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Greater Noida Authority News : ग्रेटर नोएडा को मिली वैश्विक शिक्षा जगत की सबसे बड़ी सौगात!, 20 एकड़ में बनेगा स्थायी विश्वस्तरीय परिसर, ऑस्ट्रेलिया की विश्वप्रसिद्ध वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी का भारत में पहला कैंपस होगा शुरू, किरायानामे के पंजीकरण के साथ खुलेगा अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का नया अध्याय

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सौम्य श्रीवास्तव ने बताया कि विश्वविद्यालय का प्रतिनिधिमंडल सोमवार सुबह दिल्ली पहुंचेगा और दोपहर में ग्रेटर नोएडा पहुंचकर प्राधिकरण के साथ किरायानामे के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करेगा। इस महत्वपूर्ण अवसर को लेकर पूरे दिन प्राधिकरण कार्यालय में युद्धस्तर पर तैयारियां चलती रहीं।

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण आने वाला है। शिक्षा के वैश्विक मानचित्र पर अपनी अलग पहचान रखने वाली ऑस्ट्रेलिया की विश्वप्रसिद्ध वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी (Western Sydney University) अब भारत में अपने पहले कैंपस की शुरुआत ग्रेटर नोएडा से करने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की दिशा में एक और बड़ा कदम सोमवार, 8 जून को उठेगा, जब विश्वविद्यालय और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बीच अस्थायी कैंपस के लिए किरायानामे का विधिवत पंजीकरण किया जाएगा। यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के नए युग की शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है। इससे ग्रेटर नोएडा की पहचान केवल औद्योगिक और आईटी हब के रूप में ही नहीं, बल्कि ग्लोबल एजुकेशन डेस्टिनेशन के रूप में भी मजबूत होगी।

ग्रेटर नोएडा बना विदेशी विश्वविद्यालयों की पहली पसंद
पिछले कुछ वर्षों में ग्रेटर नोएडा शिक्षा, उद्योग और निवेश का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। अब विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय का भारत में पहला कैंपस यहां स्थापित होने से यह शहर अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित होगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सौम्य श्रीवास्तव ने बताया कि विश्वविद्यालय का प्रतिनिधिमंडल सोमवार सुबह दिल्ली पहुंचेगा और दोपहर में ग्रेटर नोएडा पहुंचकर प्राधिकरण के साथ किरायानामे के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करेगा। इस महत्वपूर्ण अवसर को लेकर पूरे दिन प्राधिकरण कार्यालय में युद्धस्तर पर तैयारियां चलती रहीं।

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फिलहाल प्राधिकरण भवन में चलेगा अस्थायी कैंपस
स्थायी परिसर तैयार होने तक विश्वविद्यालय का संचालन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्यालय भवन से किया जाएगा। इसके लिए वाणिज्यिक न्यायालय के ऊपर स्थित चार मंजिलों में लगभग 43,000 वर्ग फुट क्षेत्र विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराया जा रहा है।जानकारी के अनुसार यह स्थान 22 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से किराये पर दिया जा रहा है। यहां आधुनिक क्लासरूम, स्मार्ट लैब, रिसर्च सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर का शैक्षणिक वातावरण विकसित किया जाएगा, ताकि छात्रों को शुरुआत से ही वैश्विक शिक्षा का अनुभव मिल सके।

भारत में पहला, दुनिया में दूसरा विदेशी कैंपस
वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स राज्य में स्थित विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में गिनी जाती है। रिसर्च, इनोवेशन और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के लिए इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान है। भारत में यह विश्वविद्यालय अपना पहला कैंपस स्थापित कर रहा है। इससे पहले उसका ऑस्ट्रेलिया के बाहर केवल सिंगापुर में एक कैंपस संचालित है। इस लिहाज से ग्रेटर नोएडा विश्वविद्यालय का दूसरा अंतरराष्ट्रीय कैंपस बनने जा रहा है, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

20 एकड़ में बनेगा स्थायी विश्वस्तरीय परिसर
विश्वविद्यालय ने ग्रेटर नोएडा में अपने स्थायी कैंपस के निर्माण के लिए लगभग 20 एकड़ भूमि की मांग की है। प्राधिकरण इस दिशा में आवश्यक प्रक्रियाओं पर कार्य कर रहा है। भूमि आवंटन और भवन निर्माण पूरा होने तक अस्थायी परिसर से ही शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी कैंपस बनने के बाद यहां हजारों भारतीय और विदेशी छात्र अध्ययन कर सकेंगे, जिससे ग्रेटर नोएडा एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित होगा।

भविष्य की तकनीकों पर आधारित होंगे पाठ्यक्रम
विश्वविद्यालय का पाठ्यक्रम पूरी तरह भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यहां छात्रों को केवल पारंपरिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि आधुनिक और वैश्विक मांग वाले विषयों में विशेषज्ञता हासिल करने का अवसर मिलेगा।
प्रस्तावित पाठ्यक्रमों में शामिल हैं—
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
डेटा साइंस
सस्टेनेबल वॉटर फ्यूचर्स
आधुनिक कृषि एवं एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी
उभरती डिजिटल टेक्नोलॉजी
रिसर्च एवं इनोवेशन आधारित अध्ययन
इन विषयों की वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए यह कैंपस भारतीय युवाओं के लिए करियर के नए अवसर खोलेगा।

विदेश जाने का खर्च बचेगा, भारत में मिलेगी अंतरराष्ट्रीय डिग्री
अब तक हजारों भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों का रुख करते रहे हैं। इससे छात्रों और उनके परिवारों पर करोड़ों रुपये का आर्थिक बोझ पड़ता है। वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी का भारत में कैंपस शुरू होने से विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता वाली शिक्षा अपने ही देश में उपलब्ध होगी। इससे विदेशी शिक्षा पर होने वाला खर्च कम होगा और अधिक छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा का लाभ मिलेगा।

ग्रेटर नोएडा की अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा बड़ा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विश्वविद्यालय के आने से केवल शिक्षा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। होटल, परिवहन, रियल एस्टेट, रिटेल, हॉस्टल, फूड इंडस्ट्री और अन्य सेवा क्षेत्रों में रोजगार एवं निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा विदेशी शिक्षकों, शोधकर्ताओं और छात्रों की आवाजाही से ग्रेटर नोएडा की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होगी।


नवंबर तक शुरू हो सकता है शैक्षणिक सत्र
प्राधिकरण के अनुसार यदि सभी औपचारिक प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो विश्वविद्यालय का पहला शैक्षणिक सत्र आगामी नवंबर तक शुरू होने की संभावना है। इससे हजारों छात्रों का इंतजार समाप्त होगा और भारत में वैश्विक शिक्षा का एक नया अध्याय शुरू होगा।
यह परियोजना उत्तर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के साथ-साथ भारत को वैश्विक शिक्षा हब बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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