Breaking Farmers News : 15 साल पुराना वादा, 4 प्रतिशत ज़मीन पर अटका इंसाफ!, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर किसानों का अनशन, एसीईओ सुमित यादव पहुंचे धरना स्थल, जूस पिलाकर खत्म कराया आंदोलन; एक महीने की मोहलत, फिर अनिश्चितकालीन संघर्ष की चेतावनी, 2011 के समझौते का हवाला, किसानों ने कहा—वादा पूरा करो
दिनभर चले शांतिपूर्ण अनशन के बाद शाम को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ) सुमित यादव धरना स्थल पहुंचे, जहां उन्होंने किसान प्रतिनिधियों से विस्तार से वार्ता की। बातचीत के बाद एसीईओ ने एक माह के भीतर मांगों के समाधान की दिशा में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया और किसानों को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। हालांकि किसानों ने साफ कर दिया कि यह आंदोलन फिलहाल केवल स्थगित हुआ है, समाप्त नहीं

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर वर्षों से लंबित किसानों की मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन की गूंज सुनाई दी। शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड के आवंटन की मांग को लेकर विभिन्न गांवों के किसान बुधवार को बड़ी संख्या में प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे और सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक एक दिवसीय सांकेतिक अनशन पर बैठे। किसानों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2011 में हुए समझौते के बावजूद आज तक उन्हें उनका पूरा अधिकार नहीं मिला है। दिनभर चले शांतिपूर्ण अनशन के बाद शाम को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ) सुमित यादव धरना स्थल पहुंचे, जहां उन्होंने किसान प्रतिनिधियों से विस्तार से वार्ता की। बातचीत के बाद एसीईओ ने एक माह के भीतर मांगों के समाधान की दिशा में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया और किसानों को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। हालांकि किसानों ने साफ कर दिया कि यह आंदोलन फिलहाल केवल स्थगित हुआ है, समाप्त नहीं। यदि तय समय सीमा के भीतर उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे फिर से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे और आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे।
2011 के समझौते का हवाला, किसानों ने कहा—वादा पूरा करो
अनशन के दौरान किसानों ने कहा कि वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी रामारमन के साथ हुए समझौते में स्पष्ट रूप से यह तय हुआ था कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को 64.7 प्रतिशत बढ़ा हुआ मुआवजा और 10 प्रतिशत विकसित भूखंड दिए जाएंगे। किसानों का कहना है कि बढ़े हुए मुआवजे का लाभ तो उन्हें मिल गया, लेकिन विकसित भूखंड के मामले में आज भी न्याय अधूरा है। किसान नेताओं के अनुसार, उन्हें केवल 6 प्रतिशत विकसित भूखंड ही आवंटित किए गए, जबकि शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड का आवंटन वर्षों बाद भी नहीं हो सका। यही लंबित मांग अब किसानों के आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है।

किसानों का आरोप—वादाखिलाफी से बढ़ रहा असंतोष
धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने प्राधिकरण पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस परिणाम दिखाई नहीं देता। कई बार ज्ञापन सौंपे गए, अधिकारियों से मुलाकात की गई और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। किसानों ने कहा कि उनकी मांग कोई नई नहीं है, बल्कि वर्षों पहले हुए आधिकारिक समझौते के पालन की मांग है। उनका कहना है कि यदि समझौते का एक हिस्सा लागू किया जा सकता है तो दूसरा हिस्सा भी पूरी ईमानदारी से लागू किया जाना चाहिए।
बुजुर्ग, युवा और महिलाओं की रही बड़ी भागीदारी
एक दिवसीय अनशन में केवल किसान नेता ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में विभिन्न गांवों के बुजुर्ग किसान, युवा, महिलाएं और प्रभावित परिवार भी शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे। धरना स्थल पर किसानों ने कहा कि यह केवल जमीन का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके अधिकार, सम्मान और वर्षों पुराने सरकारी वादे को पूरा कराने की लड़ाई है।
शाम को पहुंचे एसीईओ, किसानों से की लंबी वार्ता
दिनभर चले अनशन के बाद शाम करीब पांच बजे ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सुमित यादव धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने किसान प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बातचीत की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। वार्ता के दौरान एसीईओ ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर सकारात्मक दृष्टिकोण से विचार किया जाएगा तथा एक माह के भीतर समाधान की दिशा में आवश्यक कार्रवाई शुरू की जाएगी। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद एसीईओ ने किसानों को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया।
किसानों ने दी अंतिम चेतावनी
अनशन समाप्त होने के बाद किसान नेताओं ने स्पष्ट कहा कि वे प्राधिकरण को एक महीने का समय दे रहे हैं। यदि इस अवधि में शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड के आवंटन को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन फिर शुरू होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगली बार आंदोलन केवल एक दिवसीय नहीं होगा, बल्कि अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो इसे पूरे क्षेत्र के किसानों का बड़ा जनआंदोलन बनाया जाएगा।
ग्रेटर नोएडा के विकास के साथ किसानों के अधिकार भी जरूरी
किसानों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा आज देश के सबसे तेजी से विकसित होते शहरों में शामिल है। औद्योगिक निवेश, नई सड़कें, मेट्रो परियोजनाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित हो रही हैं, लेकिन जिन किसानों की जमीन पर यह विकास खड़ा हुआ है, उनके अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब किसानों के साथ हुए समझौतों का भी पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी से पालन किया जाए।
अब सबकी निगाहें एक महीने पर
फिलहाल किसानों ने प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा जताते हुए अपना अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन अब सभी की निगाहें अगले एक महीने पर टिकी हैं। यदि इस दौरान प्राधिकरण कोई ठोस फैसला लेता है तो वर्षों से लंबित यह विवाद समाप्त हो सकता है, लेकिन यदि कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रेटर नोएडा में किसानों का आंदोलन एक बार फिर बड़ा रूप ले सकता है।



