Greater Noida News : बारिश में बह गई गुणवत्ता या जल्दबाज़ी में बिछा दी सड़क?, पानी से लबालब सड़क पर दौड़ा रोलर, साइट-4 के एच ब्लॉक में सामने आया मामला, ग्रेटर नोएडा का VIDEO वायरल होते ही मचा हड़कंप, जांच के आदेश के बाद रुका निर्माण कार्य, IEA एसोसिएशन ने भी जताई चिंता

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा में लगातार हो रही बारिश के बीच सड़क निर्माण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में पानी से लबालब भरी सड़क पर डामर बिछाते हुए और उसी पानी के बीच रोड रोलर चलाते हुए देखा जा सकता है। यह दृश्य सामने आते ही स्थानीय लोगों ने निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर तत्काल जांच की मांग की। शिकायत मिलते ही अधिकारियों ने निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया। अब पूरे मामले की तकनीकी जांच कराई जा रही है, जिसके बाद ही स्पष्ट होगा कि सड़क निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जा रहा था या नहीं।
साइट-4 के एच ब्लॉक में सामने आया मामला, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
यह मामला ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र साइट-4 स्थित एच ब्लॉक का बताया जा रहा है, जहां रामलीला मैदान के पीछे सड़क निर्माण कार्य चल रहा था। पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के कारण सड़क पर काफी मात्रा में पानी जमा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव के बावजूद निर्माण एजेंसी ने काम नहीं रोका और सीधे पानी के बीच ही सड़क बनाने का कार्य शुरू कर दिया।

वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि सड़क पर पानी जमा है। इसी दौरान ट्रक से निर्माण सामग्री गिराई जा रही है और उसके ऊपर रोड रोलर चलाकर सड़क को समतल किया जा रहा है। वीडियो रिकॉर्ड कर स्थानीय नागरिकों ने इसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया और पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया।
स्थानीय लोगों ने उठाए गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि जब सड़क के नीचे पानी मौजूद है तो ऐसी स्थिति में बनाई गई सड़क कितने समय तक टिक पाएगी। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सड़कों का उद्देश्य वर्षों तक बेहतर आवागमन उपलब्ध कराना होता है, लेकिन यदि निर्माण कार्य तकनीकी मानकों की अनदेखी करते हुए किया जाएगा तो कुछ ही समय में सड़क उखड़ने और गड्ढों में तब्दील होने की आशंका बढ़ जाएगी।
निवासियों ने कहा कि बारिश के दौरान सड़क निर्माण करने से पहले जलभराव पूरी तरह हटाना और सड़क की सतह को उपयुक्त स्थिति में लाना आवश्यक माना जाता है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसी आशंका के चलते लोगों ने संबंधित विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
IEA एसोसिएशन ने भी जताई चिंता
ग्रेटर नोएडा IEA एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र की कई अंदरूनी सड़कें लंबे समय से जर्जर स्थिति में थीं, जिनके पुनर्निर्माण का कार्य उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के माध्यम से कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सड़कों का निर्माण आवश्यक है, लेकिन बारिश के दौरान जलभराव के बीच निर्माण शुरू करना तकनीकी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने के लिए सभी मानकों का पालन किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में उद्योगों और आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
शिकायत के बाद अधिकारियों ने रुकवाया निर्माण कार्य
स्थानीय लोगों की शिकायत और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद संबंधित अधिकारियों ने तत्काल संज्ञान लिया। निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी टीम स्थल का निरीक्षण करेगी और यह जांच करेगी कि निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों और तकनीकी दिशानिर्देशों के अनुरूप किया जा रहा था या नहीं। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
हालांकि अभी तक किसी भी अधिकारी ने निर्माण कार्य में अनियमितता या भ्रष्टाचार की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर जांच शुरू की गई है और तकनीकी परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क निर्माण की प्रक्रिया सही थी या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क निर्माण एक तकनीकी प्रक्रिया है, जिसमें मौसम, सतह की स्थिति और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का विशेष महत्व होता है। यदि इन मानकों का पालन नहीं किया जाता तो सड़क की मजबूती और उसकी आयु दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
पारदर्शिता और गुणवत्ता की बढ़ी मांग
इस घटना के बाद एक बार फिर सार्वजनिक निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों की गति जितनी महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक जरूरी उनकी गुणवत्ता है। यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप होंगे, तभी सरकारी धन का सही उपयोग होगा और जनता को लंबे समय तक बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट तय करेगी कि वायरल वीडियो केवल एक गलतफहमी था या फिर वास्तव में निर्माण प्रक्रिया में तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई। यदि अनियमितता साबित होती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होने की संभावना भी जताई जा रही है।



