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Breaking Authority News : सीवर का गंदा खेल पड़ा भारी!, 167 सोसायटियों पर 9 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना, अब प्राधिकरण ने चला ‘आरसी वाला ब्रह्मास्त्र’, डीएम दफ्तर के पाले में पहुंची वसूली की गेंद, एसटीपी बंद, गंदा पानी सीधे नालों में, नोटिस पर भी नहीं जागे बिल्डर और एओए; अब सुपरटेक, गौड़ सिटी, पंचशील, ACE, महागुन समेत दर्जनों सोसायटियों पर सख्ती

इनमें सुपरटेक इको विलेज-1, सुपरटेक इको विलेज-2, पंचशील हाइनिश, एसीई एस्पायर, अरिहंत आर्डेन, आरसिटी रेजेंसी, गौड़ सिटी 10वें एवेन्यू, पंचशील ग्रीन-1, पाम ओलंपिया, गैलेक्सी नॉर्थ एवेन्यू, हिमालया प्राइड, हैबिटेक पंचतत्व, महागुन, गैलेक्सी रॉयल, गौड़ सिटी 11वें एवेन्यू, समृद्धि गार्डन एवेन्यू, चेरी काउंटी, फ्यूजन होम्स, ग्रीनआर्च, आनंदम सोसायटी एनटीपीसी, संस्कृति विहार, गौर सिटी सेंटर और स्टेलर जीवन समेत कई अन्य सोसायटियां शामिल हैं।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईराइज सोसायटियों में रहने वाले लाखों लोगों के बीच एक बार फिर सीवरेज और पर्यावरण सुरक्षा का मुद्दा सुर्खियों में है। पिछले कई वर्षों से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के संचालन में बरती जा रही लापरवाही अब सोसायटियों के लिए भारी पड़ती नजर आ रही है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा विभिन्न सोसायटियों पर लगाए गए करोड़ों रुपये के जुर्माने की वसूली एक बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में प्राधिकरण ने अब सख्त रुख अपनाते हुए 167 सोसायटियों के खिलाफ आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी कर पूरी गेंद जिला प्रशासन के पाले में डाल दी है।
करीब 9.42 करोड़ रुपये की बकाया जुर्माना राशि की वसूली के लिए आरसी को जिलाधिकारी कार्यालय भेज दिया गया है। अब प्रशासनिक स्तर पर इन बकायेदार सोसायटियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

सालों तक चलता रहा सीवर का खेल, पर्यावरण नियमों की उड़ती रही धज्जियां
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2019 से लेकर मई 2026 तक विभिन्न सोसायटियों का निरीक्षण किया गया था। जांच के दौरान सामने आया कि कई स्थानों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट या तो बंद पड़े थे या फिर निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित नहीं किए जा रहे थे। स्थिति इतनी गंभीर थी कि बड़ी मात्रा में निकलने वाले गंदे सीवर के पानी को बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे नालों और ड्रेनों में छोड़ा जा रहा था। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा था, बल्कि भूजल और आसपास के क्षेत्रों की स्वच्छता पर भी खतरा मंडरा रहा था।
प्राधिकरण की टीम ने यह भी पाया कि जिन सोसायटियों में सीवेज का शोधन किया जा रहा था, वहां भी शोधित जल का पुनः उपयोग नहीं किया जा रहा था। जबकि नियमों के अनुसार शोधित पानी का इस्तेमाल बागवानी, फ्लशिंग और अन्य गैर-पीने योग्य कार्यों में किया जाना चाहिए।

बार-बार नोटिस, फिर भी नहीं जमा किया जुर्माना
इन अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए प्राधिकरण ने अलग-अलग चरणों में 167 सोसायटियों पर कुल 9 करोड़ 42 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया था। इसके बाद संबंधित बिल्डरों और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशनों (AOA) को कई बार नोटिस भेजे गए और बकाया राशि जमा करने के लिए कहा गया। लेकिन प्राधिकरण के मुताबिक अधिकांश सोसायटियों ने न तो निर्धारित समय में जुर्माना जमा किया और न ही इस मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद अब प्राधिकरण ने अंतिम विकल्प के रूप में आरसी जारी कर दी है।

डीएम कार्यालय करेगा वसूली की कार्रवाई
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सभी आरसी जिलाधिकारी कार्यालय को भेज दी हैं। अब राजस्व वसूली की प्रक्रिया के तहत प्रशासन इन बकायेदार सोसायटियों और संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि समय रहते एसटीपी का संचालन नहीं सुधारा गया तो आने वाले समय में और भी कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।

इन प्रमुख सोसायटियों पर है करोड़ों रुपये की देनदारी
आरसी जारी होने वाली प्रमुख सोसायटियों में ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई चर्चित हाईराइज परियोजनाएं शामिल हैं।
इनमें सुपरटेक इको विलेज-1, सुपरटेक इको विलेज-2, पंचशील हाइनिश, एसीई एस्पायर, अरिहंत आर्डेन, आरसिटी रेजेंसी, गौड़ सिटी 10वें एवेन्यू, पंचशील ग्रीन-1, पाम ओलंपिया, गैलेक्सी नॉर्थ एवेन्यू, हिमालया प्राइड, हैबिटेक पंचतत्व, महागुन, गैलेक्सी रॉयल, गौड़ सिटी 11वें एवेन्यू, समृद्धि गार्डन एवेन्यू, चेरी काउंटी, फ्यूजन होम्स, ग्रीनआर्च, आनंदम सोसायटी एनटीपीसी, संस्कृति विहार, गौर सिटी सेंटर और स्टेलर जीवन समेत कई अन्य सोसायटियां शामिल हैं।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्राधिकरण का कड़ा संदेश
प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि सीवेज प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। हाईराइज सोसायटियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और ऐसे में एसटीपी का सुचारु संचालन बेहद आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शोधित पानी का उचित उपयोग किया जाए तो भूजल पर निर्भरता कम होगी और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। लेकिन कई स्थानों पर लापरवाही के कारण पूरा सिस्टम प्रभावित हो रहा है।

आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है सख्ती
प्राधिकरण सूत्रों का कहना है कि यदि बकाया राशि जमा नहीं होती और एसटीपी संचालन में सुधार नहीं किया जाता, तो भविष्य में और कठोर कार्रवाई की जा सकती है। इसमें अतिरिक्त जुर्माना, कानूनी कार्रवाई और अन्य प्रशासनिक कदम भी शामिल हो सकते हैं। ग्रेटर नोएडा में तेजी से बढ़ती आबादी और हाईराइज संस्कृति के बीच सीवेज प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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