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Breaking News : दिल्ली के बड़े अस्पतालों ने छोड़ी उम्मीद, यथार्थ हॉस्पिटल ने कर दिखाया चमत्कार! केवल 1% बचने की संभावना वाले मरीज को आधुनिक EVAR तकनीक से मिला नया जीवन, 25 यूनिट से ज्यादा रक्त चढ़ाने के बाद डॉक्टरों ने रची सफलता की नई कहानी

यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर, कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी डॉ. जीवन पिल्लई ने बताया कि एब्डॉमिनल एओर्टिक एन्यूरिज्म (AAA) एक बेहद खतरनाक बीमारी है, जिसके शुरुआती लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार पेट या पीठ में दर्द, मल के साथ खून आना, अचानक कमजोरी या चक्कर आने जैसी समस्याएं हों तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ग्रेटर नोएडा (नोएडा एक्सटेंशन), रफ़्तार टूडे। चिकित्सा विज्ञान में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम यदि समय पर सही निर्णय ले, तो असंभव लगने वाली परिस्थितियों को भी बदला जा सकता है। इसका जीवंत उदाहरण नोएडा एक्सटेंशन स्थित यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में देखने को मिला, जहां केवल 1 प्रतिशत बचने की संभावना वाले 63 वर्षीय मरीज को नई जिंदगी देकर डॉक्टरों ने चिकित्सा जगत में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। मरीज की हालत इतनी गंभीर थी कि दिल्ली के दो बड़े अस्पतालों ने भी उपचार करने से मना कर दिया था, लेकिन यथार्थ हॉस्पिटल की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम ने आधुनिक EVAR (Endovascular Aortic Repair) तकनीक और समन्वित उपचार के जरिए मौत के मुंह से मरीज को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

15 दिनों तक दर्द, कमजोरी और लगातार खून बहने से बिगड़ती गई हालत
जानकारी के अनुसार 63 वर्षीय मरीज पिछले लगभग 15 दिनों से लगातार पीठ दर्द, अत्यधिक कमजोरी और मल के साथ खून आने की समस्या से जूझ रहे थे। लगातार आंतरिक रक्तस्राव के कारण उनका शरीर तेजी से कमजोर होता जा रहा था। कई अस्पतालों में इलाज के दौरान उन्हें 25 यूनिट से अधिक रक्त चढ़ाया गया, लेकिन इसके बावजूद रक्तस्राव रुक नहीं रहा था। लगातार खून बहने के कारण उनका ब्लड प्रेशर बेहद नीचे पहुंच गया और उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई।

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जब मरीज की हालत और गंभीर हुई तो परिजन उन्हें दिल्ली के बड़े अस्पतालों में लेकर पहुंचे, लेकिन वहां भी स्थिति को अत्यधिक जटिल मानते हुए उपचार संभव नहीं बताया गया। इसके बाद अंतिम उम्मीद के रूप में मरीज को यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन लाया गया।

जांच में सामने आई जानलेवा बीमारी
यथार्थ हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मरीज की विस्तृत जांच की, जिसमें पता चला कि उन्हें एब्डॉमिनल एओर्टिक एन्यूरिज्म (AAA) नामक अत्यंत गंभीर बीमारी है। यह बीमारी पेट की मुख्य रक्त वाहिनी (एब्डॉमिनल एओर्टा) में सूजन और कमजोरी के कारण होती है। जांच में यह भी सामने आया कि एओर्टा और छोटी आंत के बीच एओर्टोएंटरिक फिस्टुला (Aortoenteric Fistula) बन गया था, जिससे लगातार खून छोटी आंत में जा रहा था और मल के साथ बाहर निकल रहा था। यही कारण था कि मरीज का रक्तस्राव किसी भी उपचार के बावजूद रुक नहीं पा रहा था।

पहले एंडोस्कोपी, फिर आधुनिक EVAR तकनीक से बची जान
विशेषज्ञों ने शुरुआती चरण में एंडोस्कोपी कर छोटी आंत में मौजूद कई अल्सरों की पहचान की। APC (Argon Plasma Coagulation) तकनीक के माध्यम से अस्थायी रूप से रक्तस्राव को रोका गया, लेकिन बीमारी का वास्तविक कारण समाप्त नहीं होने के कारण कुछ समय बाद फिर से ब्लीडिंग शुरू हो गई। यथार्थ हॉस्पिटल पहुंचने के बाद मरीज को तुरंत क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में भर्ती किया गया। इसके बाद कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (CTVS), गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, क्रिटिकल केयर और मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने संयुक्त रूप से उपचार की रणनीति तैयार की। 20 जून 2026 को आधुनिक EVAR (Endovascular Aortic Repair) प्रक्रिया सफलतापूर्वक की गई। इस अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से बिना बड़े ऑपरेशन के रक्त वाहिनी की मरम्मत की गई और रक्तस्राव लगभग पूरी तरह नियंत्रित हो गया।

कुछ ही दिनों में दिखने लगा सकारात्मक परिणाम
ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति लगातार बेहतर होती गई। 23 जून को की गई कैप्सूल एंडोस्कोपी में पाया गया कि छोटी आंत के अल्सर तेजी से भर रहे हैं और कहीं भी दोबारा रक्तस्राव नहीं हो रहा है। लगातार निगरानी, दवाइयों और विशेषज्ञ देखभाल के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

डॉ. जीवन पिल्लई बोले— समय पर जांच से बच सकती है जान
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर, कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी डॉ. जीवन पिल्लई ने बताया कि एब्डॉमिनल एओर्टिक एन्यूरिज्म (AAA) एक बेहद खतरनाक बीमारी है, जिसके शुरुआती लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार पेट या पीठ में दर्द, मल के साथ खून आना, अचानक कमजोरी या चक्कर आने जैसी समस्याएं हों तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक EVAR तकनीक और विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों के बेहतर समन्वय के कारण इस मरीज की जान बचाई जा सकी, जबकि उसकी बचने की संभावना बेहद कम थी।

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी टीम की भी रही अहम भूमिका
यथार्थ हॉस्पिटल के कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी डॉ. हार्दिक आहूजा ने बताया कि यह मामला चिकित्सा की दृष्टि से अत्यंत जटिल था। लगातार हो रहे रक्तस्राव के वास्तविक कारण की पहचान एंडोस्कोपी, APC उपचार और कैप्सूल एंडोस्कोपी जैसी आधुनिक जांचों के माध्यम से की गई। CTVS और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के संयुक्त प्रयासों ने मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों की टीम ने रचा नया विश्वास
यथार्थ हॉस्पिटल का यह सफल उपचार एक बार फिर साबित करता है कि गंभीर से गंभीर चिकित्सा चुनौतियों का सामना आधुनिक तकनीक, अनुभवी विशेषज्ञों और समय पर उपचार के माध्यम से किया जा सकता है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों को किसी भी गंभीर लक्षण को हल्के में नहीं लेना चाहिए और समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेना चाहिए।
यह सफलता केवल एक मरीज की जिंदगी बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं, अत्याधुनिक तकनीक और समर्पित चिकित्सा टीम की क्षमता का भी प्रमाण है। ऐसे मामलों से यह संदेश भी मिलता है कि समय पर सही अस्पताल और विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंच कई बार जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित होती है।

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