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Noida 150 News : सेक्टर-150 का 'मौत का टैंक' बना दो परिवारों का काल!, जहरीली गैस ने छीनी दो जिंदगियां, लापरवाही पर ठेकेदार गिरफ्तार, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल, सफाई के दौरान अचानक बेहोश हुआ कर्मचारी, बचाने उतरा गार्ड भी बन गया हादसे का शिकार, STP टैंक की सफाई में सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी जानलेवा

नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एल्डिको सोसाइटी में शनिवार देर रात हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में टैंक की सफाई कर रहे कर्मचारी और उन्हें बचाने के लिए बिना अपनी जान की परवाह किए टैंक में उतरे सिक्योरिटी गार्ड शामिल हैं।

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एल्डिको सोसाइटी में शनिवार देर रात हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में टैंक की सफाई कर रहे कर्मचारी और उन्हें बचाने के लिए बिना अपनी जान की परवाह किए टैंक में उतरे सिक्योरिटी गार्ड शामिल हैं। यह हादसा न केवल दो परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति बन गया, बल्कि सोसाइटियों में एसटीपी और सीवर टैंकों की सफाई के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर गया। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी किस स्तर पर हुई और इस हादसे के लिए जिम्मेदार कौन-कौन लोग हैं।

सफाई के दौरान अचानक बेहोश हुआ कर्मचारी

पुलिस के अनुसार, मृतक शशिकांत शर्मा (40) पुत्र ओमप्रकाश शर्मा, निवासी ग्राम गड़मुरा, जिला करौली (राजस्थान), एल्डिको सोसाइटी के एसटीपी टैंक की सफाई का कार्य कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सफाई के दौरान अचानक टैंक के भीतर मौजूद जहरीली गैस का प्रभाव बढ़ गया, जिससे शशिकांत शर्मा कुछ ही क्षणों में बेहोश होकर टैंक के अंदर गिर पड़े। बताया जा रहा है कि टैंक के भीतर पर्याप्त वेंटिलेशन और गैस परीक्षण जैसी अनिवार्य सुरक्षा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। यही लापरवाही हादसे की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।

बचाने उतरा गार्ड भी बन गया हादसे का शिकार

जब सिक्योरिटी गार्ड आकाश (22) पुत्र भगवान सिंह, निवासी ग्राम इटहारी, जिला फिरोजाबाद ने शशिकांत को टैंक के अंदर बेहोश देखा तो उन्होंने बिना देर किए उन्हें बचाने के लिए टैंक में छलांग लगा दी। लेकिन जहरीली गैस का असर उन पर भी हुआ और कुछ ही क्षणों में वह भी बेहोश होकर वहीं गिर पड़े। दोनों को बाहर निकालने के प्रयास शुरू हुए, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। यह घटना बहादुरी और मानवता की मिसाल तो बनी, लेकिन अंत दोनों के लिए बेहद दुखद साबित हुआ।

रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद अस्पताल में तोड़ा दम

घटना की सूचना मिलते ही थाना नॉलेज पार्क पुलिस, फायर सर्विस और अन्य बचाव दल मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद दोनों को टैंक से बाहर निकाला गया और तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने दोनों शवों का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना की सूचना मिलते ही मृतकों के परिजनों में कोहराम मच गया।

ठेकेदार गिरफ्तार, पुलिस ने शुरू की सख्त कार्रवाई

प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आने के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह जांच की जा रही है कि क्या कर्मचारियों को गैस मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर, सेफ्टी बेल्ट, सेफ्टी रोप और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे या नहीं। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एसटीपी टैंक की सफाई में सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी जानलेवा

विशेषज्ञों का कहना है कि एसटीपी और सीवर टैंक के भीतर मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें मौजूद हो सकती हैं। ऐसे स्थानों पर बिना गैस परीक्षण और सुरक्षा उपकरणों के प्रवेश करना बेहद खतरनाक होता है। मानक प्रक्रिया के अनुसार किसी भी कर्मचारी को टैंक में उतारने से पहले गैस डिटेक्टर से परीक्षण, पर्याप्त वेंटिलेशन, ऑक्सीजन की उपलब्धता, सुरक्षा रस्सी, गैस मास्क और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की व्यवस्था अनिवार्य होती है।

सोसाइटी में पसरा मातम, लोगों में आक्रोश

घटना के बाद एल्डिको सोसाइटी में शोक का माहौल है। स्थानीय निवासियों ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता तो दो निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जिले की सभी सोसाइटियों में एसटीपी संचालन और सफाई व्यवस्था का विशेष ऑडिट कराया जाए।

सुरक्षा व्यवस्था की होगी व्यापक जांच

पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि संबंधित एजेंसी और ठेकेदार ने श्रम कानूनों तथा औद्योगिक सुरक्षा मानकों का पालन किया था या नहीं। यदि जांच में अन्य अधिकारियों या एजेंसियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा एक बार फिर यह याद दिलाता है कि सीवर और एसटीपी टैंकों में कार्य करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं की जा सकती। थोड़ी-सी लापरवाही दो परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन सकती है।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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