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Active Citizen Team News : “नोएडा में इलाज नहीं, जेब का ऑपरेशन हो रहा!”, निजी अस्पतालों के लिए फिर निकले प्लॉट तो भड़क उठे नागरिक, बोले- ‘अब चाहिए सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, नहीं तो आम आदमी का इलाज भगवान भरोसे’, एक्टिव सिटीजन टीम ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, कहा प्राधिकरण खुद बनाए अस्पताल”

“इलाज के नाम पर लोन लेना पड़ता है”, एक्टिव सिटीजन टीम ने उठाई आम जनता की आवाज, मुख्यमंत्री से की बड़ी मांग —“95% अस्पताल पहले ही प्राइवेट, गरीब-किसान आखिर कहां जाए?”

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे हाईटेक शहरों में चमचमाती इमारतें, एक्सप्रेसवे और बड़े-बड़े कॉर्पोरेट कैंपस तो तेजी से खड़े हो रहे हैं, लेकिन जब बात आम आदमी के इलाज की आती है तो हालात अब भी बेहद चिंताजनक दिखाई देते हैं। इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को जिला कलेक्ट्रेट परिसर में एक बड़ा जनसरोकार वाला मामला सामने आया, जब एक्टिव सिटीजन टीम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए नोएडा प्राधिकरण की उस योजना का विरोध किया, जिसमें दो अस्पतालों के प्लॉट निजी संस्थाओं को आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
संगठन के सदस्यों ने साफ शब्दों में कहा कि नोएडा में पहले से ही अधिकांश अस्पताल निजी हाथों में हैं और आम नागरिक महंगे इलाज की मार झेलने को मजबूर है। ऐसे में नई जमीनें निजी अस्पतालों को देने के बजाय सरकार और प्राधिकरण को स्वयं बड़े सरकारी अस्पताल बनाने चाहिए, ताकि गरीब, किसान, मजदूर, नौकरीपेशा और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत मिल सके।


“इलाज के नाम पर लोन लेना पड़ता है”, एक्टिव सिटीजन टीम ने उठाई आम जनता की आवाज
कलेक्ट्रेट पहुंचे एक्टिव सिटीजन टीम के सरदार संरक्षक मंजीत सिंह ने कहा कि नोएडा अथॉरिटी द्वारा अस्पतालों के लिए निकाले गए प्लॉटों का बोली के माध्यम से निजी संस्थाओं को आवंटन किया जाना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि—“नोएडा और आसपास के क्षेत्र में पहले से लगभग 95 प्रतिशत अस्पताल निजी हैं। यहां इलाज इतना महंगा है कि आम आदमी अस्पताल का बिल सुनकर ही घबरा जाता है। गरीब, किसान, मजदूर और नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़े निजी अस्पतालों में इलाज कराना लगभग असंभव हो चुका है।”।उन्होंने कहा कि इलाज अब सेवा नहीं बल्कि बड़ा व्यवसाय बनता जा रहा है। कई परिवार बीमारी के कारण आर्थिक रूप से टूट जाते हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सरकारी स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करे।

“सरकारी अस्पताल नहीं होंगे तो हाईटेक शहर का क्या फायदा?”
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि नोएडा जैसे तेजी से विकसित होते शहर में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बेहद सीमित हैं। करोड़ों की आबादी वाले इस क्षेत्र में आज भी लोगों को गंभीर इलाज के लिए दिल्ली या दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। एक्टिव सिटीजन टीम के सदस्य आलोक सिंह ने कहा कि इससे पहले भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा विरोध के बावजूद अस्पतालों के चार प्लॉट निजी कंपनियों को आवंटित कर दिए गए थे। अब एक बार फिर वही प्रक्रिया शुरू हो रही है, जिसका संगठन विरोध कर रहा है।
उन्होंने कहा—“जब पूरे शहर में निजी अस्पतालों की भरमार है, तो नई जमीनें भी प्राइवेट सेक्टर को देना आम जनता के हित में नहीं है। सरकार को खुद सुपर स्पेशियलिटी सरकारी अस्पताल बनाना चाहिए, जहां गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को सस्ता और बेहतर इलाज मिल सके।”

“बीमारी से पहले ही मरीज आर्थिक रूप से टूट जाता है”
संगठन के अध्यक्ष हरेंद्र भाटी ने कहा कि निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च इतना ज्यादा होता है कि कई परिवारों को कर्ज तक लेना पड़ता है। उन्होंने कहा कि— एक सामान्य सर्जरी में लाखों रुपये का बिल थमा दिया जाता है
ICU और दवाइयों के नाम पर भारी वसूली होती है
गरीब मरीजों के लिए इलाज करवाना किसी चुनौती से कम नहीं, उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएं केवल अमीर वर्ग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हर नागरिक का बेहतर इलाज पाने का अधिकार है।

मुख्यमंत्री से की बड़ी मांग — “प्राधिकरण खुद बनाए अस्पताल”
एक्टिव सिटीजन टीम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि—
अस्पतालों के प्लॉट निजी कंपनियों को देने की प्रक्रिया रोकी जाए
नोएडा अथॉरिटी और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी स्वयं सरकारी अस्पताल बनाएं
मल्टीस्पेशियलिटी और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं विकसित की जाएं
गरीब और मध्यम वर्ग को सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं
आयुष्मान और सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो

“हाईटेक शहर को हाईटेक स्वास्थ्य व्यवस्था भी चाहिए”
संगठन ने कहा कि नोएडा केवल आईटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट का शहर बनकर नहीं रह सकता। यहां रहने वाले लाखों लोगों के लिए मजबूत और सुलभ सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।
लोगों का कहना है कि यदि सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करती है तो यह फैसला आने वाले समय में लाखों परिवारों के लिए राहत साबित हो सकता है।

ज्ञापन देने पहुंचे ये लोग रहे मौजूद
कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपने के दौरान एक्टिव सिटीजन टीम के कई सदस्य मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—मंजीत सिंह, साधना सिन्हा, हरेंद्र भाटी, आलोक सिंह, सुनील प्रधान,।रमेश प्रेमचंदानी शामिल रहे।


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