचे जा रहे हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि खाद्य विभाग नियमित छापेमारी करे और मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
“स्थानीय युवाओं को रोजगार दो” — युवाओं की आवाज़ भी बुलंद
आंदोलन में शामिल युवाओं ने भी रोजगार के मुद्दे पर सरकार और प्रशासन को घेरा। उनका कहना था कि गौतमबुद्ध नगर में बड़ी-बड़ी कंपनियां और औद्योगिक परियोजनाएं आने के बावजूद स्थानीय युवाओं को योग्यता के अनुसार रोजगार नहीं मिल रहा।
युवाओं ने मांग की कि—
स्थानीय भर्ती नीति लागू की जाए
कंपनियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिले
स्किल डेवलपमेंट और रोजगार मेले नियमित हों
प्रशासन पर बढ़ सकता है दबाव
राजनीतिक और सामाजिक जानकारों का मानना है कि यदि यह आंदोलन लंबा चला तो प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है। गौतमबुद्ध नगर जैसे तेजी से विकसित हो रहे जिले में जनसुविधाओं, पर्यावरण और रोजगार जैसे मुद्दे लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। अब सबकी नजर प्रशासन की अगली रणनीति पर टिकी है कि वह आंदोलनकारियों से बातचीत कर समाधान निकालता है या यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेता है।
सैकड़ों लोगों ने दिया समर्थन, आंदोलन हुआ और मजबूत
भूख हड़ताल के पहले दिन ही आंदोलन को भारी जनसमर्थन मिला। सूरजपुर जिला मुख्यालय पर सैकड़ों लोग मौजूद रहे और आंदोलनकारियों के समर्थन में नारे लगाए। इस दौरान प्रमुख रूप से आलोक नागर, मास्टर दिनेश नागर, ब्रह्मपाल कपासिया, बलराज हूंण, प्रेमराज भाटी, प्रेम प्रधान, यतेंद्र नागर, बालेश्वर नागर, राकेश नागर एडवोकेट, अनिल भाटी, विजय शर्मा, सुशील प्रधान, मलखान यादव, बसंत भाटी, मोहित अधाना, गजराज भाटी, दिव्यकेश भाटी, मुकेश सोलंकी, शिवम भाटी, फूलकुवर, रिंकू, वेदपाल चौधरी, धीर सिंह, सतेंद्र, आकाश नागर, हरेंद्र कसाना, अजय नागर और कैप्टन नरेश यादव सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।



