
नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा की हाईराइज सोसायटियों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए जिला उपभोक्ता आयोग का एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है, जिसने रेजिडेंट्स की सुरक्षा को लेकर एसोसिएशन ऑफ अपार्टमेंट ओनर्स (AOA) की जिम्मेदारियों को स्पष्ट कर दिया है। सेक्टर-82 स्थित केंद्रीय विहार-2 सोसायटी में चार वर्षीय मासूम बच्ची पर आवारा कुत्ते के हमले के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने एओए को जिम्मेदार मानते हुए डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने स्पष्ट कहा कि जब एओए निवासियों से मेंटेनेंस और सुरक्षा शुल्क वसूलती है, तो सोसायटी परिसर में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उसकी कानूनी जिम्मेदारी है। यह फैसला केवल एक परिवार को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और एनसीआर की हजारों सोसायटियों के लिए एक बड़ा कानूनी संदेश भी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब यदि सोसायटी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही सामने आती है, तो एओए को उसकी जवाबदेही से बचना आसान नहीं होगा।
2022 की घटना ने खड़े किए थे गंभीर सवाल
यह मामला वर्ष 2022 का है, जब सेक्टर-82 स्थित केंद्रीय विहार-2 सोसायटी में रहने वाले आशीष कुमार अग्रवाल की चार वर्षीय बेटी शायरा सोसायटी परिसर में खेल रही थी। इसी दौरान एक कुत्ते ने उस पर अचानक हमला कर दिया। हमले में बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई और उसे तत्काल अस्पताल ले जाकर उपचार कराना पड़ा। इस घटना ने परिवार को मानसिक और शारीरिक रूप से गहरा आघात पहुंचाया। इलाज के बाद बच्ची के पिता ने न्याय की मांग करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने नोएडा प्राधिकरण और सोसायटी की एओए दोनों को पक्षकार बनाते हुए शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि सोसायटी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण यह हादसा हुआ।

प्राधिकरण ने झाड़ा पल्ला, आयोग ने तय की जिम्मेदारी
मामले की सुनवाई के दौरान नोएडा प्राधिकरण ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि संबंधित सोसायटी की देखरेख और सुरक्षा का जिम्मा एओए के पास है। चूंकि एओए निवासियों से नियमित रूप से मेंटेनेंस और सुरक्षा शुल्क वसूलती है, इसलिए परिसर के भीतर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना उसी की जिम्मेदारी है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने एओए को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी माना। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि यदि कोई संस्था सुरक्षा शुल्क ले रही है, तो उसे निवासियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त और प्रभावी व्यवस्था करनी होगी। इस मामले में ऐसा नहीं किया गया, जिसके कारण एक मासूम बच्ची गंभीर रूप से घायल हुई।
30 दिनों के भीतर देना होगा मुआवजा
आयोग ने अपने आदेश में एओए को निर्देश दिया कि वह 30 दिनों के भीतर पीड़ित परिवार को डेढ़ लाख रुपये का मुआवजा अदा करे। आयोग ने माना कि यह घटना केवल शारीरिक चोट तक सीमित नहीं थी, बल्कि इससे परिवार को मानसिक पीड़ा और असुरक्षा की भावना का भी सामना करना पड़ा। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है। यदि किसी सोसायटी में सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी के कारण निवासी नुकसान उठाते हैं, तो संबंधित एओए को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
अब बढ़ेगी AOA की जिम्मेदारी
इस फैसले के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा की अनेक आवासीय सोसायटियों में एओए की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब एओए को केवल मेंटेनेंस कार्यों तक सीमित न रहकर सुरक्षा व्यवस्था, आवारा पशुओं के नियंत्रण, नियमित निगरानी और निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सभी सोसायटियों को अब अपने सुरक्षा मानकों की समीक्षा करनी चाहिए। यदि परिसर में आवारा कुत्तों या अन्य सुरक्षा संबंधी समस्याओं की शिकायतें लगातार मिल रही हैं, तो समय रहते प्रभावी कदम उठाना आवश्यक होगा, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति न हो।
निवासियों के अधिकारों को मिली नई मजबूती
उपभोक्ता आयोग का यह फैसला उन लाखों लोगों के लिए भी राहत की खबर है, जो नियमित रूप से मेंटेनेंस और सुरक्षा शुल्क का भुगतान करते हैं। आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शुल्क लेने वाली संस्था अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकती। यदि सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही बरती जाती है और उसका खामियाजा किसी निवासी को भुगतना पड़ता है, तो संबंधित संस्था को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
नोएडा की यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि आधुनिक आवासीय सोसायटियों में केवल सुविधाएं ही नहीं, बल्कि सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उम्मीद की जा रही है कि इस फैसले के बाद एओए अधिक सतर्क होंगी और निवासियों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाएंगी।



